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क्या सच में यहां हुआ था शिव-पार्वती का विवाह? जानिए बैजनाथ मंदिर की पूरी जानकारी

इस आर्टिकल में हम आपको उत्तराखंड के बागेश्वर में स्थित 870 साल पुराने बैजनाथ मंदिर का इतिहास और कत्युरी राजवंश से जुड़ा इसके संबंध के बारे में बताएंगे.

क्या सच में यहां हुआ था शिव-पार्वती का विवाह? जानिए बैजनाथ मंदिर की पूरी जानकारी

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गोमती नदी के किनारे बसा बैजनाथ मंदिर एक बहुत ही सुंदर और ऐतिहासिक धाम है. ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. इतिहास और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कत्युरी वंश के राजाओं ने करवाया था.

इसका निर्माण लगभग 1150 ईस्वी के आसपास हुआ था. उस दौर में बैजनाथ को कार्तिकेयपुर के नाम से जाना जाता था और ये कत्युरी राजाओं की राजधानी हुआ करता था.

मंदिर की वास्तुकला और खास बातें

बैजनाथ मंदिर में काले पत्थर से तराशी गई मां पार्वती की एक बेहद खूबसूरत मूर्ति स्थापित है. नदी के किनारे से मंदिर तक पहुंचने के लिए पत्थरों की सीढ़ियां बनी हुई हैं.

कहा जाता है कि इन सीढ़ियों का निर्माण कत्युरी रानी के आदेश पर कराया गया था. मुख्य मंदिर के पास ही बामनी का मंदिर भी स्थित है.

मंदिर परिसर के ठीक बाहर एक झील है. इसमें गोल्डन महासीर नाम की दुर्लभ मछलियां पाई जाती हैं. यहां मछलियों का शिकार करना सख्त मना है. यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक बड़े चाव से मछलियों को आटा और चना खिलाते हैं.

धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं

धार्मिक कथाओं के अनुसार बैजनाथ वह पवित्र स्थान है जहां भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. ये विवाह गोमती और गरुड़ गंगा नदी के संगम पर संपन्न हुआ था.

बैजनाथ का अर्थ है वैद्यनाथ यानी वैद्यों के देव भगवान शिव. इस पूरे मंदिर परिसर में शिवजी के अलावा गणेश जी, पार्वती जी, चंडिका, कुबेर, सूर्य और ब्रह्मा जी की प्राचीन मूर्तियां भी स्थापित हैं.

एक स्थानीय लोक मान्यता ये भी मानती है कि इस मंदिर का निर्माण एक ब्राह्मण महिला ने करवाया था.

आसपास के दर्शनीय स्थान

बैजनाथ के पास ही लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर भगवती माता कोट भ्रामरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है. इसे लोग कोट का मंदिर भी कहते हैं. किसी जमाने में ये कत्युरी राजाओं का एक मजबूत किला हुआ करता था.

मान्यता है कि महान संत आदिगुरु शंकराचार्य ने बद्रीनाथ की यात्रा के दौरान यहां एक रात विश्राम किया था. इसके अलावा पास में ही गरुड़ नाम का एक बड़ा बाजार है. जहां से पर्यटक अपनी जरूरत का सामान आसानी से खरीद सकते हैं.

रहने की व्यवस्था और सही मौसम

बैजनाथ में ठहरने के लिए बहुत बड़े होटल या लग्जरी रिसॉर्ट्स नहीं मिलते हैं. यहां ज्यादातर बजट होटल और गेस्ट हाउस ही उपलब्ध हैं. सरकारी गेस्ट हाउस में रुकने की अच्छी और सस्ती सुविधा मिल जाती है.

अधिकांश पर्यटक कौसानी में रुकना पसंद करते हैं और वहां से बैजनाथ घूमने आते हैं. बैजनाथ घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से मई के बीच माना जाता है. गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है और सर्दियों में हल्की ठंड पड़ती है.

कैसे पहुंचें बैजनाथ मंदिर?

बैजनाथ उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से करीब 300 किलोमीटर और कौसानी से सिर्फ 17 किलोमीटर दूर है. हल्द्वानी और काठगोदाम से भी सड़क मार्ग द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है.

इसका नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो यहां से लगभग 144 किलोमीटर दूर है. यदि आप हवाई जहाज से आना चाहते हैं तो सबसे नजदीकी चालू एयरपोर्ट दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है.

सड़क मार्ग से बस या टैक्सी लेकर आप बेहद आसानी से इस ऐतिहासिक और पवित्र धाम तक पहुंच सकते हैं.

डिस्क्लेमर (Disclaimer):
इस लेख में दी गई जानकारी ऐतिहासिक तथ्यों, स्थानीय मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और पर्यटन गाइड पर आधारित है. यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और पाठकों की रुचि के उद्देश्य से साझा की गई है. यात्रा से जुड़ी परिस्थितियों या स्थानीय नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकता है, इसलिए किसी भी यात्रा की योजना बनाने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि अवश्य कर लें. हमारी वेबसाइट/चैनल इस लेख में दी गई जानकारियों के पूर्ण सटीक होने का दावा नहीं करता है.

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Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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