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Jodhpur News: राजस्थान में EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण को लेकर चल रहा आंदोलन अब दिल्ली तक पहुंचता दिखाई दे रहा है. शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की ओर से EWS नियमों में बदलाव और सरलीकरण की मांग के बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार से मुलाकात की है. बैठक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े विभिन्न मुद्दों, पात्रता नियमों में सरलीकरण और युवाओं के आर्थिक सशक्तीकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई.
गृह मंत्री के निर्देश पर तीन महीने में तीसरी वार्ता
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी शेयर की. उन्होंने बताया कि डॉ. वीरेंद्र कुमार से EWS से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई है. उनके मुताबिक, गृह मंत्री के निर्देश पर पिछले तीन महीनों में दोनों मंत्रियों के बीच इस मुद्दे को लेकर पहले भी दो बार वार्ता हो चुकी है. यानी मौजूदा बैठक को मिलाकर तीन महीनों में इस विषय पर तीन दौर की बातचीत हो चुकी है.
शेखावत के मुताबिक, बैठक में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उनके आर्थिक सशक्तीकरण, समान अवसर सुनिश्चित करने और EWS आरक्षण की पात्रता से जुड़े नियमों में सरलीकरण सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई.
शेखावत की पोस्ट के बाद भाटी आंदोलन से जोड़ा जा रहा घटनाक्रम
शेखावत ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में रविंद्र सिंह भाटी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया. उन्होंने केवल EWS से जुड़े विषयों पर केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक की जानकारी दी. बता दें कि यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भाटी EWS आरक्षण के नियमों में बदलाव की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान चला रहे हैं. इसी वजह से दोनों घटनाक्रमों को जोड़कर देखा जा रहा है.
भाटी ने EWS व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार और नियमों को सरल बनाने की मांग को लेकर बाड़मेर से जन-संवाद यात्रा शुरू की थी. इस अभियान में प्रमाण-पत्र की वैधता, पात्रता के भूमि संबंधी नियम और केंद्र की सेवाओं में राज्य के प्रमाण-पत्र की मान्यता सहित कई मुद्दे उठाए गए हैं.
EWS नियमों में बदलाव की क्या-क्या मांग?
रविंद्र सिंह भाटी की ओर से EWS आरक्षण से जुड़े कई नियमों में बदलाव की मांग रखी गई है. इनमें कृषि भूमि की 5 एकड़ की सीमा को स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बदलने की मांग प्रमुख है. भाटी का तर्क है कि राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में जमीन की प्रकृति, सिंचाई और स्थानीय परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए केवल भूमि के आकार को आधार बनाकर पात्रता तय करने से कई परिवार प्रभावित हो सकते हैं.
इसके अलावा EWS प्रमाण पत्र की वैधता 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने की मांग भी शामिल है. सरकारी भर्तियों में आयु सीमा और आवेदन शुल्क में छूट देने की मांग रखी गई है. साथ ही राज्य स्तर पर बनाए गए EWS प्रमाण पत्रों को केंद्रीय सेवाओं में भी मान्यता देने की मांग की गई है. भाटी की मांगों में पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में EWS वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा भी शामिल है. इन मांगों को लेकर उन्होंने राजस्थान के स्थानीय हालात के अनुरूप नियम बनाए जाने की बात कही है.
बाड़मेर से जोधपुर तक यात्रा, युवाओं की भागीदारी पर नजर
EWS मुद्दे को लेकर भाटी की यात्रा बाड़मेर से शुरू होकर जोधपुर तक पहुंची. इस दौरान युवाओं की भागीदारी और विभिन्न स्थानों पर हुए कार्यक्रमों ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया. रिपोर्टों के मुताबिक, भाटी इस अभियान के जरिए EWS व्यवस्था में व्यावहारिक बदलाव की मांग को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस अभियान में EWS प्रमाण पत्र की अवधि बढ़ाने, राज्य के प्रमाण पत्र को केंद्र में मान्यता देने और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे भी शामिल हैं. यही वजह है कि आंदोलन का दायरा केवल सरकारी नौकरियों में आरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रमाण-पत्र व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषय भी इसमें जुड़ गए हैं.
आंदोलन के सियासी मायने क्या हैं?
भाटी के इस अभियान को राजस्थान की राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक के तौर पर राजनीति में सक्रिय भाटी EWS मुद्दे के जरिए युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसी राजनीतिक चर्चा है. EWS को लेकर प्रदेशव्यापी यात्रा के जरिए उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा क्षेत्र से बाहर भी उठाया है.
भाटी की ओर से यह भी दावा किया गया है कि राजस्थान के 75 से अधिक विधायक उनकी मांगों के समर्थन में लिखित सहमति या समर्थन पत्र दे चुके हैं. साथ ही प्रदेश के सांसदों से भी समर्थन मांगा गया है. हालांकि, इन दावों और समर्थन के वास्तविक राजनीतिक प्रभाव का आकलन अलग-अलग स्तर पर किया जा रहा है.
आगामी पंचायती राज चुनावों के समय EWS का मुद्दा उठाए जाने से इसकी राजनीतिक चर्चा और बढ़ी है. कुछ विश्लेषणों में इसे BJP के पारंपरिक समर्थन आधार से जुड़े वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि भाटी के अभियान का घोषित केंद्र EWS व्यवस्था में बदलाव और पात्र युवाओं को लाभ दिलाने की मांग है.
EWS आरक्षण क्या है?
EWS यानी Economically Weaker Sections आरक्षण सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए है. यह उन लोगों के लिए है जो SC, ST या OBC आरक्षण के दायरे में नहीं आते और निर्धारित आर्थिक एवं संपत्ति संबंधी पात्रता शर्तें पूरी करते हैं.
केंद्र सरकार की व्यवस्था में EWS वर्ग के पात्र लोगों के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है. EWS लाभ लेने के लिए पात्रता प्रमाणित करने वाला EWS प्रमाण पत्र जरूरी होता है.
EWS के लिए किन शर्तों का जिक्र है?
EWS पात्रता में परिवार की कुल सकल वार्षिक आय, कृषि भूमि, आवासीय फ्लैट और प्लॉट सहित संपत्ति से जुड़े मानदंड शामिल हैं. दिए गए विवरण के अनुसार सामान्य वर्ग का आवेदक SC, ST या OBC आरक्षण के तहत कवर नहीं होना चाहिए. परिवार की सभी स्रोतों से कुल सकल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए.
इसके अलावा परिवार के पास 5 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए. 1,000 वर्ग फुट या उससे बड़ा आवासीय फ्लैट होने पर भी पात्रता प्रभावित होती है. अधिसूचित नगरपालिका क्षेत्र में 100 वर्ग गज या उससे बड़ा आवासीय प्लॉट अथवा अन्य क्षेत्रों में 200 वर्ग गज या उससे बड़ा प्लॉट होने पर पात्रता नहीं मिलती.
EWS प्रमाण पत्र क्यों जरूरी?
EWS श्रेणी के तहत सरकारी भर्ती या शैक्षणिक संस्थान में आरक्षण का लाभ लेने के लिए EWS प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज है. यह प्रमाणित करता है कि आवेदक निर्धारित आर्थिक और संपत्ति संबंधी शर्तों को पूरा करता है. राजस्थान में EWS प्रमाण पत्र के लिए ई-मित्र केंद्र या संबंधित सरकारी ऑनलाइन सेवा के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है. जन आधार पोर्टल पर भी EWS प्रमाण पत्र से जुड़ी सेवा उपलब्ध है.
प्रमाण पत्र बनने में कितना समय लग सकता है?
राजस्थान में EWS प्रमाण पत्र बनने में आवेदन की जांच, दस्तावेजों की स्थिति और संबंधित तहसील या प्रशासनिक कार्यालय की प्रक्रिया के आधार पर समय अलग-अलग हो सकता है. आमतौर पर इसमें कुछ दिनों से लेकर 2-3 सप्ताह तक का समय लग सकता है.
अब सरकार के अगले कदम पर नजर
केंद्रीय स्तर पर EWS पात्रता नियमों के सरलीकरण और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने को लेकर चर्चा सामने आने के बाद अब आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी. फिलहाल शेखावत और वीरेंद्र कुमार के बीच हुई बातचीत में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जानकारी सामने आई है. दूसरी ओर, भाटी EWS नियमों में बदलाव की मांग को लेकर अपना अभियान आगे बढ़ा रहे हैं.
ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि EWS पात्रता नियमों, प्रमाण पत्र की प्रक्रिया, भूमि संबंधी शर्तों और अन्य मांगों पर सरकार की ओर से क्या निर्णय या बदलाव सामने आते हैं. फिलहाल EWS आरक्षण का मुद्दा राजस्थान से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का हिस्सा बन चुका है.