SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

उदयपुर जिला प्रमुख की कुर्सी का सियासी खेल: कभी अविश्वास प्रस्ताव, कभी बहुमत के बाद भी पलट गई बाजी, जानें पूरा इतिहास

Rajasthan News: उदयपुर में पंचातय चुनाव को लेकर एक बार फिर चुनावी बिसात बीच चूकी है. चुनावी मैदान में जीत दर्ज करने के लिए राजनैतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है. उदयपुर जिला परिषद में कभी अविश्वसास प्रस्ताव से प्रमुख के हटाया गया तो कभी बहुमत मिलने के बाद भी पार्टी अपने पसंद के नेता को जिला प्रमुख की कुर्सी पर नही बिठा पाई.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Oct 15, 2026, 03:52 PM IST | Updated: Oct 15, 2026, 03:57 PM IST
Image Credit: Udaipur News (AI IMAGE)
Join

Udaipur News: आदिवासी बाहुल्य उदयपुर जिले में पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर राजनिति गरमाने लगी है. जिला परिषद के चुनाव में लगातार दो बार हार का सामना करने वाली कांग्रेस पार्टी अपने पारम्परिक आदिवासीऔर ग्रामीण वोटर को एक बार फिर से अपने पक्ष में करने में जुटी हुई है. तो वही भाजपा चुनावी मैदान में जीत के हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुट गई है.ऐसे में जिले की 20 पंचायत समितियों के साथ दोनों ही राजनैतिक दल के नेताओ नजर जिला परिषद पर भी अपना कब्जा जमाने पर है. 1995 अब तक हुए छः चुनावो की बात करे तो 3 चुनाव कांग्रेस और तीन चुनाव भाजपा ने जीते है. हालाकि इस दौरान एक बार कांग्रेस पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव ला कर भाजपा से जिला प्रमुख की सीट छीन ली, तो वही एक बार चुनाव में बढ़त बनाने के बाद भी कांग्रेस नेता अपने पसंद के नेता को प्रमुख की सीट पर नही बिठा सके.

कब किस पार्टी के नाम रहा जिला प्रमुख का पद

1995 से 2026 तक का सफर
1995 में पहली बार जिला परिषद सदस्य के चुनाव हुए. जिसमे भाजपा के खाते में 22 आई और कांग्रेस के खाते से 23 सीट आई. एक सीट की बढ़त मिलने के बाद भी कांग्रेस पार्टी अपना जिला प्रमुख नही बना पाई. भाजपा ने कांग्रेसी खेमे में सेंध मारी करते हुए वंदना मीणा को जिला प्रमुख की सीट पर बिठा दिया. हालाकि सुबे में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रस पार्टी वर्ष 1999 में अविष्वास प्रस्ताव लाई. जिसे पास करा भाजपा से जिला प्रमुख का पद छीन सज्जन कटारा को जिला प्रमुख की सीट पर बिठा दिया. वर्ष 2000 में हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने जिला परिषद पर अपना कब्जा बरकार रखा. लेकिन वर्ष 2005 में महज 16 सीट जीतने वाली भाजपा ने एक बार फिर कांग्रेस को पटखनी दे दी. चुनावी जीत दर्ज करने के बाद कांग्रेस पार्टी कचरूलाल चौधरी को जिला प्रमुख का प्रत्याशी बनाया, लेकिन कांग्रेस के कैवलचंद लबाना ने निर्दलीय जिला प्रमुख का चुनाव लड़ा. जिन्हें भाजपा के 16 सदस्यों के साथ अपनी ही पार्टी के सात सदस्यों के भी वोट प्राप्त हुए और लबाना जिला प्रमुख की कुर्सी पर बैठ गए. 2010 और 2015 में हुए चुनाव में एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस का बोर्ड बना. लेकिन 2020 के चुनवा में भाजपा के अंदर जिला प्रमुख पद को लेकर बिखराव देखने को मिला. कहा जाता है के मेवाड़ में भाजपा के कद्दावर नेता रहे गुलाबचंद कटारिया की मंशा के विपरीत उन्ही के प्रमुख सिपेहसालार प्रमोद सामर ने अपने करीबी और देहात जिलाध्यक्ष के पुत्री ममता कुंवर पंवार को कुर्सी पर बिठा दिया. इस घटना क्रम के बाद कटारिया और सामर के बीच बनी दूरियां अभी भी बरकरार है.

Reporter - Avinash Jagnawat

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES