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क्या है 'अलाया बलैया' की रस्म? जिससे दूर होती है बच्चों की बुरी नजर और बलाएं

दीवाली की शाम उत्तर प्रदेश के गांवों में बच्चों की बुरी नजर और नेगेटिविटी दूर करने के लिए अलाया बलैया उतारने की एक अनोखी लोक परंपरा निभाई जाती है. इस रस्म में पानी, पुरानी झाड़ू या मशाल के जरिए बच्चों की नजर उतारकर उसे घर से बाहर चौराहे पर फेंक दिया जाता है.

Written By Harsh Singh
Published: Nov 08, 2026, 02:44 PM IST | Updated: Nov 08, 2026, 02:57 PM IST
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दीवाली का नाम आते ही हमारे मन में दीयों की चमक, पटाखों की आवाज और मिठाइयों की मिठास आ जाती है.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बड़े त्योहार की रात गांवों में कुछ ऐसी गुप्त रस्म भी होती हैं, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं.

उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में दीवाली की शाम एक बहुत दिलचस्प परंपरा निभाई जाती है, जिसे लोग प्यार से अलाई-बलाई या अलाया बलैया उतारना कहते हैं.

ये कोई पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अपनों को बुरी नजर से बचाने का एक देसी तरीका है. आज इस खबर में हम इस बारे में डिटेल से जानेंगे.

आखिर क्या होती है ये अलाई-बलाई की रस्म?

सीधे शब्दों में कहें तो ये बच्चों की नजर उतारने का एक पुराना तरीका है. हमारे घरों में बुजुर्ग दादी-नानी हमेशा से मानती आई हैं कि त्योहारों के समय नेगेटिव ताकतें जाग जाती है.

इसलिए घर के छोटे बच्चों को किसी की बुरी नजर न लगे और वे हमेशा स्वस्थ रहें, इसके लिए दीवाली की रात ये रस्म की जाती है.

गांव की महिलाएं आज भी इस परंपरा को पूरे भरोसे के साथ निभाती हैं ताकि परिवार पर कोई आंच न आए.

कैसे की जाती है ये पूरी प्रक्रिया?

इस रस्म को निभाने के तरीके हर घर में थोड़े अलग हो सकते हैं. पुराने जमाने में लोग सूखी घास या पतली लकड़ियों को बांधकर एक छोटी सी जलती मशाल जैसी बनाते थे, जिसे अलाई-बलाई कहा जाता था.

समय के साथ-साथ कुछ तरीके भी थोड़े बदल गए. आज के समय में कई घरों में पानी का लोटा भरकर बच्चों के सिर से सात बार वार लिया जाता है.

वहीं कुछ जगहों पर पुरानी झाड़ू या चप्पलों को भी सिर से घुमाकर घर से बाहर फेंक दिया जाता है.

भगवान कृष्ण के बचपन से जुड़ा है इसका नाता

भले ही ये आज एक लोक परंपरा बन गई हो, लेकिन इसका इतिहास काफी पुराना है.

हमारे धार्मिक ग्रंथों, खासकर श्रीमद्भागवत महापुराण में भी बच्चों की रक्षा और नजरदोष हटाने के कई तरीके मिलते हैं.

जरा सोचिए, द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण छोटे थे और उन पर तरह-तरह के संकट आए थे, तब माता यशोदा ने भी उनकी नजर उतारने के लिए ऐसे ही उपाय किए थे.

दीवाली की अमावस्या की रात बहुत गहरी और शांत होती है, इसलिए इस काम के लिए इसे सबसे सही समय माना गया है.

रस्म के दौरान क्या कहती हैं घर की बुजुर्ग महिलाएं?

जब घर की दादी या मां बच्चों की नजर उतारती हैं, तो वे बड़े प्यार से भगवान से दुआ मांगती हैं.

कई जगहों पर ऐसा बोलते हैं कि घर की सारी बलाएं दूर हों और सुख-शांति का वास हो.

कुछ घरों में ये काम बिल्कुल चुपचाप और बिना किसी शोरगुल के किया जाता है ताकि इसका असर पूरा हो सके.

ये पूरी तरह से परिवार के पुराने रीति-रिवाजों पर निर्भर करता है कि वे इसे कैसे करते हैं.

घर से बाहर क्यों फेंक दी जाती है ये सारी चीजें?

नजर उतारने के बाद जो भी चीज इस्तेमाल की जाती है, उसे कभी भी घर के अंदर या छत पर नहीं रखा जाता.

रस्म पूरी होते ही उसे तुरंत घर की चारदीवारी से बाहर ले जाना पड़ता है. लोग इसे ले जाकर गांव के किसी चौराहे पर या सुनसान रास्ते पर छोड़ आते हैं.

नियम ये है कि इसे रखकर पीछे मुड़कर बिल्कुल नहीं देखना चाहिए.

लोगों का मानना है कि ऐसा करने से घर की सारी बदकिस्मती और बुरी बलाएं बाहर ही छूट जाती हैं और घर में केवल पॉजिटिव एनर्जी बचती है.

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(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारियां पारंपरिक लोक मान्यताओं, सांस्कृतिक परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति पर आधारित हैं. इसका उद्देश्य केवल पाठकों को हमारी प्राचीन लोक-संस्कृति और रीति-रिवाजों से अवगत कराना है. किसी भी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना हमारा उद्देश्य नहीं है. पाठक अपनी आस्था और विवेक के अनुसार ही इन परंपराओं को समझें.

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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