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Rajasthan News: राजस्थान के टाइगर रिजर्व में तीन महीने के सन्नाटे के बाद अब एक बार फिर जंगल गुलजार होने वाला है. 1 अक्टूबर से राजस्थान के टाइगर रिजर्व में सफारी शुरू होने जा रही है, जिसके साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का इंतजार भी खत्म होगा. मानसून के दौरान करीब 90 दिनों तक जंगल में इंसानी आवाजाही और जिप्सियों की गतिविधियां कम रहने से वन्यजीवों को अपने प्राकृतिक आवास में बिना किसी बाहरी व्यवधान के रहने का मौका मिलता है. यही वजह है कि सफारी शुरू होने के साथ ही पर्यटकों को बेहतर वन्यजीव और टाइगर साइटिंग की उम्मीद रहती है.
इन तीन महीनों को जंगल के लिए एक तरह का प्राकृतिक ब्रेक माना जाता है. सफारी वाहनों की आवाजाही और पर्यटकों के शोर-शराबे से दूर रहने के कारण बाघ समेत दूसरे वन्यजीव अपने प्राकृतिक व्यवहार के साथ जंगल में विचरण करते हैं. मानसून के दौरान जंगल में हरियाली भी बढ़ती है और प्राकृतिक वातावरण में बदलाव देखने को मिलता है. ऐसे में अक्टूबर में सफारी शुरू होने के बाद पर्यटक जंगल और वन्यजीवों को करीब से देखने के लिए पहुंचते हैं.
राजस्थान में टाइगर सफारी की बात हो तो रणथंभौर का नाम सबसे पहले आता है. यहां बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए देशभर से पर्यटक पहुंचते हैं. रणथंभौर में टाइगर साइटिंग का क्रेज इतना ज्यादा है कि अक्टूबर में शुरू होने वाली सफारी की बुकिंग करीब दो महीने पहले यानी 1 अगस्त से ही शुरू हो जाती है. सफारी शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में पर्यटक अपने स्लॉट बुक करा लेते हैं.
1 अक्टूबर से जंगल में फिर जिप्सियों की आवाजाही शुरू होगी और पर्यटक बाघों के साथ-साथ अन्य वन्यजीवों को देखने के लिए सफारी पर निकलेंगे. तीन महीने के ब्रेक के बाद जंगल का बदला हुआ प्राकृतिक रूप भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा. घने जंगल, हरियाली और वन्यजीवों की मौजूदगी सफारी के अनुभव को खास बना सकती है.
हालांकि, जंगल में टाइगर साइटिंग पूरी तरह प्राकृतिक घटना है. किसी सफारी में बाघ दिखेगा ही, इसकी गारंटी नहीं होती. वन्यजीव अपनी गतिविधियां अपने प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार करते हैं. यही अनिश्चितता और रोमांच टाइगर सफारी को खास बनाता है. अब 1 अक्टूबर से राजस्थान के जंगलों में फिर पर्यटकों की चहल-पहल लौटेगी और तीन महीने से शांत जंगल में एक बार फिर सफारी का रोमांच देखने को मिलेगा.