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जोधपुर में बोरवेल की जंग हार गया भोमाराम: देसी जुगाड़ से निकला शरीर, लेकिन पानी छीन ले गया जिंदगी

राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को करीब 40 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी. पत्थर और पानी के कारण बचाव कार्य में बाधाएं आईं.

Written By Sandhya Yadav
Published: Oct 17, 2026, 08:01 AM IST | Updated: Oct 17, 2026, 09:40 AM IST
Image Credit: 1050 फीट गहरे बोरवेल में फंसे भोमाराम की मौत.
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राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट में बोरवेल हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं. 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को बचाने के लिए करीब 40 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. शुक्रवार रात करीब 3 बजे बचाव दल ने बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाल लिया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. इसके बाद बच्चे के शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया. हादसे के बाद परिवार में शोक का माहौल है.

गुरुवार दोपहर बोरवेल में गिरा था बच्चा
जानकारी के अनुसार, भोमाराम गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था. वह अंदर लगभग 640 फीट की गहराई पर जाकर फंस गया. घटना की सूचना मिलते ही बच्चे को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान शुरू कर दिया गया. बोरवेल की गहराई और अंदर की कठिन परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू टीमों को शुरुआत से ही काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय रेस्क्यू विशेषज्ञ लगातार प्रयास करते रहे. घंटों तक चले अभियान के दौरान कई बार ऐसी बाधाएं सामने आईं, जिनकी वजह से बचाव कार्य को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया.

यह भी पढ़ें- जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष: 150 से अधिक जवानों ने झोंकी ताकत, बोरवेल में गिरे बच्चे को बचाने की महा-कवायद जारी
 

पत्थर और पानी से रेस्क्यू में आई बाधाएं
बोरवेल के अंदर पत्थर मौजूद होने और लगातार पानी आने से बचाव अभियान प्रभावित होता रहा. इन मुश्किलों के कारण टीमों को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा. बच्चे तक पहुंचने और उसे बाहर निकालने के लिए लगातार कोशिशें की गईं, लेकिन परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी रहीं.

इस अभियान में बोरवेल रेस्क्यू के देसी विशेषज्ञ माधाराम और उनकी टीम ने भी अहम भूमिका निभाई. वहीं, एनडीआरएफ के प्रवीण कुमार और एसडीआरएफ के जग्गूराम की टीमों ने भी बच्चे को बचाने के लिए लगातार मेहनत की. लंबे समय तक चले प्रयासों के बावजूद भोमाराम को जीवनदान नहीं मिल सका.

देसी जुगाड़ से बाहर निकाला गया भोमाराम
पारंपरिक तरीके से बच्चे को बाहर निकालने में आ रही मुश्किलों के बाद रेस्क्यू टीमों ने देसी जुगाड़ की मदद से उसे निकालने का प्रयास किया. कई घंटों की मशक्कत के बाद शुक्रवार रात करीब 3 बजे बचाव दल को सफलता मिली और भोमाराम को बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया.

बच्चे को बाहर निकालने तक बहुत देर हो चुकी थी और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. बाद में शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया.

करीब 40 घंटे तक चले इस बचाव अभियान का अंत बेहद दुखद रहा. बच्चे को बचाने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय विशेषज्ञों ने हरसंभव प्रयास किया, लेकिन पत्थर, पानी और बोरवेल की अत्यधिक गहराई के कारण आई चुनौतियों के बीच मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी.

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लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है.आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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