12 वोटर, 1 गांव और पूरी पोलिंग पार्टी: नागौर के 'सारगांवास' की अनोखी कहानी
नागौर के राजस्व गांव सारगांवास में कभी करीब 60 मतदाता थे, लेकिन अब सिर्फ 12 रह गए हैं. पंचायती राज चुनाव में इनके मतदान के लिए अलग बूथ बनाया गया है. गांव की प्रशासनिक पहचान और सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं.
राजस्थान के नागौर जिले में एक ऐसा राजस्व गांव है, जहां मतदाताओं की संख्या घटकर महज 12 रह गई है. इसके बावजूद पंचायती राज चुनाव में इन सभी मतदाताओं से वोट डलवाने के लिए निर्वाचन विभाग ने अलग पोलिंग बूथ और पूरी पोलिंग पार्टी की व्यवस्था की है. कभी इस गांव में करीब 60 मतदाता हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है. सरकारी रिकॉर्ड में गांव का अस्तित्व कायम है, मगर जमीन पर इसकी पहचान अब एक गली तक सिमटकर रह गई है.
12 मतदाताओं के लिए अलग पोलिंग बूथ
नागौर जिले के राजस्व ग्राम सारगांवास में पंचायती राज चुनाव के दौरान मतदान की व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है. गांव के 12 मतदाताओं के लिए ग्राम पंचायत सेसड़ा मुख्यालय पर अलग पोलिंग बूथ बनाया गया है. इन मतदाताओं से मतदान करवाने के लिए पूरी पोलिंग पार्टी तैनात रहेगी. यानी मतदाताओं की संख्या भले ही कम हो, लेकिन चुनाव संपन्न करवाने के लिए जरूरी व्यवस्था की गई है.
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कभी 60 मतदाता थे, अब रह गए सिर्फ 12
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, सारगांवास में पहले करीब 60 मतदाता थे. अब इनकी संख्या घटकर केवल 12 रह गई है. ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर सुविधाएं मिलने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली परेशानियों के कारण कई मतदाताओं ने अपने नाम सेसड़ा ग्राम पंचायत में जुड़वा लिए. गांव की पहचान से जुड़ी स्थिति भी ऐसी है कि यहां कोई पहचान बोर्ड तक नहीं लगा है. वहीं, गूगल मैप पर भी गांव को आसानी से पहचान पाना मुश्किल है.
दो विधानसभा क्षेत्रों के बीच बसी आबादी
सारगांवास की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति भी ग्रामीणों के लिए उलझन का कारण बनी हुई है. राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह गांव ग्राम पंचायत सेसड़ा के अंतर्गत आता है, जो मेड़ता विधानसभा क्षेत्र में स्थित है. दूसरी ओर, सारगांवास की आबादी सथाना कलां गांव के बीच बसी हुई है, जो डेगाना विधानसभा क्षेत्र में आता है.
ग्रामीणों के अनुसार, इस स्थिति के चलते स्थानीय समस्याओं को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने में समन्वय से जुड़े सवाल सामने आते हैं. पंचायत समिति और जिला परिषद की सीमाओं को लेकर भी स्पष्टता की जरूरत बताई जा रही है. हालांकि, इन प्रशासनिक सीमाओं और संबंधित रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है.
गांव की पहचान और सुविधाओं को लेकर उम्मीद
ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन सारगांवास की स्थिति की जांच कर इसकी पहचान साफ करेगा. साथ ही, पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा. सारगांवास का मामला केवल 12 मतदाताओं के लिए मतदान व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक पहचान और विकास से जुड़े सवाल भी सामने लाता है.
Reporter- Damodar Inaniya