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राहु एक छाया ग्रह है. ज्योतिष शास्त्र के अनुासार राहु महत्वाकांक्षा, अचानक होने वाली घटनाओं से लेकर विदेश यात्रा व छलावा का कारक है. राहु ही है जो जातक को कई संघर्षों और कड़ी मेहनत के बाद सफलता दिलाता है. हालांकि अगर कुंडली में राहु की स्थिति कमजोर है तो व्यक्ति बहुत भ्रमित रहता है और उसके जीवन में अस्थिरता की ओरबनी रहती है. व्यक्ति मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी झेलने लगता है और जीवन में कई बाधाएं आने लगती हैं. आइए जानें कुंडली में कमजोर राहु के लक्षण क्या है और किन उपायों को करके राहु की बुरी स्तिथि को सुधार सकते हैं.
अगर कुंडली में राहु की स्थिति ठीक न हो तो व्यक्ति बड़ी-बड़ी गलतफहमियों का शिकार होने लगता है.
मन में हमेशा किसी न किसी बात को लेकर बेचैनी बनी ही रहती है. नकारात्मक विचारों की ओर ही दिमाग चलने को कहता है.
व्यक्ति को बार-बार ऐसा महसूस होना जैसे कोई उसके ऊपर लगातार नजर रख रहा है. बार-बार अपने फैसले बदलना.
राहु की स्थिति सही न होने व्यक्ति को लगातार ऐसा महसूस होता है कि उस पर किसी तरह का जादू टोना हुआ है.
राहु की स्थिति सही न होने पर व्यक्ति भ्रम की स्थिति में रहता है और सही चीजों को भी अबनी इस आदत के सब खराब कर दोता है.
अगर बच्चों की कुंडली में राहु की स्थिति खराब हो तो उन्हें बार-बार चोट लगती है.
राहु खराब होने पर व्यक्ति साफ-सफाई पर ध्यान नहीं देता है. धर्म-कर्म में झुकाव कम हो जाता है.
डरावने या बुरे सपने व्यक्ति को लगातार आते हैं. मानसिक तनाव होने से दिमाग से जुड़ी समस्या होने का डर बना रहता है.
अधिक सोचना और पेट से जुड़ी परेशानियों का होना. मुख्य द्वार का चौखट नीचे कि ओर धंसते जाना.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं एवं ग्रह गोचर की व्याख्याओं पर आधारित है. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें, न कि किसी निश्चित परिणाम या भविष्यवाणी के दावे के रूप में. किसी भी व्यक्ति पर ग्रह गोचर का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा, अंतर्दशा तथा अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.)