रिश्ते में 'बड़े भाई' और हाथ में थमा दिया नोटिस! कांग्रेस पर विश्वेंद्र सिंह का तंज- 'आप कार्रवाई के लिए स्वतंत्र, मैं अपना भविष्य चुनने के लिए आज़ाद'
राजस्थान कांग्रेस में पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह को लेकर विवाद अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गया है. पार्टी की अनुशासन समिति ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिन में जवाब मांगा है. नोटिस में संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी, निकाय चुनाव में पार्टी का सहयोग नहीं करने और सोशल मीडिया के जरिए पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाने समेत कई आरोपों का उल्लेख है. विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसका जवाब देते हुए कहा कि वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र हैं और खुद को मर्यादा व अनुशासन में रहने वाला बताया.
Rajasthan Politics: राजस्थान कांग्रेस में पूर्व मंत्री और डीग-कुम्हेर के पूर्व विधायक विश्वेंद्र सिंह को लेकर विवाद अब अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गया है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति ने डीग और भरतपुर जिला कांग्रेस कमेटियों की शिकायत के आधार पर विश्वेंद्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है. नोटिस में उनसे पूछा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते उन्हें कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित क्यों नहीं किया जाए.
अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना की ओर से जारी नोटिस में विश्वेंद्र सिंह के लंबे समय से पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया गया है. नोटिस के मुताबिक, वे पार्टी के कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं. जिला कांग्रेस अध्यक्षों द्वारा संपर्क किए जाने पर चर्चा के बजाय 'डू नॉट डिस्टर्ब मी' का संदेश भेजने का भी उल्लेख किया गया है.
निकाय चुनाव से लेकर सोशल मीडिया पोस्ट तक का जिक्र
नोटिस में हाल में हुए नगर निकाय चुनाव का भी हवाला दिया गया है. आरोप लगाया गया है कि विश्वेंद्र सिंह ने प्रत्याशी चयन और चुनाव अभियान में जिला कांग्रेस कमेटी तथा प्रत्याशियों के प्रचार में सहयोग नहीं किया.
इसके अलावा भरतपुर नगर निगम के सभापति चुनाव का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी ने नाम वापस लिया और ऐसा विश्वेंद्र सिंह के आदेश पर किए जाने की बात सामने आई. नोटिस में कहा गया है कि इसके चलते भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध सभापति चुना गया.
कांग्रेस ने विश्वेंद्र सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी आपत्ति जताई है. नोटिस में भरतपुर और डीग-कुम्हेर के जिला अध्यक्षों को अक्षम बताए जाने और पार्टी में अपनी बात रखने के लिए उचित मंच के बजाय सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर सवाल उठाया गया है. वहीं, AICC के संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त जिला अध्यक्षों की नियुक्ति और योग्यता पर सवाल उठाने को भी पार्टी अनुशासन के विपरीत बताया गया है.
डोटासरा के खिलाफ बयानबाजी का भी उल्लेख
नोटिस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ बयानबाजी और सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत एवं राजनीतिक आरोप लगाने का भी उल्लेख है. कांग्रेस की ओर से इसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है. इसके साथ ही विश्वेंद्र सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट में पार्टी की रीति-नीति पर सवाल उठाने और पार्टी को अलविदा कहने में अपनी भलाई व्यक्त करने का हवाला देते हुए पार्टी विचारधारा और अनुशासन के प्रति उनके रुख पर सवाल उठाया गया है.
नोटिस के बाद विश्वेंद्र सिंह का पलटवार
कारण बताओ नोटिस सामने आने के बाद विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया. उन्होंने लिखा- 'राजस्थान कांग्रेस कमेटी का सूरत-ए-हाल...'.
विश्वेंद्र सिंह ने अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना को संबोधित करते हुए लिखा कि पहले उन्हें यह तय करना चाहिए कि वह नोटिस का जवाब दें या पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से उनके संबंध में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया दें. उन्होंने लिखा-'वो मुझे अपने बड़े भाई के रूप में देख रहे हैं, दूसरी ओर आपकी कारगुजारी सामने है.'
विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि वह और उनके सभी कार्यकर्ता इस पूरे घटनाक्रम को लेकर 'किंकर्तव्यविमूढ़' हैं. साथ ही उन्होंने लिखा-'आप अपनी कार्यवाही के लिए स्वतंत्र हैं और मैं राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र हूं.' अपने बचाव में विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि वह हमेशा 'मर्यादा और अनुशासन' में रहे हैं. उन्होंने आगे लिखा- 'उम्र के इस पड़ाव पर शायद मुझे किसी की नसीहत की जरूरत नहीं है.'
इस तरह कारण बताओ नोटिस और उसके जवाब में आई विश्वेंद्र सिंह की सोशल मीडिया प्रतिक्रिया ने राजस्थान कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेद को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है. अब निगाहें विश्वेंद्र सिंह के औपचारिक जवाब और उसके बाद कांग्रेस अनुशासन समिति की कार्रवाई पर हैं.