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Explainer : क्या राजपूत-मुस्लिम गठजोड़ खत्म करेगा मिर्धा, मदेरणा और बेनीवाल का दबदबा ?

Ravindra Singh Bhati : राजस्थान में खासतौर पर मारवाड़ और नागौर की राजनीति, जातियों के इर्द गिर्द भी घूमती है. ऐसे में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और डीडवाना से निर्दलीय विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री युनूस खान की मुलाकात खास हो जाती है.वो भी तब, जब रविंद्र सिंह भाटी पश्चिमी राजस्थान में युवाओं और सवर्णों के हक के लिए EWS सरलीकरण यात्रा निकाल रहे हैं.

Explainer : क्या राजपूत-मुस्लिम गठजोड़ खत्म करेगा मिर्धा, मदेरणा और बेनीवाल का दबदबा ?
Image Credit: Ravindra Singh Bhati Marwar politics

Explainer : राजस्थान में खासतौर पर मारवाड़ और नागौर की राजनीति, जातियों के इर्द गिर्द भी घूमती है. ऐसे में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और डीडवाना से निर्दलीय विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री युनूस खान की मुलाकात खास हो जाती है.वो भी तब, जब रविंद्र सिंह भाटी पश्चिमी राजस्थान में युवाओं और सवर्णों के हक के लिए EWS सरलीकरण यात्रा निकाल रहे हैं.

मारवाड़ और नागौर की राजनीति में नया मोड़ 
ये मुलाकात, मारवाड़ में दशकों से चले आ रहे, पारंपरिक सत्ता केंद्रों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.अगर इस मुलाकात को राजनीतिक चश्मे से देखा जाए तो, ये नागौर और मारवाड़ की उस राजनीति में भूचाल ला सकती है जो अब तक मिर्धा- मदेरणा परिवारों और हाल के सालों में हनुमान बेनीवाल के इर्द- गिर्द घूमती रही है.

EWS सरलीकरण और सवर्ण लामबंदी
रविंद्र सिंह भाटी का EWS सरलीकरण आंदोलन सीधे तौर पर राजपूतों और अन्य सवर्ण जैसे की ब्राह्णण, वैश्य और चारण जाति के युवाओं को एक मंच पर ला रहा है. इस आंदोलन के जरिए भाटी ने खुद को सवर्ण और राजपूत वर्ग के एक निर्विवाद युवा नेता के रूप दिखाया है. यानी की भाटी का जनाधार अब सिर्फ बाड़मेर-जैसलमेर तक सीमित नहीं हैं.

एक नई सोशल इंजीनियरिंग
यूनुस खान, नागौर की डीडवाना सीट से विधायक और नागौर-डीडवाना बेल्ट पर अच्छी पकड़ रखते हैं. बीजेपी से टिकट कटने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल करना ये साबित करता है कि मुस्लिम समुदाय के साथ साथ अन्य वर्गों में भी उनकी कितनी मजबूत पकड़ है.भाटी और यूनुस खान की मुलाकात राजनीति में नए कास्ट कॉंम्बिनेशन की नींव रख सकता है.अगर भाटी का राजपूत और सवर्म वोट बैंक. यूनुस खान के प्रभाव वाले मुस्लिम वोट बैंक के साथ मिल जाता है,तो ये राजस्थान के चुनावी गणित को पूरी तरह से उलट सकता है. वो बात अलग है कि राजस्थान की राजनीति में राजपूत और मुस्लिम गठजोड़ का विचार दुर्लभ माना जा सकता है.

Ravindra Bhati Yunus Khan meeting

मिर्धा से लेकर मदेरणा तक, जाट राजनीति का दबदबा
इस नए गठजोड़ के प्रभाव को आंकने के लिए मारवाड़ और नागौर के राजतीनिक इतिहास को देखना जरूरी है. आजादी के बाद से ही इस इलाके की राजनीति जाट समुदाय के वर्चस्व के आस पास रही. नागौर को राजस्थान की जाट राजनीति का गढ़ माना जाता है. मिर्धा परिवार (नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा, ज्योति मिर्धा आदि) का सिक्का चलता रहा है. इसी तरह से जोधपुर और मारवाड़ के अन्य हिस्सों में मदेरणा परिवार (परसराम मदेरणा और उनकी विरासत) का भारी दबदबा रहा है.

सत्ता के गलियारों में ये बात मानी जाती है कि मारवाड़ की राजनीति जाट समुदाय की धुरी पर ही घूमती है. जाट समुदाय अपनी राजनीतिक एकजुटता के चलते सत्ता का स्वाभाविक दावेदार भी रहा है. लेकिन अगर 'राजपूत + सवर्ण + मुस्लिम' गठजोड़ आकार लेगा तो ये जाट वोटों के अंकगणित पर भारी पड़ सकता है और मारवाड़ की किसी भी सीट के रिजल्ट को एकतरफा मोड़ तक सकता है.

कांग्रेस और हनुमान बेनीवाल को सबसे बड़ा नुकसान
अगर ये दुर्लभ गठजोड़ बन जाता है तो सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस और हनुमान बेनीवाल को होगा. जिनकी पूरी राजनीति ही जाट समुदाय और मुस्लिम वोटों पर टिकी होती है.मारवाड़ और नागौर में कांग्रेस की राजनीति 'मुस्लिम + जाट + दलित समीकरण पर टिकी रही है. मुस्लिम मतदाता पारंपरिक रूप से कांग्रेस का सबसे 'सेफ'वोट बैंक रहा है. यूनुस खान के रूप में मुस्लिम मतदाताओं को एक मजबूत और स्वतंत्र नेतृत्व मिल रहा है. अगर मुस्लिम वोटर यूनुस खान के प्रभाव में आकर इस नए मोर्चे (भाटी-यूनुस गठजोड़) की तरफ शिफ्ट हो गये तो, कांग्रेस का पूरा सियासी ढांचा गिर जाएगा. कांग्रेस का जाट वोट बैंक पहले ही हनुमान बेनीवाल और बीजेपी के बीच बंट चुका है. ऐसे में अगर मुस्लिम वोटर भी हाथ से निकल गया,तो कांग्रेस 'सियासी हाशिए' जा सकती है.

 

RLP के थर्ड फ्रंट मॉडल  का क्या होगा ?
हनुमान बेनीवाल के लिए ये नया गठजोड़ अस्तित्व का संकट पैदा कर सकता है. बेनीवाल की राजनीति जाट वर्चस्व और ग्रामीण युवाओं (विशेषकर जाट और दलित) पर आधारित रही है. इसके साथ ही,वे मुस्लिम मतदाताओं को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं, ताकि त्रिकोणीय मुकाबलों में जीत हासिल कर सकें.लेकिन अगर राजपूत/सवर्ण वोटर पूरी तरह भाटी के साथ और मुस्लिम वोटर यूनुस खान के प्रभाव में लामबंद हो गए, तो हनुमान बेनीवाल केवल जाट वोटों तक सिमट कर रह जाएंगे और जाट वोटों में भी कांग्रेस और बीजेपी की मजबूत हिस्सेदारी है.

बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध
वैसे तो सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस और RLP को है,लेकिन बीजेपी भी अछूती नहीं है. बीजेपी का मुख्य आधार हमेशा से सवर्ण और विशेषकर राजपूत वोटर रहा है. रविंद्र भाटी की ईडब्ल्यूएस सरलीकरण यात्रा ने बीजेपी के इस 'कोर वोट बैंक' में गहरी सेंध लगा दी है,जिससे बीजेपी का पारंपरिक वोटर खिसक रहा है.

EWS samralikaran yatra Ravindra Bhati

एक नए 'पावर सेंटर' का उदय
राजस्थान की राजनीति इस वक्त एक बड़े 'ट्रांजिशन'के दौर से गुजर रही है. रविंद्र भाटी और यूनुस खान की ये मुलाकात सिर्फ एक तस्वीर नहीं,बल्कि मारवाड़ के जाट वर्चस्व वाले बेल्ट में एक 'शांतिपूर्ण राजनीतिक क्रांति' की आहट है. भाटी का ईडब्ल्यूएस सरलीकरण आंदोलन सवर्णों को एकजुट कर राजनीतिक सौदेबाजी की ताकत को बढ़ा रहा है. इस ताकत को जब यूनुस खान के अनुभव और उनके मुस्लिम जनाधार का साथ मिल जाएगा,तो ये मारवाड़ में एक नए पावर सेंटर के रूप में उभरेगा. अगर ये प्रयोग सफल हुआ,तो न केवल मिर्धा और मदेरणा परिवारों का ऐतिहासिक एकाधिकार टूटेगा,बल्कि कांग्रेस और हनुमान बेनीवाल को भी मारवाड़ में अपना राजनीतिक वजूद बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा. राजस्थान का ये नया 'कास्ट कॉम्बिनेशन' प्रदेश की राजनीति का नया अध्याय लिखने की पूरी क्षमता रखता है.

 

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About the Author

Pragati Pant Awasthi

Pragati Pant Awasthi

मीडिया की दुनिया में 18 साल का सफर... एंकरिंग से लेकर डिजिटल की स्क्रीन तक, हर नया बदलाव दिल से अपनाया, जो सोचती हूं, वही कहती हूं, बातों को घुमाना मेरी आदत नहीं, दिल की बात जुबां पर रखना पहचान है. फिलहाल 'ज़ी राजस्थान डिजिटल' के साथ सफर जारी है और हर दिन कुछ नया सीखने की ललक बरकरार है और रहेगी. Pragati.Pant@india.com ईमेल के जरिए आप संपर्क कर सकते हैं.
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