Shri Sanwariya Seth Ji Mandir: चित्तौड़गढ़ के मंडफिया गांव में स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर में देश ही नहीं, विदेशों से भी भक्तों की आस्था पहुंच रही है. मंदिर के भंडार में पिछले आठ महीनों के दौरान 60 देशों की अलग-अलग मुद्राएं मिली हैं. इनमें अमरीका, यूएई, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों की करेंसी शामिल है. इस साल अब तक सबसे ज्यादा 45,351 अमरीकी डॉलर मिले हैं. सभी विदेशी मुद्राओं को डॉलर में बदलकर इनकी कीमत करीब 62,800 डॉलर आंकी गई है, जो मौजूदा विनिमय दर के हिसाब से भारतीय रुपए में करीब 59 लाख रुपए बैठती है.
60 देशों की करेंसी मंदिर के भंडार में पहुंची
श्री सांवरिया सेठ मंदिर के भंडार में मिली विदेशी मुद्रा की लिस्ट काफी लंबी है. पिछले आठ महीनों में करीब 60 देशों की करेंसी यहां पहुंची है. इसमें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों की मुद्रा शामिल है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सांवरिया सेठ के भक्त सिर्फ राजस्थान या देश के दूसरे हिस्सों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विदेशों में रहने वाले लोग भी मंदिर से जुड़े हुए हैं. विदेशी मुद्रा में सबसे ज्यादा 45,351 अमरीकी डॉलर मिले हैं. इसके अलावा 21,485 यूएई दिरहम, 1,310.25 कुवैती दिनार, 1,367 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और 1,630 कनाडाई डॉलर भी मंदिर के भंडार में मिले हैं.
अप्रैल में एक साथ मिले 21 हजार डॉलर
मंदिर में विदेशी मुद्रा मिलने का सिलसिला अलग-अलग समय पर चलता रहा है. 16 अप्रैल को हुई गणना के दौरान एक ही बार में 21,127 अमरीकी डॉलर मिले थे. इसके बाद 11 अगस्त की गणना में 8,955 यूएई दिरहम मिले. फरवरी और मार्च में भी विदेशी करेंसी मंदिर के भंडार में पहुंची थी. इस दौरान ईरान के 4,63,500 रियाल और वियतनाम के 2,29,000 डोंग मिले. यानी अलग-अलग देशों से आने वाले भक्त अपनी-अपनी करेंसी के जरिए भी सांवरिया सेठ के दरबार में चढ़ावा दे रहे हैं.
मुस्लिम देशों की करेंसी भी चढ़ावे में शामिल
श्री सांवरिया सेठ के भंडार में मुस्लिम बहुल देशों की मुद्राएं भी मिली हैं. पिछले आठ महीने के आंकड़ों के मुताबिक यूएई के 21,485 दिरहम मंदिर में आए हैं. वहीं ईरान से 4,68,500 रियाल और इंडोनेशिया से 1,63,000 रुपया प्राप्त हुए हैं.
इसके अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की मुद्राएं भी भंडार में मिली हैं. खाड़ी देशों की बात करें तो कुवैत, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन और कतर की करेंसी भी मंदिर में पहुंची है. इससे साफ है कि सांवरिया सेठ के प्रति लोगों की आस्था अलग-अलग देशों और समुदायों तक फैली हुई है.

59 लाख रुपए के करीब है विदेशी मुद्रा की कीमत
मंदिर के भंडार में मिली सभी विदेशी मुद्राओं को अमरीकी डॉलर में परिवर्तित करने पर इनकी कुल कीमत करीब 62,800 डॉलर आंकी गई है. मौजूदा विनिमय दर के हिसाब से भारतीय रुपए में इसकी कीमत करीब 59 लाख रुपए है. यह रकम सिर्फ विदेशी मुद्रा की है. मंदिर में देश की करेंसी और दूसरी तरह का चढ़ावा भी आता है. ऐसे में विदेशी मुद्रा का यह आंकड़ा मंदिर में आने वाले कुल चढ़ावे का केवल एक हिस्सा है.
अधिकृत बैंकों के जरिए बदली जाती है विदेशी करेंसी
मंदिर मंडल विदेशी नोटों को सीधे इस्तेमाल नहीं करता. मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिनेश चंद्र धाकड़ के मुताबिक, मंदिर मंडल इन नोटों को भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई से अधिकृत बैंकों के जरिए भारतीय रुपए में बदलवाता है. विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपए में बदलने के बाद प्राप्त राशि का इस्तेमाल मंदिर के भंडारे और सामाजिक-धार्मिक सेवा से जुड़े कामों में किया जाता है. यानी विदेश से आया चढ़ावा भी मंदिर की सेवा और दूसरे जनहित के कामों में लगाया जाता है.
व्यापारी सांवरिया सेठ को मानते हैं अपना बिजनेस पार्टनर
श्री सांवरिया सेठ मंदिर की पहचान सिर्फ एक धार्मिक स्थल के तौर पर नहीं है. यहां बड़ी संख्या में व्यापारी भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि कई व्यापारी भगवान सांवरिया सेठ को अपने बिजनेस पार्टनर के रूप में मानते हैं. लोग अपने कारोबार से होने वाले मुनाफे में से एक हिस्सा भगवान के नाम पर निकालकर मंदिर में चढ़ाते हैं. इसी आस्था के कारण मंदिर में नियमित रूप से बड़ी मात्रा में चढ़ावा पहुंचता है. देश-विदेश से आने वाली विदेशी करेंसी भी इसी आस्था और मंदिर से जुड़े भक्तों के व्यापक नेटवर्क की एक झलक दिखाती है.