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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इस सीजन प्रदेश में पराली जलाने से जुड़ी आग की घटनाओं का आंकड़ा 89 तक पहुंच गया है. शुक्रवार को नौ नए मामले सामने आए.
पराली जलाने की निगरानी में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई
पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है. ड्यूटी में कोताही के आरोप में 45 नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं.
32 किसानों पर कुल 1.95 लाख रुपये का जुर्माना
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार अब तक 77 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है. इनमें 41 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है. कार्रवाई के तहत 32 किसानों पर कुल 1.95 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 1.40 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है.
24 किसानों के खिलाफ FIR दर्ज
वहीं पराली जलाने के मामलों में अब तक 24 किसानों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है, जबकि 11 किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है. नए मामलों में कैथल सबसे आगे रहा, जहां गुहला और राजौंद क्षेत्र में चार घटनाएं सामने आईं. इसके अलावा फतेहाबाद के जाखल, करनाल के निसिंग, कुरुक्षेत्र के पिहोवा, सिरसा और यमुनानगर के जगाधरी में एक-एक मामला सामने आया.
अधिकारियों पर भी कार्रवाई
अधिकारियों पर हुई कार्रवाई में कुरुक्षेत्र के 15 और कैथल के आठ नोडल अधिकारी शामिल हैं. अंबाला, हांसी और जींद के चार-चार अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है. वहीं हिसार, करनाल, रोहतक और यमुनानगर के दो-दो अधिकारियों से जवाब मांगा गया है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने की रोकथाम में किसानों के साथ-साथ निगरानी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी.
पराली जलाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा
इस पूरे मामले ने प्रदेश में पराली प्रबंधन और सरकारी निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ सरकार किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक कर रही है, वहीं दूसरी तरफ लगातार सामने आ रहे मामले अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं. पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ाने के साथ आसपास के इलाकों में लोगों की परेशानी भी बढ़ाता है. ऐसे में प्रशासन के सामने खेतों में आग की घटनाओं पर समय रहते रोक लगाने और किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की चुनौती है.
(विजय राणा की रिपोर्ट)