Kota News: राजस्थान के कोटा को आमतौर पर कोचिंग और छात्रों के शहर के तौर पर जाना जाता है, लेकिन यहां एक ऐसी जगह भी है, जिसने मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा का ध्यान खींचा है. महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कोटा के हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट की खूबसूरती की तारीफ की है. सोशल मीडिया पर तस्वीरें देखने के बाद उन्होंने इसे अपनी ‘वंडरर लिस्ट’ में शामिल किया और यहां आने की इच्छा जताई.
तस्वीर देखकर आनंद महिंद्रा भी रह गए हैरान
आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चंबल रिवर फ्रंट की तस्वीरें देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बताया कि पहली नजर में उन्हें लगा कि तस्वीरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से बनाई गई हैं. जब उन्होंने ध्यान से देखा और पता चला कि तस्वीरें असली हैं, तो वे हैरान रह गए. उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या यह जगह असल में भी तस्वीरों जितनी ही खूबसूरत है.
धारीवाल और आर्किटेक्ट के विजन की तारीफ
आनंद महिंद्रा ने कहा कि कोटा के चंबल हेरिटेज रिवर फ्रंट को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी ज्यादा पहचान मिलनी चाहिए. उन्होंने पूर्व यूडीएच मंत्री और कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल, कोटा विकास प्राधिकरण और आर्किटेक्ट अनूप भरतरिया के विजन और काम की सराहना की. साथ ही लोगों से रिवर फ्रंट की वास्तविक तस्वीरें साझा करने की अपील की.
कोटा की पहचान सिर्फ कोचिंग सिटी तक सीमित नहीं
आनंद महिंद्रा ने कोटा की पहचान को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि कोटा का नाम सुनते ही आमतौर पर कोचिंग, छात्रों पर पढ़ाई का दबाव और दुखद घटनाएं याद आती हैं. लेकिन शहर में इतना शानदार पर्यटन स्थल भी है, इसकी जानकारी उन्हें पहले नहीं थी. रिवर फ्रंट की तस्वीरों ने उन्हें कोटा की एक अलग तस्वीर दिखाई है.
1450 करोड़ से ज्यादा में तैयार हुआ रिवर फ्रंट
चंबल रिवर फ्रंट को तैयार करने में 1450 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आई है. इसका उद्घाटन सितंबर 2023 में किया गया था. यह चंबल नदी के दोनों किनारों पर करीब 6 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां 27 घाट और 100 से ज्यादा कलाकृतियां व स्मारक बनाए गए हैं.
राजस्थान के अलग-अलग अंचलों की संस्कृति की झलक
रिवर फ्रंट पर राजस्थान के नौ अलग-अलग अंचलों की संस्कृति और स्थापत्य कला को जगह दी गई है. यहां चंबल माता की 62 मीटर ऊंची एकश्म संगमरमर की प्रतिमा भी आकर्षण का बड़ा केंद्र है. इसके अलावा दुनिया का सबसे बड़ा नंदी भी यहां बनाया गया है. यही वजह है कि यह जगह वास्तुकला और पर्यटन दोनों के लिहाज से खास मानी जाती है.
रिवर फ्रंट को लेकर सियासी बहस भी जारी
रिवर फ्रंट की खूबसूरती के बीच यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या को लेकर राजनीतिक बहस भी चलती रही है. यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा इसे कई बार ‘सफेद हाथी’ बता चुके हैं. उनका कहना है कि रखरखाव और दूसरी व्यवस्थाओं पर कोटा विकास प्राधिकरण को हर महीने करीब 2 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि इससे होने वाली कमाई बहुत कम है.
वहीं पूर्व मंत्री शांति धारीवाल का आरोप है कि मौजूदा सरकार ने रिवर फ्रंट के प्रचार-प्रसार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. उनका कहना है कि स्वीकृत बजट के अनुसार प्रचार किया जाता तो यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच सकते थे.
होटल और टेंट सिटी जैसी सुविधाएं अब भी अधूरी
रिवर फ्रंट पर होटल, बोटिंग और टेंट सिटी जैसी व्यावसायिक सुविधाएं विकसित करने की योजना थी, लेकिन ये सुविधाएं अभी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई हैं. ऐसे में आनंद महिंद्रा की तारीफ ने एक बार फिर कोटा के इस पर्यटन स्थल को चर्चा में ला दिया है. सवाल यही है कि इतनी खास खूबसूरती और आकर्षण होने के बावजूद चंबल रिवर फ्रंट को देश और दुनिया में वैसी पहचान कब मिलेगी, जिसकी उम्मीद की जा रही है.