टिकट पर पार्टी पॉलिटिक्स में बड़ा ट्विस्ट! चुनाव प्रभारी और रांका के बयान से गरमाई सियासत
Rajasthan News: बीकानेर निकाय चुनाव में महावीर रांका के टिकट को लेकर विवाद गहरा गया है. चुनाव प्रभारी महावीर राज सैनी ने कहा कि रांका फाइनल सूची में थे ही नहीं, जबकि रांका का दावा है कि पार्टी के निर्देश पर उन्होंने नामांकन भरा था. टिकट बदलने से उन्हें दुख हुआ.
Bikaner News: बीकानेर निकाय चुनाव में महावीर रांका के टिकट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी चर्चा का विषय बन गया है. 31 अगस्त को टिकट को लेकर अचानक तस्वीर बदली और रांका की जगह दूसरे प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतार दिया गया. इसके बाद चुनाव प्रभारी महावीर राज सैनी ने पार्टी की ओर से इस मामले पर सफाई दी. अब महावीर रांका भी सामने आए हैं और उन्होंने चुनाव प्रभारी के बयान पर अपनी बात रखी है.
चुनाव प्रभारी बोले- रांका का टिकट काटने का सवाल ही नहीं
चुनाव प्रभारी महावीर राज सैनी ने कहा कि महावीर रांका का टिकट काटने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि फाइनल उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम था ही नहीं. उन्होंने कहा कि पार्टी में टिकट के लिए आवेदन करना हर कार्यकर्ता का अधिकार है. पार्टी आवेदन लेती है और उसके बाद प्रत्याशी तय करती है.
सैनी के मुताबिक पार्टी ने जो फैसला लिया है, उसे सभी कार्यकर्ताओं को स्वीकार करना चाहिए. उन्होंने महावीर रांका को पार्टी का शानदार कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि रांका ने भी पार्टी के फैसले का सम्मान किया है और उनकी ओर से किसी तरह की नाराजगी नहीं है.
महावीर रांका ने बताई अपनी बात
चुनाव प्रभारी के बयान के बाद महावीर रांका ने अपनी स्थिति साफ की. रांका ने बताया कि 30 अगस्त को पार्टी के चुनाव संयोजक का उनके पास फोन आया था. फोन पर उन्हें अगले दिन नामांकन फॉर्म भरने के लिए कहा गया था.
रांका के अनुसार इसके बाद 31 अगस्त को जिला अध्यक्ष की ओर से भी उन्हें फोन आया और नामांकन दाखिल करने की बात कही गई. उनका कहना है कि पार्टी की ओर से मिली सूचना के बाद ही उन्होंने अपना नामांकन फॉर्म भरा था.
बोले- किस आधार पर कहा गया, वही बेहतर बताएंगे
महावीर रांका ने कहा कि चुनाव प्रभारी महावीर राज सैनी किस आधार पर यह बात कह रहे हैं कि उनका नाम फाइनल सूची में नहीं था, यह वही बेहतर बता सकते हैं. रांका ने खुद को करीब 30 साल से पार्टी का सच्चा कार्यकर्ता बताया.
उन्होंने कहा कि वह पार्टी के नियम और प्रक्रिया से अच्छी तरह परिचित हैं. उनका कहना है कि उन्होंने पार्टी की ओर से मिली जानकारी के आधार पर ही नामांकन दाखिल किया था और इसमें उनकी तरफ से कोई अलग फैसला नहीं लिया गया.
पार्टी का फैसला सर्वोपरि, लेकिन दुख जरूर हुआ
रांका ने यह भी साफ किया कि पार्टी का निर्णय उनके लिए सबसे ऊपर है और वह पार्टी के फैसले का सम्मान करते हैं. हालांकि, जब उन्हें पता चला कि पार्टी का सिंबल किसी दूसरे प्रत्याशी को दिया गया है तो उन्हें दुख जरूर हुआ.
उन्होंने कहा कि इतने वर्षों से पार्टी के साथ जुड़े कार्यकर्ता के तौर पर उन्हें उम्मीद थी कि जो निर्देश दिए गए हैं, उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया होगी.
नामांकन वापस लेना था तो पहले बताते
महावीर रांका का कहना है कि अगर पार्टी को उनसे नामांकन वापस करवाना था तो इसकी जानकारी पहले ही दी जा सकती थी. उनका कहना है कि जब पार्टी की ओर से खुद नामांकन भरने के लिए कहा गया, तो उन्होंने उसी निर्देश का पालन किया.
ऐसे में अब इस पूरे मामले में चुनाव प्रभारी और महावीर रांका के बयानों के बीच अंतर साफ नजर आ रहा है. एक तरफ सैनी टिकट कटने की बात से ही इनकार कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर रांका का कहना है कि पार्टी के पदाधिकारियों की सूचना पर ही उन्होंने नामांकन दाखिल किया था.
बयानों ने बढ़ाई सियासी चर्चा
फिलहाल दोनों पक्ष पार्टी के फैसले का सम्मान करने की बात कह रहे हैं. रांका ने भी पार्टी से किसी तरह की खुली नाराजगी जाहिर नहीं की है. लेकिन नामांकन को लेकर सामने आए दोनों अलग-अलग पक्षों ने बीकानेर निकाय चुनाव की सियासत को जरूर गरमा दिया है. अब चर्चा इसी बात की है कि आखिर नामांकन दाखिल करने के लिए रांका को किस स्तर से निर्देश मिले थे और 31 अगस्त को टिकट को लेकर अंतिम फैसला कैसे बदला.