)
Sarpanch Prema Devi : कहते हैं कि अगर एक महिला घर को संवार सकती है तो गांव की तस्वीर भी बदल सकती है. इस कहावत को चितलवाना की महिला सरपंच प्रेमा देवी जगदीश बिश्नोई ने अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों के जरिए सच कर दिखाने का प्रयास किया है. पंचायत में विकास, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, खेल और जनसुविधाओं से जुड़े कई काम करवाए गए. खास बात यह रही कि इन कार्यों के लिए सरकारी बजट के साथ भामाशाहों और समाज के लोगों के सहयोग का भी इस्तेमाल किया गया. चितलवाना में हुए इन कामों को अब दूसरे पंचायतों के जनप्रतिनिधियों द्वारा भी अपने यहां अपनाने की कोशिश किए जाने का दावा किया जा रहा है.
भामाशाहों के सहयोग से सवा करोड़ की लागत से सुविधाओं का निर्माण
चितलवाना में विकास कार्यों को गति देने के लिए सरपंच प्रेमा देवी ने भामाशाहों और समाज के लोगों को भी साथ जोड़ा. इसी क्रम में सादुलाणी गोदारा परिवार के ठाकराराम अमराराम बिश्नोई को प्रेरित कर करीब सवा करोड़ रुपए की लागत से कई सुविधाओं का निर्माण करवाया गया. इनमें दादोसा राव रिड़मलसिंहजी बस स्टैंड, विश्रामगृह, पानी की प्याऊ, मां अमृता देवी लाइब्रेरी, सुलभ शौचालय, सेल्फी पॉइंट और सर्किल शामिल हैं. इन निर्माण कार्यों के जरिए ग्रामीणों और गांव में आने वाले लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की कोशिश की गई.
कचरा संग्रहण के लिए पंचायत को मिली ट्रैक्टर-ट्रॉली
स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी पंचायत स्तर पर पहल की गई. सरपंच प्रेमा देवी के ससुर ठाकराराम गोदारा ने सरपंच बनने के बाद ग्राम पंचायत को एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भेंट की. इसका इस्तेमाल बाजार में रोजाना कचरा संग्रहण के लिए किया जा रहा है. इससे बाजार क्षेत्र में कचरे के नियमित संग्रहण की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया.
बेटियों की शादी पर कन्यादान के रूप में तिजोरी
महिला सशक्तिकरण और बेटियों से जुड़ी पहल के तहत पंचायत क्षेत्र में किसी बालिका की शादी होने पर सरपंच प्रेमा देवी की ओर से कन्यादान के रूप में तिजोरी यानी अलमारी भेंट की जा रही है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक करीब 450 तिजोरियां दी जा चुकी हैं. इस पहल को बेटियों के परिवारों के लिए सहयोग के तौर पर देखा जा रहा है.
खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए स्टेडियम और मैदान
चितलवाना में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी कई निर्माण कार्य करवाए गए. यहां खेल स्टेडियम, दर्शक दीर्घा, बड़ा मंच, कबड्डी इंडोर स्टेडियम और बास्केटबॉल मैदान का निर्माण करवाया गया है. इन सुविधाओं का उद्देश्य गांव के खिलाड़ियों को खेल के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराना है. वहीं गांव और ढाणियों को आपस में जोड़ने के लिए सड़कों का निर्माण भी करवाया गया.
किसानों की सुविधा के लिए नहरों की सफाई
किसानों से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी पंचायत स्तर पर काम किए गए. रबी सीजन में किसानों को समय पर सिंचाई का पानी मिल सके, इसके लिए चितलवाना क्षेत्र की नहरों की साफ-सफाई करवाई गई. पंचायत क्षेत्र की सभी नहरों की सफाई का काम करवाने का दावा किया गया है, ताकि सिंचाई व्यवस्था में किसी तरह की परेशानी कम हो सके.
करीब एक हजार ग्रामीणों को पट्टे वितरित
ग्रामीण आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के प्लॉट के पट्टे नहीं होने की समस्या भी लंबे समय से बताई गई. सरपंच ने ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए करीब एक हजार पट्टे वितरित करवाए. इसे चितलवाना में अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड बताया गया है. पट्टे मिलने से उन ग्रामीणों को राहत मिलने की बात कही गई है, जिनके पास अपने प्लॉट से जुड़े दस्तावेजी पट्टे नहीं थे.
25 बड़े कचरा पात्र रखवाए
स्वच्छता के मोर्चे पर भी चितलवाना में कई कदम उठाए गए. भामाशाहों के सहयोग से करीब छह लाख रुपए की लागत से 25 बड़े कचरा पात्र बाजार में रखवाए गए. इसके अलावा बंद पड़े रास्तों को जेसीबी की मदद से साफ करवाया गया. रास्तों में उगी बबूल की झाड़ियों को हटाकर उन्हें दुरुस्त करवाया गया. गंदे पानी की निकासी के लिए लीच पिट और चौखटी गड्ढों का निर्माण करवाया गया. लगातार चलाए गए स्वच्छता अभियानों के बाद ग्राम पंचायत चितलवाना को ओडीएफ प्लस घोषित किए जाने की जानकारी दी गई है. पंचायत में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर किए गए इन प्रयासों को गांव में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है.
कोरोना काल में महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण
कोरोना काल में जब रोजगार और आमदनी को लेकर संकट बढ़ा था, उस दौरान महिलाओं के लिए निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया. महज आठ महीने में 800 से ज्यादा महिलाओं और किशोरियों को सिलाई का प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी है. प्रशिक्षण लेने वाली कई महिलाओं ने घर से ही सिलाई का काम शुरू किया और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया.
सरकारी स्कूल को भी मिले कक्षा-कक्ष
पंचायत में जनसुविधाओं के साथ शिक्षा से जुड़ी जरूरतों पर भी काम किया गया. सरकारी विद्यालय में कक्षा-कक्ष बनाकर दिए गए, जिससे विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध हो सके. पंचायत में हुए विकास कार्यों में शिक्षा, स्वच्छता, सड़क, खेल और जनसुविधाओं को अलग-अलग स्तर पर शामिल किया गया.
जनभागीदारी से विकास की कोशिश
चितलवाना में हुए कार्यों की खास बात सरकारी बजट के साथ निजी स्तर और भामाशाहों के सहयोग को जोड़ना रही. बस स्टैंड, विश्रामगृह, लाइब्रेरी, प्याऊ, शौचालय और अन्य सुविधाओं से लेकर स्वच्छता, खेल और महिला प्रशिक्षण तक कई कामों में समाज की भागीदारी का इस्तेमाल किया गया. इन प्रयासों के जरिए पंचायत में उपलब्ध सुविधाओं को बढ़ाने की कोशिश की गई. चितलवाना में विकास की यह तस्वीर बताती है कि पंचायत स्तर पर सरकारी संसाधनों के साथ जनभागीदारी और भामाशाहों के सहयोग से अलग-अलग क्षेत्रों में काम किए जा सकते हैं. महिला सरपंच प्रेमा देवी के कार्यकाल में करवाए गए इन कार्यों को अब चितलवाना की पहचान के तौर पर पेश किया जा रहा है. साथ ही, दूसरे पंचायतों के जनप्रतिनिधियों द्वारा भी इन कामों और मॉडल को अपनी पंचायतों में अपनाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है.