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जयपुर जिले में BJP की बड़ी बाजी: 18 में से 12 निकायों में कमल, कांग्रेस 6 पर सिमटी

Rajasthan News: जयपुर जिले की 18 नगर निकायों में अध्यक्ष पद के नतीजों में BJP ने 12 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं. शाहपुरा और जोबनेर में एक-एक वोट से फैसला हुआ, जबकि चौमूं में BJP और खेजरोली में कांग्रेस को सबसे बड़ी जीत मिली.

Reported By Deepak Goyal Edited By SAGAR CHAUDHARY
Published: Sep 21, 2026, 10:17 PM IST | Updated: Sep 21, 2026, 10:26 PM IST
Image Credit: Jaipur Nikay Report Card
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Jaipur Nagar Nigam: जयपुर जिले के निकाय चुनाव में पार्षद चुनने के बाद अब शहरी सत्ता की दूसरी तस्वीर भी सामने आ गई है. नगर निगम जयपुर को छोड़कर जिले की 18 नगर पालिका-परिषदों में निकाय प्रमुखों का फैसला हुआ और भाजपा ने 12 निकायों में अध्यक्ष-सभापति की कुर्सी हासिल की, जबकि कांग्रेस 6 निकायों में सफल रही. यानी प्रमुख पदों के लिहाज से भाजपा ने जिले के दो-तिहाई निकायों पर कब्जा किया. दिलचस्प यह है कि कई निकायों में पार्षद चुनाव का सीधा गणित अध्यक्ष चुनाव तक आते-आते बदल गया. जयपुर जिले में निकाय प्रमुख चुनाव में जीत के अंतर की तस्वीर भी दिलचस्प रही.

शाहपुरा में एक वोट से पलटा पूरा गणित
शाहपुरा नगर परिषद इस चुनाव का सबसे दिलचस्प राजनीतिक उदाहरण बना. यहां 55 सदस्यीय सदन में कांग्रेस 23 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी और भाजपा के 20 पार्षद थे. 12 निर्दलीय थे. अध्यक्ष चुनाव में तस्वीर पलट गई. भाजपा के रविश खटाना को 28 वोट, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 27 वोट मिले. यानी भाजपा प्रत्याशी को अपने दल की संख्या से 8 वोट अधिक मिले और अध्यक्ष की कुर्सी एक वोट से भाजपा के खाते में चली गई. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को भी कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों की संख्या से चार वोट अधिक मिले.

जोबनेर में भी एक वोट से भाजपा की जीत
जोबनेर का परिणाम भी सीटों और सत्ता के अंतर की कहानी कहता है. 20 सदस्यीय पालिका में भाजपा 7, कांग्रेस 5 और निर्दलीय 8 जीते थे. किसी के पास बहुमत नहीं था. अध्यक्ष चुनाव में भाजपा की सरोज गुर्जर को 9, कांग्रेस को 8 और निर्दलीय प्रत्याशी को 3 वोट मिले. इस तरह भाजपा प्रत्याशी अपने मूल संख्या बल से दो वोट अधिक लेकर सिर्फ एक वोट से अध्यक्ष बनीं.

चौमूं में भाजपा की सबसे बड़ी जीत
यदि जीत-हार के आंकड़े पर नजर डालें तो भाजपा के आशीष दुसाद ने चौमूं में सर्वाधिक 21 वोट के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस की ओर से खेजरोली में सुनीता सैनी की 11 वोट की जीत सबसे बड़ी रही. दूसरी तरफ शाहपुरा और जोबनेर में फैसला महज एक-एक वोट से भाजपा के पक्ष में हुआ.

भाजपा के जीते प्रत्याशियों में चौमूं नगर परिषद के आशीष दुसाद सबसे बड़े अंतर से जीते. उन्हें 33 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 12 वोट मिले. अंतर 21 वोट का रहा. इसके बाद फुलेरा में राजू शर्मा 10 वोट, बस्सी में निर्मला खोलिया 9 वोट और किशनगढ़-रेनवाल में सुमिता अग्रवाल 9 वोट से जीतीं. बगरू में संतोष चौहान 7 वोट, कालाडेरा में उर्मिला कुमावत 6 वोट और जमवारामगढ़ में राकेश कुमार वर्मा 5 वोट से जीते.

सांभर में पवन कुमार मोदी और वाटिका में कमला देवी की जीत का अंतर 3-3 वोट रहा. सबसे नजदीकी मुकाबले जोबनेर और शाहपुरा में रहे. जोबनेर में सरोज गुर्जर ने 9 वोट लेकर एक वोट से जीत दर्ज की. शाहपुरा नगर परिषद में रविश खटाना को 28 और कांग्रेस को 27 वोट मिले. यानी यहां भी कुर्सी सिर्फ एक वोट से तय हुई. वहीं चाकसू में भाजपा की पुष्पा देवी निर्विरोध प्रमुख चुनी गईं.

खेजरोली में कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत
उधर जयपुर जिले की 18 निकायों में से कांग्रेस के छह विजेताओं में सबसे बड़ी जीत खेजरोली में सुनीता सैनी की रही. उन्हें 18 वोट मिले, जबकि भाजपा को 7 वोट मिले. जीत का अंतर 11 वोट रहा.

मनोहरपुर में अर्जुन मोहनपुरिया ने 21 वोट लेकर भाजपा प्रत्याशी को 7 वोट से हराया. कानोता में राम किशन 13 वोट लेकर 6 वोट, नरायना में अब्दुल रजाक 15 वोट लेकर 5 वोट और दूदू में गरिमा कंवर 14 वोट लेकर 3 वोट से जीतीं. कांग्रेस की सबसे करीबी जीत फागी में सुरेश की रही. उन्हें 11 और भाजपा प्रत्याशी को 9 वोट मिले, यानी जीत केवल 2 वोट की रही.

जयपुर जिले की 18 निकायों में पार्टीवाइज विजेता और जीत का अंतर

शाहपुरा, जोबनेर और वाटिका में बदले समीकरण
बहरहाल, जयपुर जिले के नतीजों में भाजपा की बढ़त केवल उन निकायों तक सीमित नहीं रही जहां उसके पास शुरुआत से मजबूत संख्या थी. शाहपुरा, जोबनेर और वाटिका जैसे निकायों में अध्यक्ष चुनाव के वोटों ने गठजोड़ और निर्दलीयों की अहमियत दिखाई. खासकर शाहपुरा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद प्रमुख पद नहीं ले सकी.

दूसरी तरफ कांग्रेस ने दूदू, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नरायना और फागी में प्रमुख पद हासिल किए. इसका राजनीतिक अर्थ इतना स्पष्ट है कि पार्षद चुनाव के बाद शुरू हुआ दूसरा मुकाबला बोर्ड बनाने का भाजपा के पक्ष में 12-6 रहा.

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