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Jaipur News: राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जजेज के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बनाए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि साथी जजों के संबंध में कोई भी टिप्पणी करने या किसी अन्य हाईकोर्ट के कामकाज से जुड़े मामलों में जजों के आचरण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए. अब समय आ गया कि ऐसी एसओपी बनाई जाए. इसका उद्देश्य न्यायिक अनुशासन बनाए रखना और ऐसी किसी कार्रवाई को मिसाल बनने से रोकना होना चाहिए, जिससे कि भविष्य में हाईकोर्ट के कामकाज में दखल के हालात पैदा नहीं हो.
उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए कि जो उनके साथ जो हुआ, वह दोबारा नहीं होना चाहिए. वरना अगली बार कोई सुप्रीम कोर्ट जज अपने गृह राज्य के हाईकोर्ट के मामलों और उसके कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है. पूर्व एसीजे एसपी शर्मा ने यह बात गुरुवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत में कही. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान बना रहे. लोगों का न्यायपालिका में विश्वास इस तरह कमजोर नहीं होना चाहिए. उन्होंने जज या वकील के जाति आधारित रवैये पर चिंता जताते हुए कहा कि यह देखकर दुख होता है कि कोई जज या वकील जाति आधारित रवैया अपनाए.
सुप्रीम कोर्ट जज की मानसिकता के नहीं हो सकते ऐसे आरोप
पूर्व एसीजे शर्मा ने उन पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर कहा कि उस समय उन्हें निजी तौर पर बहुत पीड़ा हुई थी. उन पर जो आरोप लगाए हैं उन्हें देखकर नहीं लगता कि वे किसी सुप्रीम कोर्ट जज की मानसिकता वाले व्यक्ति ने लगाए हैं, बल्कि आम आदमी के लगाए हुए दिखाई देते हैं. इस पूरे घटनाक्रम से उनकी छवि के साथ ही न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने खुद के सभी जवाब रिकॉर्ड पर रख दिए हैं और जस्टिस मेहता के साथ में उन पर लगाए गए आरोपों पर क्रॉस एग्जामिनेशन करने की भी मांग की है. उन्होंने बताया की वे अपना जवाब सीजेआई को भेज चुके हैं और अब उनके जवाब आने का इंतजार है.
सीजे के कॉलेजियम के समय सोच समझकर हुआ वकीलों का विरोध
पूर्व एसीजे शर्मा ने कहा कि जब हाईकोर्ट सीजे की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम होने वाला था तो उसी समय जोधपुर के वकीलों ने विरोध किया. यह सब कुछ सोच समझकर किया गया था. जस्टिस मेहता के उन पर लगाए गए आरोप केस आधार पर लगाए गए थे, लेकिन न्यायिक गरिमा में इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते. वहीं उन्होंने न्यायिक अधिकारियों के किए गए ट्रांसफरों के संबंध में लगाए गए आरोपों को भी निराधार बताया. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से पूर्व एसीजे शर्मा के खिलाफ पद के दुरुपयोग के आरोप और उनकी कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए सीजेआई को चार पत्र लिखे थे. जस्टिस शर्मा ने उन पर जस्टिस मेहता के लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उन्हें रंजिशवश लगाना बताया था.