'अहम और वहम की राजनीति छोड़ो': विश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस नेतृत्व पर फिर हमला, बोले- राजस्थान में पार्टी राम भरोसे
Bharatpur News: पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राजस्थान कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पार्टी को राम भरोसे बताते हुए जनाधार खत्म होने की चेतावनी दी और अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ने की बात कही.
Bharatpur News: राजस्थान कांग्रेस में संगठनात्मक नेतृत्व और आपसी खींचतान को लेकर पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने एक बार फिर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है. विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पार्टी ने 60 साल तक देश पर राज किया, आज राजस्थान में उसका कोई धनी-धोरी नहीं है और पार्टी राम भरोसे हो गई है. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के कर्ताधर्ताओं को अहम और वहम की राजनीति से बाहर निकलने की नसीहत देते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी का रहा-सहा जनाधार भी खत्म हो जाएगा.
विश्वेंद्र सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पार्टी के नेता जिस डाल पर बैठते हैं, उसी को काटते हैं. उन्होंने कहा कि स्वाभिमानी व्यक्तियों का अब कांग्रेस में दम घुट रहा है. उनके मुताबिक, पार्टी में वरिष्ठता का कोई मान-सम्मान नहीं रह गया है और युवाओं के लिए मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं है. उन्होंने नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए भी ठोस सोच की कमी का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस आलाकमान से इस पर ध्यान देने की अपील की.
'अहम और वहम की राजनीति से बाहर निकलना होगा'
विश्वेंद्र सिंह की पोस्ट को राजस्थान कांग्रेस के मौजूदा संगठनात्मक हालात और नेतृत्व की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है. उन्होंने पार्टी नेतृत्व को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए कहा कि अगर समय रहते स्थिति नहीं सुधारी गई तो कांग्रेस को और नुकसान उठाना पड़ सकता है.
'अपने स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया'
अपनी राजनीतिक यात्रा और कार्यशैली का जिक्र करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि विधायक, सांसद और मंत्री सहित सार्वजनिक जीवन में उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने पूरी ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ निभाया. उन्होंने दावा किया कि वह झूठ, फरेब और बेईमानी से दूर रहकर धर्म और स्वच्छ राजनीति के रास्ते पर चले हैं.
उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा सही का साथ दिया और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता की आवाज को सर्वोपरि माना. विश्वेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने पुरखों की मान-मर्यादा का ध्यान रखते हुए फैसले लिए और नेकी, सेवाभाव, सहजता तथा सरलता की विरासत को आगे बढ़ाया.
विश्वेंद्र सिंह ने साफ किया कि चापलूसी करना उनके स्वभाव में नहीं है और वह अपने उसूलों तथा आदर्शों पर कायम रहे हैं. उन्होंने कहा कि वफादारी की कीमत भी कई बार चुकानी पड़ी, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया.
'कार्यकर्ताओं के लिए मेरे घर के दरवाजे हमेशा खुले'
विश्वेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं के साथ अपने जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि वह पहले भी कार्यकर्ताओं के बीच रहे हैं और आगे भी रहेंगे. उन्होंने लिखा कि उनके दिल और घर के दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए 24 घंटे खुले थे, हैं और रहेंगे.
उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन को बेदाग बताते हुए कहा कि उनके चाल, चरित्र और चेहरे में कभी फर्क नहीं रहा और न ही आगे रहेगा. उन्होंने अपने जीवन को खुली किताब बताते हुए छल-कपट से हमेशा दूर रहने की बात कही.
राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ा
पोस्ट के अंत में विश्वेंद्र सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही. उन्होंने लिखा कि जीवन के इस आखिरी पड़ाव पर उन्हें किसी से कोई अपेक्षा नहीं है. उन्होंने अपना जीवन जनता की सेवा में बिताने की बात दोहराते हुए कहा कि अंतिम सांस तक जनता के काम करते रहेंगे.
विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें जनता से केवल प्यार और मोहब्बत चाहिए. उन्होंने अपने इष्ट श्री गिरिराज महाराज के प्रति आभार जताते हुए प्रार्थना की कि उन्हें हमेशा सत्य की राह पर चलने और अपनों के साथ रहने का आशीर्वाद मिलता रहे.
अपनी पोस्ट के सबसे अहम हिस्से में उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला भी वह देवतुल्य जनता जनार्दन पर छोड़ रहे हैं और जनता का जो भी आदेश होगा, उसे शिरोधार्य करेंगे.
विश्वेंद्र सिंह की इस पोस्ट में कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे सवालों के साथ उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी संकेत दिखाई देते हैं. हालांकि, उन्होंने पोस्ट में अपने अगले राजनीतिक कदम या किसी दूसरे दल में जाने को लेकर कोई साफ घोषणा नहीं की है.