Kota News: कोटा में नए महापौर के चयन को लेकर भारतीय जनता पार्टी में मंथन शुरू हो गया है. पार्टी इस बार महापौर पद के लिए ओबीसी वर्ग की महिला पार्षदों के नामों पर विचार कर रही है. इसके लिए क्षेत्र के साथ संगठन से जुड़ाव, साफ छवि और जातीय समीकरण जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है. विधायक, जिलाध्यक्ष और कोर कमेटी की चर्चा के बाद 2 से 3 नामों का पैनल प्रदेश नेतृत्व को भेजा जाएगा. इसके बाद महापौर के नाम पर अंतिम फैसला होगा.
महापौर की दौड़ में इन नामों की चर्चा
महापौर पद के लिए कई महिला पार्षदों के नाम चर्चा में हैं. इनमें वार्ड 83 की सीमा चौधरी का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है. वह पहली बार पार्षद बनी हैं और पार्टी से लंबे समय से जमीनी स्तर पर जुड़ी हुई हैं.
वार्ड 98 की अनुसुईया गोस्वामी भी दावेदारों में शामिल हैं. वह पूर्व में महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुकी हैं. इसी तरह वार्ड 64 की प्रतिभा सुमन का नाम भी चर्चा में है. वह पहले भी पार्षद रह चुकी हैं और लाडपुरा क्षेत्र में सक्रिय रही हैं.
पुष्पा चौधरी समेत ये नाम भी चर्चा में
वार्ड 87 से निर्वाचित पुष्पा चौधरी भी महापौर पद की दौड़ में हैं. वह ओबीसी वर्ग से निर्वाचित हुई हैं और पूर्व पार्षद की पत्नी हैं. इनके अलावा संजना झमटानी, दीपिका शर्मा और प्रमिला वर्मा के नामों पर भी पार्टी के भीतर चर्चा चल रही है.
19 सितंबर तक दाखिल होंगे नामांकन
महापौर चुनाव के लिए 19 सितंबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे. इसके बाद 22 सितंबर को नाम वापसी होगी. 25 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा. मतदान के बाद मतगणना की जाएगी. वहीं उप महापौर का चुनाव 26 सितंबर को होगा.
कांग्रेस भी मैदान में उतारेगी प्रत्याशी
महापौर चुनाव में कांग्रेस भी अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है. हालांकि पार्टी के पास बहुमत नहीं है, इसके बावजूद कांग्रेस चुनाव मैदान में प्रत्याशी उतारेगी. शहर अध्यक्ष राखी गौतम के मुताबिक 19 सितंबर को वरिष्ठ नेताओं की बैठक होगी. इसी बैठक में प्रत्याशी के नाम पर फैसला किया जाएगा.
सोशल इंजीनियरिंग से कैसे तय होता है नाम?
महापौर चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग का मतलब अलग-अलग सामाजिक और जातीय समूहों के समीकरण को ध्यान में रखकर उम्मीदवार का चयन करना है. किसी एक नाम पर फैसला लेते समय पार्टी यह देख सकती है कि उस उम्मीदवार का किस क्षेत्र में प्रभाव है, किस सामाजिक वर्ग से वह आता है और अलग-अलग समूहों के बीच उसकी स्वीकार्यता कैसी है. इसके साथ संगठन में उसकी भूमिका और राजनीतिक समीकरण भी देखे जाते हैं. कोटा में भी ओबीसी महिला पार्षदों के नामों की चर्चा के बीच जातीय समीकरण को एक अहम पहलू माना जा रहा है.