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1 लाख नए प्लॉट vs 500 रुपये में पट्टों का दांव: निकाय चुनाव में छाए कांग्रेस और BJP के ये दो बड़े सियासी वादे

Rajasthan News: बीजेपी ने 1 लाख आवासीय प्लॉट और 7 लाख PNG कनेक्शन का वादा किया है. कांग्रेस ने 500 रुपये में मकान का पट्टा, नामांतरण शुल्क में राहत और हर निकाय में सालाना सफाई कर्मचारी भर्ती का वादा किया.

Written By SAGAR CHAUDHARY
Published: Sep 04, 2026, 10:07 PM IST | Updated: Sep 04, 2026, 10:22 PM IST
Image Credit: Congress And BJP Manifesto Comparison
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Rajasthan Nikay Chunav: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने अपने-अपने चुनावी दस्तावेज जारी कर दिए हैं. बीजेपी ने इसे ‘नगरीय विकास संकल्प पत्र’ नाम दिया है, जबकि कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी किया है. दोनों पार्टियों ने शहरों में सड़क, पानी, सीवरेज, सफाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बेहतर करने की बात कही है. लेकिन अगर बात मकान के पट्टे और आवासीय प्लॉट की करें तो दोनों दलों के वादों में बड़ा अंतर नजर आता है. बीजेपी ने एक लाख आवासीय प्लॉट देने का वादा किया है, जबकि कांग्रेस ने 500 रुपये में मकान का पट्टा देने की व्यवस्था जारी रखने की बात कही है.

बीजेपी का फोकस एक लाख आवासीय प्लॉट पर
बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में शहरी इलाकों में एक लाख आवासीय प्लॉट देने का बड़ा वादा किया है. इसका सीधा मतलब है कि शहरों में लोगों को घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा. यानी बीजेपी का यह वादा उन लोगों के लिए अहम है, जिन्हें घर बनाने के लिए आवासीय जमीन की जरूरत है. इसके साथ ही बीजेपी ने करीब 7 लाख घरों तक पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है. पार्टी के संकल्प पत्र में शहरों में बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज, सफाई, घर और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं को बेहतर करने की बात कही गई है.

कांग्रेस का 500 रुपये में पट्टा देने का वादा
कांग्रेस ने मकान के पट्टे को लेकर 500 रुपये में पट्टा देने की व्यवस्था जारी रखने की बात कही है. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने निकाय चुनाव को लेकर अपना विजन सामने रखते हुए कहा कि सत्ता में आने पर कांग्रेस 500 रुपये में मकान का पट्टा देने की व्यवस्था जारी रखेगी.

यहां 500 रुपये वाले पट्टे को समझना भी जरूरी है. इसका मतलब यह है कि जमीन या मकान पहले से किसी व्यक्ति के कब्जे में है, लेकिन उसके पास उसका कानूनी पट्टा नहीं है. ऐसी स्थिति में भारी पेनल्टी, कन्वर्जन चार्ज या जमीन की मार्केट वैल्यू के हिसाब से बड़ी रकम लेने के बजाय नाममात्र के शुल्क पर पट्टा देने की बात है. यानी कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद व्यक्ति को जमीन या मकान पर मालिकाना हक का दस्तावेज मिल सकेगा.

नामांतरण शुल्क में राहत भी जारी रखने का दावा
कांग्रेस ने सिर्फ पट्टे की बात नहीं की है. पार्टी ने नामांतरण शुल्क में दी गई राहत को भी आगे जारी रखने का दावा किया है. इसका मकसद उन लोगों को राहत देना है, जिन्हें जमीन या मकान के कागजों में नाम बदलवाने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है. इस तरह देखा जाए तो कांग्रेस का फोकस उन लोगों पर ज्यादा है, जिनके पास जमीन या मकान है लेकिन उससे जुड़े कागज और सरकारी प्रक्रिया उनके लिए परेशानी का कारण बन रही है.

दोनों पार्टियों के वादों में क्या समान है?
बीजेपी और कांग्रेस दोनों के चुनावी दस्तावेजों में शहरों की मूल सुविधाओं को बेहतर करने की बात है. दोनों ही पार्टियां पेयजल, सीवरेज लाइन, पक्की सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दे रही हैं. छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों को लेकर भी दोनों दलों के वादों में समानता है. दोनों सुरक्षित रोजगार स्थल और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का फायदा देने की बात कर रहे हैं. पर्यावरण और सफाई भी दोनों के एजेंडे में है. शहरों को साफ और हरा-भरा बनाने के साथ कचरा प्रबंधन को बेहतर करने पर जोर दिया गया है.

शहरी विकास को लेकर कांग्रेस का प्लान
कांग्रेस ने शहरों में CC रोड, ड्रेनेज, सीवरेज और STP के लिए अतिरिक्त बजट देने की बात कही है. इसके अलावा नगर निकायों में होने वाले विकास कार्यों का स्टेटस ऑनलाइन करने का वादा किया गया है. कांग्रेस के अनुसार आम लोगों की शिकायतों के ऑनलाइन निस्तारण की व्यवस्था भी लागू की जाएगी. यानी किसी सड़क, नाली, सफाई या दूसरे स्थानीय काम को लेकर शिकायत करने पर उसकी जानकारी ऑनलाइन मिल सकेगी और शिकायत के समाधान की प्रक्रिया भी देखी जा सकेगी.

बीजेपी का फोकस आधुनिक शहरों पर
बीजेपी के संकल्प पत्र में शहरों को आधुनिक बनाने पर ज्यादा जोर दिखाई देता है. पार्टी ने रोबोटिक सफाई, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ई-चार्जिंग स्टेशन, स्मार्ट ट्रैफिक और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया है. इसके अलावा मेट्रो, रिंग रोड और ई-बस जैसी सुविधाओं को बढ़ाने की बात भी कही गई है. पार्किंग, फूड कोर्ट और सोलर प्लांट जैसी सुविधाओं को लेकर भी बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में वादे किए हैं. यानी बीजेपी का जोर तकनीक और बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए शहरों को आधुनिक बनाने पर है.

कांग्रेस ने सफाई कर्मचारियों को लेकर क्या कहा?
सफाई व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने अलग तरह का वादा किया है. डोटासरा ने कहा कि सत्ता में आने पर हर नगर निकाय में हर साल सफाई कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी. साथ ही घर-घर कचरा संग्रहण की सुविधा मुफ्त करने की बात भी कही गई है. कांग्रेस का यह वादा सीधे तौर पर नगर निकायों की रोजाना की सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों की कमी से जुड़ा है. वहीं बीजेपी के संकल्प पत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, खासकर रोबोटिक सफाई और दूसरे स्मार्ट सिस्टम पर जोर दिया गया है.

दोनों पार्टियों के पत्रों में क्या अलग है?
अगर पट्टा और आवासीय प्लॉट को अलग रखकर दोनों के चुनावी दस्तावेज देखें तो भी कई अंतर सामने आते हैं. बीजेपी ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ई-चार्जिंग, रोबोटिक सफाई, स्मार्ट ट्रैफिक, मेट्रो, रिंग रोड और ई-बस जैसी आधुनिक सुविधाओं और बड़े प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया है. वहीं कांग्रेस ने हर नगर निकाय में हर साल सफाई कर्मचारियों की भर्ती, घर-घर मुफ्त कचरा संग्रहण, CC रोड, ड्रेनेज, सीवरेज और STP के लिए अतिरिक्त बजट देने की बात कही है. कांग्रेस ने विकास कार्यों का स्टेटस ऑनलाइन करने और लोगों की शिकायतों के ऑनलाइन समाधान का भी वादा किया है. यानी बीजेपी का जोर शहरों को तकनीक और बड़े प्रोजेक्ट्स से आधुनिक बनाने पर है, जबकि कांग्रेस का फोकस स्थानीय सुविधाओं, सफाई, राहत और निकाय स्तर पर प्रशासन को बेहतर करने पर ज्यादा दिखाई देता है.

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सागर चौधरी, अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं.सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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