"सिर्फ सवाल पूछने से सिस्टम नहीं बदलता..." पत्रकारिता छोड़ पार्षद बनीं 'Gen Z' नेहा शर्मा के 3 बड़े प्लान
Rajasthan News: थानागाजी से कम उम्र में पार्षद बनीं नेहा शर्मा ने जीत को बड़ी जिम्मेदारी बताया है. पूर्व पत्रकार नेहा अब जनता और प्रशासन के बीच दूरी कम करने पर जोर देंगी. युवाओं के लिए स्किल सेंटर, महिला सुरक्षा, CCTV, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता और पेयजल उनकी प्राथमिकताएं हैं.
Rajasthan Nikay Chunav: Gen Z के दौर में राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजों पर भी युवाओं का असर साफ नजर आया है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग राजनीतिक दलों से 20 साल की उम्र के शुरुआती दौर वाले कई युवा उम्मीदवारों ने पार्षद का चुनाव जीतकर सदन में जगह बनाई है. ऐसी ही थानागाजी से चुनाव जीतकर नेहा शर्मा ने भी अपना नाम राजनीति में स्वर्णिम अक्षरों में लिखवा लिया है. आइए जानते हैं नेहा शर्मा से ही कि उनके वार्ड के लिए उन्होंने क्या प्लान बनाया है.
सवाल - इतनी कम उम्र की पार्षद के रूप में आपकी जीत पर थानागाजी की जनता ने जो भरोसा जताया है, उसे आप कैसे पूरा करेंगी?
जवाब - जनता ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, वो मेरे लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. इस कम उम्र में मिला यह स्नेह और विश्वास साबित करता है कि थानागाजी की जनता बदलाव और युवा ऊर्जा चाहती है. मेरा सबसे पहला प्रयास यह होगा कि मैं जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को पूरी तरह मिटा दूं. वार्ड का हर एक नागरिक सीधे मुझसे जुड़ सके, ऐसा पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम बनाऊंगी. विकास के हर काम में जनता की सीधी भागीदारी होगी, ताकि जनता को महसूस हो कि यह उनकी अपनी चुनी हुई सरकार है.
सवाल - चुनाव प्रचार के दौरान एक युवा और महिला होने के नाते आपको किन जमीनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा?
जवाब - चुनौतियां तो हर कदम पर थीं-चाहे वह पारंपरिक राजनीतिक सोच का सामना करना हो या पितृसत्तात्मक मानसिकता की उन दबी हुई आवाज़ों का, जो यह मानती हैं कि राजनीति सिर्फ पुरुषों का मैदान है. कई बार लोग मेरी उम्र और अनुभव को लेकर संशय में भी थे. लेकिन मैंने इसे चुनौती नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का अवसर माना. मैंने अपनी ऊर्जा, संवाद और जनता के बीच रहकर काम करने के जज्बे से उन सभी संशयों को तोड़ा. जनता का साथ और मेरा आत्मबल मेरी सबसे बड़ी ढाल बना.
सवाल - थानागाजी के विकास और युवाओं के लिए आपकी प्राथमिकता वाली सबसे पहली तीन योजनाएं कौन सी हैं?
जवाब - मेरी प्राथमिकताएं बहुत स्पष्ट और धरातल से जुड़ी हैं, जिनमें ये तीन सबसे अहम हैं. युवाओं के लिए कौशल और रोजगार केंद्र: थानागाजी के युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार सही अवसर और डिजिटल ट्रेनिंग मिल सके, इसके लिए स्थानीय स्तर पर एक यूथ गाइडेंस एवं स्किल सेंटर की स्थापना करना. महिला सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं: वार्ड में विशेषकर महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाना और स्ट्रीट लाइट्स की पुख्ता व्यवस्था करना. स्वच्छता और पेयजल प्रबंधन: वार्ड के हर कोने तक स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना और कचरा प्रबंधन के लिए एक स्थाई समाधान विकसित करना.
सवाल - पत्रकारिता से सीधे सियासत के मैदान में आना कितना चुनौतीपूर्ण रहा, और इस बदलाव की प्रेरणा क्या थी?
जवाब - पत्रकारिता में रहते हुए मैंने हमेशा जनता की समस्याओं को बहुत करीब से देखा है, उनकी आवाज़ उठाई है. लेकिन एक सीमा के बाद लगता था कि सिर्फ खबर दिखाने या लिखने से बदलाव की रफ्तार बहुत धीमी रहती है. मुझे महसूस हुआ कि अगर व्यवस्था को वास्तव में बदलना है, तो सिर्फ सवाल पूछने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सिस्टम के भीतर जाकर फैसले लेने होंगे. यही सोच मेरी प्रेरणा बनी. पत्रकारिता से सियासत में आना एक बड़ा बदलाव जरूर है, क्योंकि अब पेन की जगह सीधे जनता की सेवा का दायित्व मेरे कंधों पर है.
सवाल - पूर्व पत्रकार होने के नाते क्या आपको लगता है कि राजनीति में आने से जनता की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान में मदद मिलेगी?
जवाब - बिल्कुल, यह मेरा सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है. एक पत्रकार के रूप में मुझे हर विभाग की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक पेचीदगियों और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत की गहरी समझ है. मुझे यह अच्छी तरह पता है कि फाइलें कहाँ अटकती हैं और समाधान के लिए किस अधिकारी से और कैसे बात करनी है. पत्रकारिता ने मुझे मुखर और निडर बनाया है, जो अब जनता के हक की लड़ाई लड़ने और उनके कामों को तेजी से करवाने में सबसे बड़ा हथियार साबित होगा.