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Explainer: लम्पी वायरस से कैसे बचाएं पशुओं को? लक्षण, संक्रमण, इलाज और टीकाकरण की पूरी जानकारी

राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज का दायरा बढ़ रहा है. डीग और भरतपुर के बाद अलवर और दौसा में भी गौवंश में केस सामने आए हैं. भरतपुर में 2,593 और डीग में 3,682 केस दर्ज हो चुके हैं, जबकि अलवर के रेणी में 1 और दौसा के महवा में 13 केस मिले हैं. संक्रमण को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए हैं. पशु हाट और मेलों पर रोक लगाई गई है और प्रभावित जिलों में स्टाफ के अवकाश रद्द कर दिए गए हैं.

Explainer: लम्पी वायरस से कैसे बचाएं पशुओं को? लक्षण, संक्रमण, इलाज और टीकाकरण की पूरी जानकारी
Image Credit: लम्पी स्किन डिजीज

Rajasthan News: राज्य के डीग जिले से शुरू हुआ लम्पी स्किन डिजीज का प्रभाव अन्य जिलों में भी बढ़ रहा है. डीग-भरतपुर के बाद अब अलवर जिले में भी गौवंश में लम्पी स्किन डिजीज के कुछ केस सामने आए हैं. वहीं, पशुपालन विभाग ने अब माइन्यूट लेवल पर इस बीमारी से बचाव की तैयारी तेज कर दी है. लम्पी स्किन डिजीज रोग की रोकथाम, नियंत्रण और बचाव के लिए पशुपालन विभाग ने अब अधिक सतर्कता दिखाई है.

गौवंश में बढ़ते लम्पी केसेज को देखते हुए पशुपालन विभाग ने धरातल पर केसेज की नियमित मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम बना दिए हैं. एक तरफ जहां भरतपुर जिला मुख्यालय पर जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष बनाया गया है. यह कंट्रोल रूम पॉलीक्लीनिक पशु चिकित्सा भरतपुर में कार्य करेगा. वहीं प्रत्येक तहसील और ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक स्तरीय कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं. इन कंट्रोल रूम पर किसान-पशुपालक अपने बीमार पशुओं की सूचना दे सकेंगे.

कंट्रोल रूम में मिलने वाली सूचना सम्बंधित ब्लॉक में भेजी जाएगी. इसके बाद विभागीय पशु चिकित्सकों की टीम पशुओं के उपचार के लिए पहुंचेगी. पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे पशु में बीमारी के लक्षण दिखने पर उसे अन्य पशुओं से आईसोलेट करें. साथ ही 1962 मोबाइल वेटरनरी यूनिट को सूचना देकर भी चिकित्सकीय मदद हासिल कर सकते हैं. साथ ही तहसील यानी ब्लॉक स्तर के कंट्रोल रूम में सूचना देकर भी बीमार पशु को लेकर चिकित्सकीय मदद मांग सकते हैं.

भरतपुर-डीग में बनाए कंट्रोल रूम
जिला स्तरीय कंट्रोल रूम के फोन नम्बर 05644-224375, 9414207820
भरतपुर शहर के लिए डॉ. राजीव सिंघल 9414207820 नोडल अधिकारी
सेवर के लिए डॉ. प्रद्युम्नपाल सिंह 9001362578 नोडल अधिकारी
कुम्हेर के लिए डॉ. राजपाल सिंह 9221647200 नोडल अधिकारी
डीग के लिए डॉ. भावना यादव 9411027566 नोडल अधिकारी
कामां- डॉ. नीरज गुप्ता- 9950651031, पहाड़ी- डॉ सलीम खान- 9784874285
नगर डॉ. नत्थीराम मीना- 9461404506, नदबई डॉ राजेश चौधरी- 9414711405
वैर डॉ. मुकेशचंद मीना-9664138629, भुसावर डॉ हरिओम शर्मा-9929155504  
बयाना डॉ. गिरीश गोयल- 9784992204, रूपवास डॉ हितेश वशिष्ठ 8949033792
उच्चैन डॉ. अभिषेक कैन - 9079960430 हैं नोडल अधिकारी

कलक्टरों को अलर्ट रहने के निर्देश
पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव विकास एस भाले भी इस बीमारी के नियंत्रण को लेकर सख्त नजर आ रहे हैं. पिछले सप्ताह उन्होंने सभी जिला कलक्टरों को पत्र लिखकर बीमारी से बचाव की दिशा में एकजुटता से कार्य करने के निर्देश दिए थे. पशुपालन विभाग बीमारी से प्रभावित जिलों में चिकित्सकीय और तकनीकी स्टाफ के अवकाश रद्द कर चुका है.

वहीं, अब संबंधित जिलों में पशुओं के मेले और हाट के आयोजन को लेकर भी रोक लगा दी गई है. पशुपालन विभाग ने भरतपुर में प्रत्येक सोमवार को लगाए जाने वाले साप्ताहिक पशु हाट पर रोक लगा दी है. चूंकि यह बीमारी पशुओं के आपसी संक्रमण से बढ़ती है, इसी वजह से पशु हाट और मेलों पर रोक लगाई गई है. पशुपालन निदेशालय स्तर से भी बीमारी से बचाव को लेकर नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है. हालांकि अलवर में केस सामने आने के बाद विभाग की चिंता बढ़ी है और अब अन्य नजदीकी जिलों में भी मॉनिटरिंग बढ़ाई जा रही है.

लम्पी स्किन डिजीज के कहां कितने केस ?
भरतपुर में अब तक 2593 केस, 3 पशुओं की मौत
डीग में अब तक 3682 केस, 1 पशु की मौत
रेणी, अलवर में 1 केस, कोई मौत नहीं
महवा, दौसा में 13 केस, कोई मौत नहीं


लम्पी स्किन डिजीज के क्या हैं कारण ?
लम्पी स्किन डिजीज गायों में होने वाली एक संक्रामक वायरल बीमारी है. यह बीमारी पशुओं की त्वचा को प्रभावित करती है. समय पर उपचार नहीं होने से यह जानलेवा साबित हो सकती है. दरअसल यह बीमारी कैप्रीपॉक्स नामक वायरस के कारण होती है, जो पॉक्स वायरिडी फैमिली परिवार से संबंधित है. इसका संक्रमण मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु तक फैलता है. संक्रमित पशु के संपर्क, दूषित उपकरणों और आसपास के वातावरण से भी संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ सकता है इसलिए पशुओं की साफ-सफाई और कीट नियंत्रण करना जरूरी है.


क्या हैं बीमारी के प्रमुख लक्षण ?
इस बीमारी में पशु को अचानक तेज बुखार हो सकता है. इसके बाद शरीर, सिर, गर्दन, पेट और पैरों सहित विभिन्न हिस्सों की त्वचा पर गोल, कठोर और उभरी हुई गांठें दिखाई देने लगती हैं. इन गांठों का आकार अलग-अलग हो सकता है और गंभीर स्थिति में इनमें घाव या पपड़ी बन सकती है. संक्रमित पशु की आंख और नाक से पानी या स्राव, मुंह से अधिक लार आना, कमजोरी और सुस्ती जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. बीमारी के कारण पशु का खाना-पीना कम हो जाता है और दूध उत्पादन में अचानक गिरावट आ सकती है. गंभीर मामलों में पशु को चलने-फिरने में भी परेशानी हो सकती है.


क्या है उपचार, टीकाकरण कितना ?
लम्पी स्किन डिजीज के लिए टीके उपलब्ध हैं, साथ ही पशु चिकित्सकों द्वारा केन्द्र सरकार के प्राेटोकॉल के तहत विभिन्न दवाइयों के जरिए उपचार किया जाता है. बीमारी के दौरान पशुओं की उचित देखभाल जरूरी है. पशु को पर्याप्त पानी, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला चारा और आराम देना चाहिए. त्वचा के घावों की साफ-सफाई और उचित देखभाल जरूरी है. दर्द या बुखार कम करने वाली दवाएं और अन्य उपचार पशु चिकित्सक की सलाह से दिए जाने चाहिए.

बैक्टीरियल संक्रमण होने पर ही उचित एंटीबायोटिक उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है. पशुपालन विभाग द्वारा प्रदेशभर में 1 करोड़ 11 लाख गौवंश को टीकाकरण भी किया जा रहा है. अब तक भरतपुर जिले में 1.04 लाख गौवंश में से 72781 गौवंश को टीके लगाए जा चुके हैं. इसी तरह डीग जिले में 84,760 गौवंश में से 66,100 गौवंश को लम्पी स्किन डिजीज से बचाव के टीके लगाए जा चुके हैं.

 

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About the Author

Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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