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Rajasthan PHED: जयपुर-पीएचईडी में जेजेएम का "स्पर्श का अंकगणित" बुरी तरह से फंसा हुआ है. नेशनल जल जीवन मिशन(NJJM) के शर्तों के मुताबिक पुरानी योजनाओं का लेखा जोखा देना इंजीनियर्स के लिए मुसीबत बन गया. जिस कारण हर घर नल योजना के जरिए गांव ढाणियों के करोडों के प्रोजेक्ट्स पर पैंच फंसा हुआ है.
PHED के लिए गले की फांस बना
राजस्थान का जल जीवन मिशन "स्पर्श" के "अंकगणित" में उलझ गया है. अभियंता पुराने खर्चों के हिसाब-किताब देने में बुरी तरह से उलझे हुए है. नया पैमेंट मैथड पब्लिक हैल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के लिए गले की फांस बना हुआ है. PHED में पहले संचार पोर्टल के जरिए परियोजनाओं के बजट जारी होते थे, लेकिन अब NJJM की गाइडलाइन के मुताबिक स्पर्श पोर्टल के जरिए भुगतान होगा. स्पर्श पोर्टल पर प्रदेश में JJM की सभी सिंगल विलेज 13,688 योजनाओं का लेखा-जोखा दर्ज होना है. जिसमें से महीनों बाद 6100 योजनाओं का रिकॉर्ड दर्ज हुआ है. अभी भी 7588 योजनाओं का डेटा फीड नहीं हुआ है. गाइडलाइन के मुताबिक सभी योजनाओं के खर्चों का पूरा लेखा जोखा देना होगा, तभी इनका बजट जारी होगा. लेकिन डिविजनों के खर्चों का गणित नेशनल जल जीवन मिशन (NJJM )की सूची से मिलान नहीं हो पा रहा. जिस कारण खर्चों का अंकगणित बिगडने से बजट जारी नहीं हो पा रहा.4100 योजनाए तो ऐसी है जहां बजट शून्य है.
जेजेएम में प्रोजेक्ट्स का लेखा जोखा
वर्क इन प्रोग्रेस - 24000 करोड
टैंडर होना बाकी - 17000 करोड
बजट अटका हुआ- 2800 करोड
JJM में बजट जारी करने के 3 मेथड
1.SNA-SPARSH स्पर्श
JJM 2.0 में SNA यानि 'सिंगल नोडल एजेंसी' और उससे जुड़े 'SNA SPARSH' प्लेटफ़ॉर्म एक डिजिटल वित्तीय ढांचा है, जिसका इस्तेमाल स्कीम-आधारित फंड जारी करने खर्चों को रियल-टाइम में ट्रैक करने और पारदर्शी ऑडिटिंग के लिए किया जाता है. इसमें राज्य को एकमुश्त फंड ट्रांसफर करने के बजाय अलग-अलग जल आपूर्ति योजनाओं से जुड़े फंड के सीधे वितरण और ट्रैकिंग की सुविधा है. यह डिजिटल गवर्नेंस के ज़रिए सार्वजनिक फंड के इस्तेमाल में जवाबदेही, ऑडिट की सुविधा के लिए लागू किया गया. लेकिन स्पर्श पोर्टल में जलदाय विभाग पुराने खर्चों का लेखा जोखा NJJM की शर्तो के मुताबिक नहीं दे पा रहा. जिस कारण वाउचर टैग नहीं हो पा रहे. स्पर्श में दो तरह के भुगतान की व्यवस्था है पहला सिंगल विलेज स्कीम और दूसरा क्यू एंड क्यू.
A. सिंगल विलेज स्कीम
सिंगल विलेज स्कीमो में डिवीजनों में अभियंता जेजेएम के तहत खर्चों का गांव की योजनाओं के हिसाब किताब पूरा नहीं दे पा रहे. जिस कारण अधिकतर सिंगल विलेज स्कीमों का पैंच बुरी तरह से फंसा हुआ है. एनजेजेएम के शर्तों पूरी होने के बाद भी पैमेंट होगा. लेकिन अधिकतर स्कीमो में अभियंता पुराने खर्चों का गणित नहीं दे पा रहे. केंद्र और राज्य में 50 50 प्रतिशत का रेशों है.
B. क्वाटिटी एंड वॉटर क्वालिटी
जानकारों के मुताबिक राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक क्वांटिटी एंड वॉटर क्वालिटी के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है. 1,00,000 लीटर की टंकी के लिए 3 गुणा प्रेशर की जरूरत होती है. लेकिन राज्य में 1,00,000 लीटर की टंकी पर 6 गुणा प्रेशर की जरूरत पड रही है. जिससे संसाधनों पर ज्यादा खर्च हो रहा. स्टेट क्यूएंडक्यू में अपना सीधा शेयर नहीं दे पा रहा. इसलिए करीब 567 करोड का भुगतान अटका हुआ है.
2. SNA-SANCHALAN (संचालन)
JJM में 2019-20 से लेकर 2023 तक योजनाओं का बजट SNA संचालन पोर्टल के माध्यम से किया जाता था. लेकिन एक बार फिर से इस पोर्टल को 6 महीने के लिए खोला गया है. जानकारों के मुताबिक राजस्थान को इस पोर्टल को ओपन के लिए विशेष अनुमति मिली है. ताकि इसके जरिए मल्टीपल विलेज स्कीम्स का बजट जारी हो सके.NJJM ने संचार पोर्टल बंद करने के बाद स्पर्श पोर्टल लाया.
3. WAM
इसमें रेट ऑफ फिट का पैमेंट जारी होता है. यानी जिन पुरानी योजनाओं को जेजेएम में जोड़ा गया है और इनमें नए सोर्स डवलव हुए है, उसके लिए पैमेंट का मेथड है. जैसे किसी पुरानी योजना में नई टंकी या पाइपलाइन जोडी, उसका बजट इस पोर्टल से जारी होगा. लेकिन इसमें करीब करोड़ों का भुगतान अटका हुआ है. बताया जा रहा है कि इसका पैमेंट राज्य सरकार करेगी. जानकारों के मुताबिक मेजर प्रोजेक्ट्स में 517 करोड़ और OTMP में 216 करोड़ का बजट अटका है.