Rajasthan Nikay Chunav 2026 : भरतपुर से भीलवाड़ा तक आधी रात को लग्जरी बसों में शिफ्ट हुए प्रत्याशी, आखिर किस बात का है डर?
Rajasthan Nikay Chunav 2026 : राजस्थान नगर निकाय चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग के बाद अब रिसॉर्ट पॉलिटिक्स यानी की बाड़ेबंदी की खबरें आने लगी है. बोर्ड बनाने के लिए जोड़तोड़ की राजनीति अब और देखने को मिलने वाली है.
Rajasthan Nikay Chunav 2026 : बाड़ेबंदी की खबरों के बीच भरतपुर में नगर निकाय चुनाव के मतदान के बाद बीजेपी खेमे में सक्रियता बढ़ गई है. बीजेपी ने देर रात दो बसों के जरिए अपने विनर और रनरअप उम्मीदवारों को जयपुर शिफ्ट कर दिया. कुल 40 से ज्यादा पार्षद प्रत्याशियों को जयपुर के दिल्ली रोड स्थित होटल रूपनगढ़ पैलेस में ठहराया गया है. बीजेपी के लिए किंग मेकर की भूमिका निभाने वाले स्थानीय नेता कुंवर दीपराज सिंह ने अपने होटल लक्ष्मी विलास से इन सभी पार्षदों को जयपुर के लिए रवाना किया. 14 सितंबर को मतगणना और परिणामों के बाद इन पार्षदों को वापस भरतपुर लाया जाएगा.
भीलवाड़ा में 70 प्रत्याशी लग्जरी बसों से बाहर भेजे गए
बाड़ेबंदी की इस रणनीति में भीलवाड़ा भी अछूता नहीं रहा है. यहां मतदान खत्म होते ही बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की घेराबंदी शुरू कर दी. मतदान के बाद देर रात सभी प्रत्याशियों को जिला भाजपा कार्यालय बुलाया गया. इसके बाद 70 प्रत्याशियों को तीन लग्जरी बसों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया. सुरक्षा के लिहाज से महिला उम्मीदवारों के साथ एक परिजन को ले जाने की विशेष अनुमति दी गई है. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सांसद दामोदर अग्रवाल, पूर्व विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी और बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा मौके पर मौजूद रहे. जोड़-तोड़ से बचने के लिए अधिकांश भाजपा उम्मीदवारों के फोन बंद कर दिए गए हैं.
डूंगरपुर, धौलपुर और बारां में भी किलेबंदी तेज
डूंगरपुर नगरपरिषद चुनाव 2026 के मतदान के तुरंत बाद कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही दलों ने अपने प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी में भेज दिया है. कांग्रेस के 38 और बीजेपी के 40 प्रत्याशी बसों में सवार होकर जिले से बाहर रवाना हो गए. मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस प्रत्याशियों को उदयपुर और बीजेपी प्रत्याशियों को माउंट आबू के पास एक सुरक्षित रिसॉर्ट में ठहराया गया है.
इसी तरह धौलपुर में भी 14 सितंबर को होने वाली मतगणना से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. बोर्ड पर कब्जा जमाने की इस लड़ाई में कोई चूक न हो, इसलिए देर शाम ही प्रत्याशियों को एकत्रित कर अज्ञात सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया, जिससे शहर की चौपालों पर चर्चाओं का बाजार गर्म है. बारां जिले के तीन निकायों में भी मतदान के बाद बाड़ेबंदी शुरू होने की सूचना है, जहां कई उम्मीदवारों के मोबाइल फोन संपर्क से बाहर हो चुके हैं.
सिरोही में आबूरोड, शिवगंज और मण्डार के प्रत्याशी भी सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट
सिरोही में आबूरोड, शिवगंज और मण्डार नगरपालिकाओं में पहले चरण की वोटिंग के बाद राजनीतिक दलों में गहमागहमी और तेज हो गई है. बीजेपी और कांग्रेस ने अपने-लेए अधिकृत प्रत्याशियों के साथ-साथ बाजी पलटने की क्षमता रखने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों की भी बाड़ेबंदी शुरू कर दी है. जीत के समीकरणों को साधने और बोर्ड गठन के गणित को पक्का करने के लिए राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने अंदरखाने जोड़-तोड़ और संपर्कों का दौर तेज कर दिया है
बीजेपी प्रदेश महामंत्री ने कहा- बाड़ेबंदी कांग्रेस की संस्कृति
जयपुर में पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीजेपी प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने कहा कि 'बाड़ेबंदी' कांग्रेस की संस्कृति है और कांग्रेस का काम हमेशा से विधायकों-प्रत्याशियों को घेरना रहा है, जबकि बीजेपी के कार्यकर्ता पूरी तरह प्रशिक्षित हैं. उन्होंने दावा किया कि पार्टी टिकट वितरण के समय ही पूरी समीक्षा करती है और पहले चरण के मतदान वाले निकायों में बीजेपी के बोर्ड बनने के स्पष्ट रुझान सामने आ रहे हैं, वहीं कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि जमीन खिसक चुकी कांग्रेस का काम सिर्फ बेबुनियाद आरोप लगाना है.
बांसवाड़ा में कांग्रेस की बाड़ेबंदी, 59 प्रत्याशी बसों से रवाना
बांसवाड़ा नगर परिषद चुनाव के मतदान संपन्न होने के बाद अब कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है. चुनाव में मैदान में उतरे कांग्रेस के 59 प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए पार्टी ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेजा है. सभी प्रत्याशी कांग्रेस जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह बामनिया के फार्म हाउस पर एकत्रित हुए. इसके बाद सभी प्रत्याशी बस में सवार होकर एक साथ रवाना हुए. पार्टी नेताओं को आशंका है कि मतगणना और बोर्ड गठन से पहले विरोधी दल कांग्रेस प्रत्याशियों में सेंधमारी कर सकते हैं. इसी को देखते हुए जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह बामनिया के नेतृत्व में प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी की गई है. बसों में सवार होकर रवाना होते कांग्रेस प्रत्याशियों का वीडियो भी सामने आया है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह बामनिया ने दावा किया कि हमारा बोर्ड बन रहा है. अब चुनाव परिणाम और बोर्ड गठन को लेकर दोनों प्रमुख दलों में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं.
झुंझुनूं में भाजपा ने शुरू की प्रत्याशियों की निगरानी
नगर परिषद चुनाव के बाद अब अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. झुंझुनूं नगर परिषद के भाजपा प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी की गई है. गुरुवार को भाजपा के सभी प्रत्याशियों को एक बस में बैठाकर एक साथ रवाना किया गया. बताया जा रहा है कि चुनाव परिणाम आने से पहले पार्टी की ओर से अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. सभी प्रत्याशियों को एक स्थान पर रखा जाएगा. हालांकि, प्रत्याशियों को कहां ले जाया गया है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. नगर परिषद झुंझुनूं में अध्यक्ष पद को लेकर चुनावी गणित महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ऐसे में मतदान के बाद से ही राजनीतिक दल अपने-अपने प्रत्याशियों के संपर्क में हैं. भाजपा प्रत्याशियों की एक साथ बाड़ाबंदी को भी इसी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. गुरुवार को सभी भाजपा प्रत्याशी एक बस में सवार होकर रवाना हुए. इस दौरान पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. प्रत्याशियों को एकजुट रखने और किसी भी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचने के लिए पार्टी स्तर पर पूरी निगरानी रखे जाने की चर्चा है. अब निगाहें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं. परिणाम सामने आने के बाद नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए होने वाली राजनीतिक कवायद और तेज होने की संभावना है.
नीमकाथाना में भाजपा-कांग्रेस की बाड़ाबंदी तेज
सीकर जिले के नीमकाथाना में नगर निकाय चुनाव में मतदान संपन्न होने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में सियासी हलचल तेज हो गई है. चुनाव परिणाम से पहले अपने-अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए दोनों प्रमुख दलों ने बाड़ाबंदी शुरू कर दी है. भाजपा की ओर से पहले ही अपने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेजा गया था. इसके बाद आज कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी की. कांग्रेस के प्रत्याशियों को विधायक आवास पर एकत्रित किया गया, जहां से उन्हें गाड़ियों के जरिए सुरक्षित स्थान के लिए रवाना किया गया. बाड़ाबंदी के पीछे मुख्य उद्देश्य चुनाव परिणाम के बाद बोर्ड बनाने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े को सुरक्षित रखना माना जा रहा है. 40 वार्डों वाली नीमकाथाना नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है. वहीं, कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मुकाबले को रोचक बनाया है. मतदान के बाद अब दोनों ही दल अपने-अपने स्तर पर सीटों का गणित लगाने में जुटे हैं. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही नगर निकाय में अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रहे हैं. ऐसे में प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी ने चुनावी चर्चाओं को और तेज कर दिया है.
क्या दलबदल विरोधी कानून और ये निकाय चुनावों पर क्यों लागू नहीं होता ?
राजनीति में अक्सर ये सवाल उठता है कि जब सांसद या विधायक चुनाव जीतने के बाद पाला बदलते हैं तो उन पर दलबदल कानून लागू होता है, लेकिन पार्षद या निकाय चुनावों में ये सख्ती क्यों नहीं दिखाई देती ? दरअसल दलबदल कानून को भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची में जोड़ा गया है, जिसे 1985 में 52वें संशोधन के जरिए लागू किया गया था. ये कानून संसद और विधानसभा सदस्यों पर सख्ती से लागू होता है. इसके तहत अगर कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपनी मर्जी से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या पार्टी के व्हिपके खिलाफ सदन में वोटिंग करता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है. लेकिन संविधान की 10वीं अनुसूची के दायरे में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका जैसी स्थानीय निकाय संस्थाएं प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हैं. क्योंकि स्थानीय निकाय पूरी तरह से राज्य सूची का विषय हैं. इसलिए, पार्षदों पर दलबदल कानून लागू होगा या नहीं, ये पूरी तरह से संबंधित राज्य सरकार के कानूनों और नगर पालिका अधिनियम पर निर्भर करता है.