राजस्थान महिला पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी खबर, करोड़ों की लागत से बनेंगे 779 नए शौचालय!
राजस्थान पुलिस में महिला कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी है. पुलिस आवासन शाखा के अनुसार, प्रदेश में 2337 महिला शौचालयों की जरूरत है. पहले चरण में 779 शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसके लिए सरकार से ₹59.20 करोड़ की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मांगी गई है. महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती संख्या और लंबे समय से उठ रही मांग को देखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है.
Rajasthan News: राजस्थान पुलिस में महिला कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बड़ी खबर है. राज्य के पुलिस थानों, पुलिस लाइन, बटालियन और प्रशिक्षण संस्थानों में महिला पुलिसकर्मियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ रहा है. खुद पुलिस आवासन शाखा ने माना है कि प्रदेश में 2337 महिला शौचालयों की जरूरत है. अब पहले चरण में 779 महिला शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसके लिए सरकार से करीब 59 करोड़ 20 लाख रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मांगी गई है.
महिला पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था संभालने के लिए दिन-रात ड्यूटी करती हैं लेकिन इन्हीं महिला पुलिसकर्मियों के लिए पुलिस थानों और दूसरे पुलिस संस्थानों में जरूरी सुविधाओं की कमी सामने आई है. पुलिस आवासन शाखा की ओर से गृह विभाग को भेजे गए स्मरण पत्र में माना गया है कि संसाधनों के अभाव में महिला कर्मियों के लिए पर्याप्त संख्या में पृथक शौचालय नहीं बन पाए हैं.
राजस्थान पुलिस में महिला सुविधाओं की स्थिति
पुलिस आवासन शाखा के मुताबिक, प्रदेश के अलग-अलग पुलिस कार्यालयों, पुलिस लाइनों, बटालियनों, प्रशिक्षण संस्थानों और पुलिस थानों में कुल 2337 महिला शौचालयों की जरूरत है. इनमें से फिलहाल पहले चरण में 779 महिला शौचालय बनाने का प्रस्ताव है और निर्माण के लिए प्रस्तावित राशि-₹59.20 करोड़ है.
खास बात ये है कि पुलिस मुख्यालय ने पहले चरण के लिए प्रस्तावित सभी 779 शौचालयों के निर्माण के लिए स्थान उपलब्ध होने की बात भी कही है यानी जरूरत भी चिन्हित हो चुकी है, जगह भी उपलब्ध है और अब सरकार की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी का इंतजार है.
लगातार बढ़ रही महिला पुलिसकर्मियों की संख्या
दरअसल, पुलिस मुख्यालय ने अपने पत्र में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने को भी इसका बड़ा कारण बताया है. करीब 10 सालों में राज्य सेवा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है. पुलिस विभाग में भी महिला कांस्टेबल से लेकर उप निरीक्षक और डिप्टी कमांडेंट स्तर तक महिला अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है लेकिन पुलिस आवासन शाखा के मुताबिक, उसी अनुपात में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका.
इसका असर सबसे ज्यादा पुलिस थानों, पुलिस चौकियों, पुलिस अधीक्षक कार्यालयों, रिजर्व पुलिस लाइन, आरएसी और एमबीसी बटालियन मुख्यालयों और प्रशिक्षण संस्थानों में देखने को मिल रहा है. पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के जिला भ्रमण और अधिकारियों की संपर्क सभाओं के दौरान महिला पुलिसकर्मी लगातार इस समस्या को उठाती रही हैं. अब इस समस्या के स्थायी समाधान की कवायद शुरू हुई है.
हर थाने में दो अलग शौचालय का प्रस्ताव
पुलिस आवासन शाखा ने कहा है कि प्रत्येक पुलिस थाने में महिला कार्मिकों, महिला अधिकारियों और महिला परिवादियों के लिए कम से कम दो पृथक शौचालयों की व्यवस्था होनी चाहिए. सिर्फ थानों की बात नहीं है, जर्व पुलिस लाइन में भी महिला पुलिसकर्मियों को अलग-अलग सरकारी कामकाज के लिए आना पड़ता है. इसके अलावा महिला पुलिसकर्मियों के इन-सर्विस प्रशिक्षण भी पुलिस लाइन में आयोजित होते हैं. परेड ग्राउंड पर पीटी और दूसरे सघन अभ्यास सत्रों के दौरान भी महिला पुलिसकर्मियों के लिए शौचालय की जरूरत होती है.
पुलिस आवासन शाखा ने अपने प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय महिला आयोग और केंद्र एवं राज्य सरकार के नियमों में सरकारी कार्यस्थलों पर महिला कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पृथक शौचालय और चेंजिंग रूम जैसी सुविधाओं की आवश्यकता का हवाला दिया है. इसी आधार पर अब पुलिस विभाग में महिला कर्मचारियों के लिए पर्याप्त संख्या में शौचालय निर्माण को जरूरी बताया गया है.
पुलिस आवासन शाखा ने सरकार से साल 2026-27 में पुलिस प्रशासनिक भवनों के निर्माण के लिए निर्धारित बजट मद से 59 करोड़ 20 लाख 40 हजार रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी करने का आग्रह किया है. स्वीकृति मिलती है तो पहले चरण में चिन्हित 779 स्थानों पर निर्माण कराया जा सकेगा.