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उज्जैन तक जाता है रहस्य का सिरा ?
सेवना के गढ़ी में महाकाल मंदिर है. यहां के लोग बताते हैं कि मंदिर में से होकर दो गुफाएं निकलती थीं. सेवना के आसपास पुराने मंदिरों और भूमिगत संरचनाओं के कई ऐसे अवशेष मौजूद हैं, ये ही नहीं सेवना में एक और महाकाल का मंदिर करीब आठ फीट नीचे बताया जाता है. जिसका निर्माण विशाल पाषाणखंडों काट कर किया गया.

भूमिगत महाकाल मंदिर और गायब 'श्वेत शिवलिंग'
सेवना के चौबीस खम्भ मंदिर है. मंदिर के गर्भगृह में जलाधारी मौजूद है,लेकिन शिवलिंग गायब है. ग्रामीणों बताते हैं कि,यहां करीब पौने दो फीट का श्वेत शिवलिंग स्थापित था,जो लगभग 50 साल पहले चोरी हो गया. मंदिर की छतों पर की गई नक्काशी और कलाकृतियां बेहद खूबसूरत हैं. गांव के आसपास खंडहर हो चुके दो मंदिरों और हरसिद्धि माता मंदिर की छतों पर भी कलात्मक आकृतियां दिखाई देती हैं.इसलिए इसकी तुलना स्थानीय स्तर पर अजंता-एलोरा की गुफाओं की कलाकृतियों से की जाती है.

खेतों से निकलती मूर्तियाँ - 4 वर्ग किमी में फैला साम्राज्य
सेवना के गढ़ी क्षेत्र को इस प्राचीन नगरी का प्रमुख केंद्र माना जाता है. इसके आसपास करीब चार वर्ग किलोमीटर के दायरे में खेतों,पुराने मकानों की नींव और कुओं की खुदाई के दौरान प्रतिमाएं और नक्काशीदार पत्थर निकलने की जानकारी मिलती है. खेतों की मेड़ों पर रखे कई पाषाणखंडों पर भी कलाकृतियां उकेरी हुई दिखाई देती हैं. इन अवशेषों के आधार पर माना जाता है कि वर्तमान सेवना कभी एक विस्तृत बस्ती रही होगी. सेवना के इतिहास में जैन धर्म से जुड़ी उपस्थिति के संकेत भी मिलते हैं. करीब 10 साल पहले खुदाई के दौरान महावीर स्वामी की दो प्रतिमाएं मिली. इन्हें पहले सालमगढ़ के जैन मंदिर में रखवाया गया था और बाद में जैन मुनि गुजरात ले गए,जहां मंदिर बनवाया गया. जिससे शैव परंपरा के साथ जैन समुदाय की भी उपस्थिति के प्रमाण मिलते हैं.सेवना की विरासत के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके अवशेषों का संरक्षण है गांव के बाहर गंगाकुंड के पास मौजूद शिव मंदिर अब पेड़ों के झुंड में छिप गया है.पीपल के विशाल तने में मंदिर के द्वार जैसा हिस्सा नजर आता है. महाकाल मंदिर के बाहर पेड़ों के नीचे रखी प्रतिमाओं के आसपास भी जड़ें और तने फैलते जा रहे हैं.

राजस्थान और MP को जोड़ने वाली शिवना का उद्गम
सेवना की पहचान केवल मंदिरों और गुफाओं की चर्चा तक सीमित नहीं है.राजस्थान और मध्यप्रदेश की प्रमुख नदी शिवना का उद्गम स्थल भी सेवना बताया जाता है.गांव के उत्तर और दक्षिण दिशा से आने वाले दो बरसाती नाले यहां मिलते हैं और आगे नदी का रूप लेते हैं.इसके बाद शिवना सेवना,बरखेड़ी,कोटड़ी,जाजली और कुलथाना के पास से गुजरते हुए मध्यप्रदेश के मंदसौर की ओर जाती है.सेवना की कहानी में महाकाल मंदिर,दो सुरंग जैसी गुफाएं,भूमिगत मंदिर,चौबीस खम्भ मंदिर की नक्काशी और खेतों में बिखरे पाषाणखंड अलग-अलग कड़ियों की तरह हैं. इन्हें एक साथ जोड़ने वाला प्रमाणिक इतिहास अभी सामने आना बाकी है. उज्जैन की महाकाल नगरी से जुड़ी सांस्कृतिक समानताओं और मालवा से संबंधित स्थानीय मान्यताओं के बीच सेवना एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जिज्ञासा के रूप में उभरता है. अब जरूरत इस बात की है कि ये मंदिरों,गुफाओं और प्राचीन अवशेषों का व्यवस्थित अध्ययन हो,ताकि ये पता लगाया जा सके कि शिवपुरी का वास्तविक स्वरूप क्या था और उसका इतिहास किन परंपराओं से जुड़ा रहा.
"तस्वीरों से साफ़ है कि ये अवशेष 10वीं-11वीं शताब्दी के हो सकते हैं. उज्जैन तक गुफा जाने का दावा जांच का विषय है,लेकिन ऐतिहासिक दृष्टिकोण से ये स्थल बेहद महत्वपूर्ण है. विभाग जल्द ही एक विशेषज्ञ कमेटी गठित कर मौके पर सर्वे के लिए भेजेगा"
पंकज, डायरेक्टर, पुरातत्व विभाग, जयपुर