मंत्री खर्रा का परिवार : एक ही घर में मां-बेटे को BJP का टिकट, तो बड़े बेटे और चाची ने ठोकी अलग निर्दलीय ताल
राजस्थान के सीकर के श्रीमाधोपुर में इस बार के पंचायती राज चुनाव में ऐसा कुछ हुआ जिसने पूरे राजस्थान का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. आमतौर पर चुनावों में दो अलग-अलग विचारधाराओं या पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है, लेकिन झाझड़ और श्रीमाधोपुर के चुनावी मैदान में इस बार मुकाबला 'पार्टी बनाम पार्टी' नहीं है बल्कि 'परिवार बनाम परिवार' है.
राजस्थान के राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा के घर में राजनीति का ऐसा पेचीदा गणित बैठा है, कि इलाके के बड़े-बड़े सियासी पंडित भी हैरान हैं. एक ही छत के नीचे भारतीय जनता पार्टी का सिंबल भी है और निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्भीक तेवर भी. टिकट बंटवारे के बाद शुरू हुआ, ये पारिवारिक घमासान अब चौपालों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का सबसे हॉट टॉपिक बन चुका है.
छोटे बेटे और पत्नी पर बीजेपी का भरोसा
मंत्री जी के बड़े बेटे दुर्गा सिंह खर्रा ने श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड नंबर 19 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया और चुनाव मैदान में ताल ठोक दी. वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने मंत्री जी के परिवार के दो अन्य सदस्यों पर पूरा भरोसा जताया. पार्टी ने मंत्री झाबर सिंह खर्रा के छोटे बेटे अजय सिंह खर्रा को वार्ड नंबर 20 से अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है. इतना ही नहीं, पार्टी ने मंत्री जी की पत्नी शांति देवी को भी वार्ड नंबर 17 से बीजेपी का टिकट देकर चुनावी समर में उतारा है. यानी एक ही घर में मां और छोटा बेटा बीजेपी के कमल निशान पर वोट मांग रहे हैं, तो वहीं बड़ा बेटा बिना किसी पार्टी के झंडे के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जनता के बीच पहुंच रहा है.
चाची भी निर्दलीय मैदान में
मंत्री झाबर सिंह खर्रा के छोटे भाई की पत्नी प्रतिभा सिंह ने भी चुनावी बिसात पर अपनी चाल चल दी है. प्रतिभा सिंह ने जिला परिषद के वार्ड नंबर 23 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान संभाल लिया है. यानी परिवार के भीतर सिर्फ बेटों का ही मतभेद नहीं है, बल्कि रिश्तेदारी के दूसरे मोर्चों पर भी निर्दलीय झंडा बुलंद हो चुका है. अब हालत ये है कि परिवार का एक सिरा बीजेपी के साथ खड़ा दिखता है, तो दूसरा सिरा निर्दलीय.
मंत्री जी किसका करेंगे प्रचार ?
श्रीमाधोपुर की चाय की दुकानों और गांव की चौपालों पर अब सिर्फ एक ही सवाल है कि आखिर मंत्री जी चुनाव प्रचार में किसके साथ खड़े नजर आएंगे ? एक राज्यमंत्री के तौर पर उन पर पार्टी धर्म निभाने की जिम्मेदारी है, जिसके तहत उन्हें बीजेपी प्रत्याशियों यानी अपनी पत्नी शांति देवी और छोटे बेटे अजय सिंह खर्रा के लिए वोट मांगने जाना ही होगा. लेकिन जब बात बड़े बेटे दुर्गा सिंह खर्रा और छोटे भाई की पत्नी प्रतिभा सिंह की आएगी, तो वे क्या करेंगे ?
स्थानीय वोटर्स के बीच इस अनोखे पारिवारिक चुनाव को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कई चुनाव देखे हैं, जहां भाई-भाई के खिलाफ लड़ा हो या रिश्तेदार आमने-सामने हों, लेकिन एक ही परिवार से मंत्री की पत्नी और छोटा बेटा बीजेपी से हों, और बड़ा बेटा - चाची निर्दलीय मैदान में हों, ऐसा अनोखा सियासी समीकरण पहली बार देखने को मिल रहा है.
अब देखना दिलचस्प होगा कि वोटों की गिनती वाले दिन, जनता किसके सिर पर जीत का सेहरा सजाती है. क्या बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे मां और बेटे बाजी मारेंगे, या फिर बड़े बेटे और चाची कोई बड़ा उलटफेर करेंगे ? फिलहाल तो, खर्रा परिवार पंचायत चुनाव में चर्चा का विषय बना है.