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हाड़ौती में किसके हाथ सत्ता की चाबी: BJP-कांग्रेस बहुमत से दूर, निर्दलीयों की बढ़ी डिमांड!

Rajasthan News: हाड़ौती में निकाय चुनाव के बाद सभापति-चेयरमैन की कुर्सी के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गई है. कई निकायों में बीजेपी-कांग्रेस बहुमत से दूर हैं. ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की पूछ बढ़ गई है और कई जगह वे सत्ता की चाबी बन गए हैं.

Reported By Samkit Jain Edited By SAGAR CHAUDHARY
Published: Sep 17, 2026, 03:03 PM IST | Updated: Sep 17, 2026, 03:06 PM IST
Image Credit: Kota Nikay Chunav Board Formation
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Kota Nikay Chunav: हाड़ौती संभाग के नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब सभापति और चेयरमैन की कुर्सी के लिए सियासी जोड़-तोड़ शुरू हो गई है. कोटा संभाग के 28 नगर निकायों में बुधवार से अध्यक्ष पद के नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई. कई निकाय ऐसे हैं, जहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों को बहुमत के लिए निर्दलीय पार्षदों के सहारे की जरूरत पड़ रही है. ऐसे में पार्षद बनने के बाद अब निर्दलीयों की पूछ-परख अचानक बढ़ गई है.

सुल्तानपुर में बीजेपी बहुमत के बॉर्डर पर
सुल्तानपुर में 25 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 13 सीट चाहिए. बीजेपी ने 13 सीट जीतकर बहुमत का आंकड़ा छू लिया है, जबकि कांग्रेस के खाते में 11 सीटें हैं. यहां निर्दलीय की भूमिका पर भी नजर रहेगी.

सुकैत में दोनों पार्टियां बराबर
सुकैत के 25 वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 10-10 सीट मिली हैं. ऐसे में चार निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है. अध्यक्ष की कुर्सी के लिए दोनों दलों की नजर इन पार्षदों पर रहेगी.

इटावा में 5 निर्दलीय निर्णायक
इटावा के 35 वार्डों में बहुमत का आंकड़ा 18 है. कांग्रेस के पास 16 और बीजेपी के पास 14 सीट हैं. वहीं 5 निर्दलीय पार्षद जीते हैं. ऐसे में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों का समर्थन जरूरी हो सकता है.

कापरेन में भी बराबरी का मुकाबला
कापरेन में 25 वार्ड हैं. यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों के खाते में 11-11 सीट आई हैं. अब 3 निर्दलीय पार्षद पालिकाध्यक्ष की कुर्सी का फैसला करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

केशोरायपाटन में BJP को एक निर्दलीय की जरूरत
केशोरायपाटन के 25 वार्डों में बीजेपी ने 12 और कांग्रेस ने सिर्फ 3 सीट जीती हैं. निर्दलीयों के खाते में 10 सीट हैं. बीजेपी को बोर्ड बनाने के लिए कम से कम एक निर्दलीय के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है.

छबड़ा में 7 निर्दलीयों पर नजर
छबड़ा के 35 वार्डों में बीजेपी को 14, कांग्रेस को 12 और बसपा को 2 सीट मिली हैं. वहीं 7 निर्दलीय जीतकर आए हैं. ऐसे में अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम रहेगी.

अंता में दोनों पार्टियां 16-16 पर
अंता के 35 वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों 16-16 सीट पर अटकी हैं. यहां 3 निर्दलीय पार्षद निर्णायक हो गए हैं. दोनों दलों की नजर अब इन तीन पार्षदों पर है.

बूंदी में 11 निर्दलीय अहम
बूंदी नगर परिषद के 60 वार्डों में बहुमत का आंकड़ा 31 है. बीजेपी ने 29 और कांग्रेस ने 20 सीट जीती हैं. यहां 11 निर्दलीय पार्षद भी चुनाव जीतकर आए हैं, जिनकी भूमिका बोर्ड बनाने में अहम हो सकती है.

सिसवाली और नैनवां में भी निर्दलीयों की पूछ
सिसवाली के 20 वार्डों में कांग्रेस 9 और बीजेपी 6 सीट पर है. यहां 5 निर्दलीय पार्षद हैं. वहीं नैनवां के 25 वार्डों में कांग्रेस के पास 11 और बीजेपी के पास 8 सीट हैं. 6 निर्दलीय पार्षद भी जीते हैं.

पीपाड़ा के 20 वार्डों में कांग्रेस को 8, बीजेपी को 6 और निर्दलीयों को 6 सीट मिली हैं. यहां भी अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीयों का समर्थन अहम हो सकता है.

निर्दलीयों के इर्द-गिर्द घूम रहा सियासी खेल
हाड़ौती में अब असली सियासी खेल निर्दलीयों के इर्द-गिर्द घूम रहा है. दोनों पार्टियों के दिग्गज नेताओं की नजर उन पार्षदों पर है, जो आज भले निर्दलीय हैं, लेकिन कल किसी बोर्ड की सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखेंगे.

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