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Hanumangarh News: हनुमानगढ़ में कथित फर्जी पट्टा मामले में गिरफ्तार निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को शुक्रवार को कोर्ट से राहत नहीं मिली. चार दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद सीआईडी-सीबी ने उन्हें हनुमानगढ़ की सीजेएम कोर्ट में पेश किया. जांच एजेंसी ने विधायक से आगे पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने मांग को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने गणेशराज बंसल को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए. वहीं, विधायक के वकील की ओर से लगाई गई जमानत अर्जी भी कोर्ट ने खारिज कर दी.
23 साल पुराने पट्टा मामले में गिरफ्तारी
यह पूरा मामला साल 2003 में हनुमानगढ़ नगर परिषद की ओर से जारी किए गए कथित पट्टों और जमीन से जुड़े विवाद से जुड़ा है. इस मामले में विधायक गणेशराज बंसल, उनकी पत्नी और नगर परिषद से जुड़े कुछ अन्य लोगों के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी. इसी मामले की जांच के दौरान सीआईडी-सीबी ने विधायक को गिरफ्तार किया था.
20 सितंबर को हिरासत में लिया था
गणेशराज बंसल को 20 सितंबर को सीआईडी-सीबी और स्पेशल क्राइम ब्रांच की टीम ने बीकानेर जाते समय हिरासत में लिया था. इसके बाद उनसे पूछताछ की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद विधायक को कोर्ट में पेश किया गया, जहां जांच के लिए पुलिस को रिमांड मिली थी. 21 सितंबर को अदालत ने गणेशराज बंसल को 25 सितंबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा था.
चार दिन की रिमांड के बाद कोर्ट में पेशी
रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद शुक्रवार को विधायक को हनुमानगढ़ की सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया. सीआईडी-सीबी ने कोर्ट से एक बार फिर विधायक को रिमांड पर देने की मांग की, ताकि मामले में आगे पूछताछ की जा सके. हालांकि, कोर्ट ने जांच एजेंसी की यह मांग मंजूर नहीं की और गणेशराज बंसल को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया.
वकील ने लगाई जमानत अर्जी
कोर्ट में सुनवाई के दौरान विधायक के अधिवक्ता की ओर से जमानत के लिए अर्जी भी पेश की गई. हालांकि, कोर्ट ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया. ऐसे में अब विधायक को जेल में रहना होगा. मामले की जांच आगे भी सीआईडी-सीबी की ओर से जारी रहेगी.
सभापति चुनाव के बीच गिरफ्तारी से बढ़ा मामला
गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी हनुमानगढ़ नगर परिषद में सभापति पद के चुनाव के बीच हुई थी. विधायक समर्थित निर्दलीय पार्षदों की संख्या काफी होने के कारण स्थानीय निकाय के समीकरणों में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही थी. विधायक की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों और निर्दलीय पार्षदों की ओर से विरोध भी जताया गया.
दूसरे केस में हाईकोर्ट से मिली थी अंतरिम राहत
गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी के दौरान उनके खिलाफ दर्ज एक अन्य एफआईआर भी चर्चा में रही. विधायक ने अपनी पत्नी संतोष बंसल और बेटी वंदना जैन के साथ राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था. हाईकोर्ट ने तीनों के खिलाफ दर्ज अलग-अलग एफआईआर में गिरफ्तारी और दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई थी. साथ ही कोर्ट ने विस्तृत आदेश सुरक्षित रखा था.
हाईकोर्ट की राहत इस मामले से अलग
विधायक के खिलाफ एफआईआर संख्या 625 में कथित धोखाधड़ी के आरोप बताए गए थे. याचिका में कहा गया था कि संबंधित घटनाक्रम साल 2003 का है, जबकि एफआईआर साल 2026 में दर्ज की गई. हालांकि, हाईकोर्ट की यह अंतरिम राहत मौजूदा 23 साल पुराने पट्टा मामले में हुई कार्रवाई से अलग है. जिस मामले में सीआईडी-सीबी ने विधायक को गिरफ्तार कर रिमांड लिया था, उसी की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया.
विधायक को अब जेल में रहना होगा
सीआईडी-सीबी ने आगे पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे मंजूर नहीं किया. इसके बाद विधायक गणेशराज बंसल को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया. फिलहाल वह जेल में रहेंगे. मामले की जांच सीआईडी-सीबी कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच की स्थिति और कोर्ट के आदेश के अनुसार होगी.