Rajasthan PadhaiWithAI : राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को बेहतर करने और छात्रों को व्यक्तिगत तरीके से सीखने में मदद करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसी के चलते PadhaiWithAI एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के तौर पर काम कर रहा है, जिसका काम छात्रों की सीखने के तरीके को बेहतर बनाने और उसकी कमजोरियों को समझकर उन्हें उनकी जरूरत और गति के अनुसार पढ़ाई में मदद करना है.
AI के जरिए बच्चों को मिलेगी पर्सनलाइज्ड पढ़ाई
PadhaiWithAI प्लेटफॉर्म में AI आधारित 'AI साथी' की सुविधा दी गई है. यह एडाप्टिव लर्निंग तकनीक के जरिए छात्रों की पढ़ाई का आकलन करता है और उनकी कमजोरियों को समझकर अभ्यास और समाधान देता है. यानी एक ही कक्षा में पढ़ने वाले अलग-अलग छात्रों को उनकी जरूरत के अनुसार सीखने की सामग्री मिलती है.
PadhaiWithAI कैसे करें स्टार्ट?
अगर आप PadhaiWithAI को शुरू करके पढ़ाई करना चाहते हैं, तो इसकी वेबसाइट https://padhaiwithai.in/ पर लॉगिन पेज उपलब्ध है. वहां Email/Username और Password से लॉगिन करने का विकल्प है, साथ ही Student Login भी दिया गया है. अगर आपके पास अभी Student Login/Username नहीं है, तो स्कूल या संबंधित शिक्षक/प्रशासन से लॉगिन लेना होगा. PadhaiWithAI का मॉडल 'एक ही पढ़ाई सबके लिए' के बजाय छात्र के स्तर के अनुसार पढ़ाई उपलब्ध करता है.

मैथ्स जैसे सब्जेक्ट पर विशेष फोकस
प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल खास तौर पर मैथ्स जैसे सब्जेक्ट्स में छात्रों की समझ मजबूत करने के लिए किया जा सकता है. AI छात्रों की गलतियों और सीखने के तरीके के बारे में बेहतर ढंग से समझकर उन्हें उसी हिसाब से आगे के टॉपिक समझाता है, जिससे छात्रों को अपने अनुसार चीजें समझने का मौका मिलता है.

टीचर्स का काम भी होगा आसान
AI आधारित सिस्टम से टीचर का काम भी आसान हो जाता है. इससे टीचर वर्कशीट और प्रैक्टिस मैटेरियल्स तैयार करने में तकनीक की मदद मिलने से टीचर छात्रों की व्यक्तिगत समस्याओं, कमजोरियों और काउंसलिंग पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों में हो सकता है फायदा
AI आधारित डिजिटल लर्निंग मॉडल उन सरकारी स्कूलों के लिए भी उपयोगी हो सकता है, जहां टीचर्स की कमी या अन्य चीजों की सुविधा नहीं है. डिजिटल लर्निंग से छात्रों को ज्यादा प्रैक्टिस करने और सीखने की सुविधा उपलब्ध करावा सकते हैं.
टोंक में लागू हुआ मॉडल
PadhaiWithAI की पहल का राजस्थान के टोंक जिले में इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है. यहां जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सरकारी स्कूलों में AI आधारित पढ़ाई के जरिए छात्रों को सीखाने और मैथ्स जैसे सब्जेक्ट के रिजल्ट में सुधार लाने पर काम किया गया. टोंक मॉडल को डिजिटल शिक्षा की पहल के तौर पर पेश किया गया है.वहीं, टोंक के अलावा अब इसे प्रदेश के दौसा जिले में इस्तेमाल किया जा रहा है.
हिमाचल प्रदेश में भी AI आधारित पहल
राजस्थान के साथ हिमाचल प्रदेश में भी सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए AI आधारित शिक्षा की पहल शुरू की गई है. जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर जिले के बार्थिन क्षेत्र में NTPC के सहयोग से 'पढ़ाई विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' पहल पर काम किया गया है. इसका काम सरकारी स्कूलों के बच्चों को नई तकनीक के जरिए अच्छी शिक्षा देना है.
छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर
AI आधारित पढ़ाई का एक अहम काम छात्रों के बीच विषयों को लेकर झिझक और डर कम करना भी है. इंटरैक्टिव तरीके से प्रैक्टिस और तुरंत समाधान मिलने से छात्र अपनी गलतियों को समझकर दोबारा कोशिश कर सकते हैं. इससे सीखने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है.
शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल की तस्वीर
PadhaiWithAI जैसी पहल यह दिखाती है कि सरकारी स्कूलों में तकनीक का इस्तेमाल केवल डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह गया है. AI से छात्रों के सीखने के स्तर को समझकर उन्हें उसी के अनुसार प्रैक्टिस कराने की दिशा में भी काम हो रहा है.