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Rajasthan Transport Department: राजस्थान के परिवहन विभाग के कार्यालयों में भ्रष्टाचार में कमी लाने और पारदर्शिता से कामकाज को बढ़ावा देने की दिशा में रोस्टर करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. करीब 6 वर्ष पहले परिवहन मुख्यालय ने इसके आदेश निकाले थे, लेकिन परिवहन विभाग के कार्यालयों में इन आदेशों की पालना नहीं हो रही है.
साल में 2 बार किया जाएगा सभी निरीक्षकों का रोस्टर
परिवहन विभाग के कार्यालयों में आमजन के लिए कामकाज को सुगम बनाने और पारदर्शिता लाने के लिए रोस्टर व्यवस्था लागू की गई थी. वर्ष 2020 में तत्कालीन परिवहन आयुक्त रवि जैन ने रोस्टर करने का आदेश निकाला था. इसमें कहा गया था कि परिवहन विभाग के कार्यालयों में प्रत्येक कार्मिक को सभी तरह के कार्यों में प्रशिक्षित करने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रोस्टर किया जाए. इसके तहत परिवहन विभाग के सभी निरीक्षकों का रोस्टर साल में 2 बार किया जाएगा.
पिछले 2 साल से नहीं हो रही रोस्टर आदेशों की पालना
निरीक्षकों का रोस्टर 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को होगा, जबकि विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों का रोस्टर साल में एक बार 1 अप्रैल को किया जाएगा. इसमें प्रत्येक कार्मिक की सीट बदलने की व्यवस्था दी गई थी, लेकिन पिछले करीब 2 साल से परिवहन विभाग में रोस्टर आदेशों की पालना नहीं हो रही है.
नियमानुसार अब 1 अक्टूबर को परिवहन विभाग के सभी आरटीओ कार्यालयों में निरीक्षकों का रोस्टर किया जाना चाहिए, लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें, तो ज्यादातर कार्यालयों में गुरुवार को निरीक्षकों के रोस्टर की कोई तैयारी नहीं की गई है. वहीं जयपुर आरटीओ द्वितीय धर्मेन्द्र कुमार ने 1 अक्टूबर से 2 दिन पहले ही 3 निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव कर दिया है. इसमें मुख्यालय के रोस्टर आदेशों का हवाला नहीं दिया गया है.
सालों से एक ही सीट पर जमे कार्मिक
28 सितंबर 2020 को रोस्टर करने के आदेश निकाले गए. 1 अप्रैल 2026 को ज्यादातर RTO कार्यालयों में पालना नहीं हुई. जयपुर RTO प्रथम, जयपुर RTO द्वितीय में रोस्टर आदेश नहीं किए गए. ना ही मंत्रालयिक कर्मचारियों की सीट बदली गई और ना ही परिवहन निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया. जयपुर के बाहर के अन्य RTO अधिकारियों ने भी रोस्टर के नाम पर खानापूर्ति की.
रोस्टर की पालना नहीं होने से कई कार्यालयों में सालों से कार्मिक एक सीट पर जमे हुए हैं. अब जयपुर RTO प्रथम में अगले कुछ दिन में रोस्टर करने की संभावना है. वहीं जयपुर RTO द्वितीय ने 2 दिन पहले ही 3 निरीक्षकों को बदला. निरीक्षक अनिल बसवाल, मुकुन्द राठौड़ और बिजेन्द्र जांगिड़ बदले गए. हालांकि बदलाव के आदेशों में रोस्टर आदेश की पालना का हवाला नहीं है.
RTO-DTO कार्यालयों में आईटी कर्मियों को मंत्रालयिक कार्य
तत्कालीन परिवहन आयुक्त रवि जैन ने आदेशों में यह भी कहा था कि विभाग में कार्यरत लेखा विभाग के कार्मिकों और आईटी विभाग के कार्मिकों को उनके निर्धारित दायित्व के विपरीत कार्य आवंटित नहीं किया जाए, लेकिन परिवहन विभाग के कई आरटीओ और डीटीओ कार्यालयों में इसकी भी अवहेलना हो रही है. दरअसल कई कार्यालयों में आईटी शाखा के सूचना सहायकों और सहायक प्रोग्रामरों को मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए आवंटित कार्य दिए हुए हैं.
इनमें वाहनों के ट्रांसफर, वाहनों के पंजीयन, टैक्स जमा करने से जुड़े कार्य सूचना सहायकों को दिए हुए हैं. इन कार्यों में वित्तीय अनियमितता होने की स्थिति में आईटी शाखा के कार्मिकों को विभाग नियमानुसार दोषी भी नहीं ठहरा सकता है. 7 डिजिट घोटाले में जयपुर आरटीओ प्रथम में दोषी माने गए आईटी शाखा के कार्मिकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी. कुल मिलाकर परिवहन विभाग के कार्यालयों में रोस्टर आदेशों की अवहेलना होने से पारदर्शिता और सुगम कार्यशैली पर सवाल लगातार बने हुए हैं.