राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) की योजनाएं वित्तीय संकट के चलते प्रभावित हो रही हैं. सरकार ने करोड़ों रुपये के पेयजल प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बनाए रखने के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट (SD) में छूट दी थी, लेकिन जलदाय विभाग की ओर से अब तक इस संबंध में आदेश जारी नहीं किए गए हैं. इसके चलते जल जीवन मिशन की करीब 90 प्रतिशत योजनाओं पर असर पड़ने की बात सामने आई है. इससे गांवों और ढाणियों तक पेयजल पहुंचाने वाले प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी पड़ गई है.
जल जीवन मिशन में जिस वित्तीय संकट से उभरने के लिए छूट दी. वो भी अटक गई. दरअसल JJM में वित्तीय संकट पर मरहम लगाने के लिए वित्त विभाग ने सिक्योरिटी डिपॉजिट पर छूट दी थी, ताकि पेयजल प्रोजेक्ट की रफ्तार बनी रहे. लेकिन जल जीवन मिशन की ये छूट भी अटक गई. जिस कारण 26 हजार करोड़ के पेयजल प्रोजेक्ट्स में 10 प्रतिशत सिक्योरिटी डिपॉजिट रुका हुआ है. वित्त विभाग ने 1 अक्टूबर को सिक्योरिटी डिपॉजिट जारी करने के आदेश दिए थे, लेकिन PHED ने अब तक छूट का कोई आदेश ही नहीं निकाला. इससे JJM के 90 प्रतिशत प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो रहे हैं. ये छूट चालू वित्तीय वर्ष के लिए दी गई है. जानकारों के मुताबिक 2600 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट अटका है.
टेंडर में सिक्योरिटी डिपॉजिट (SD) वह गारंटी राशि होती है, जो रनिंग बिल में कंपनी या फर्मो द्वारा जमा करवाई जाती है. विभाग द्वारा यह इसलिए ली जाती है, ताकि फर्म समय पर और अच्छी गुणवत्ता के साथ काम पूरा करें. अगर काम अधूरा छोड़ दिया जाता है या तय मानकों के अनुसार नहीं होता है, तो हर्जाना वसूलने के लिए इस राशि का उपयोग किया जाता है. PHED में रनिंग बिल के साथ 10 प्रतिशत SD ली जाती है. आमतौर पर SD वर्क कम्पलीशन के 1 साल बाद लौटाई जाती है, लेकिन वित्तीय संकट के बीच पीएचईडी में पहले ही लौटाने की छूट दी गई है.
SD छूट के अलावा पीएचईडी में टैक्स यानी जीएसटी, पेनल्टी और प्राइस वेरीएशन का पेंच भी फंसा हुआ है. प्राइस वेरिएएशन (PV)- दुनिया में फाइनेंस क्राइसिस के कारण स्टील समेत कई वस्तुएं महंगी हो गईं. अनुबंध करते समय और मौजूदा रेट्स में फर्क पडा. जिस कारण मैटेरियल की लागत बढी. जिन टेंडरों में पीवी की शर्त है, उनका पेमेंट का विवाद फंसा हुआ है. इसके अनुमानित आकंडे़ सामने नहीं आए.
10 जुलाई 2022 के बाद वर्क कॉन्ट्रैक्ट पर GST की दर 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई. ऐसे में ठेकेदारों पर 6 प्रतिशत अतिरिक्त GST का भार पड़ा. नियमों के मुताबिक, क्लॉज 36E के तहत अनुबंध के समय लागू GST दर के आधार पर भुगतान का प्रावधान है. इसके बावजूद अतिरिक्त GST के भुगतान को लेकर विवाद बना हुआ है. अब करीब 1100 करोड़ रुपये के GST भुगतान को लेकर मामला अटका हुआ है.
अनुबंध की शर्तों के मुताबिक, यदि कोई कॉन्ट्रैक्टर तय समय पर काम पूरा नहीं करता है, तो उस पर लेट डिलीवरी के लिए पेनल्टी लगाई जाती है. हालांकि, जल विभाग में वित्तीय संकट और बजट की कमी के कारण कई कॉन्ट्रैक्टर समय पर काम पूरा नहीं कर पाए. ऐसे में विभिन्न प्रोजेक्ट्स में फर्मों पर करीब 1500 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई है, जिसे लेकर विवाद बना हुआ है. वहीं करीब 5200 करोड़ रुपये की छूट और टैक्स से जुड़े मामलों को लेकर भी पेयजल प्रोजेक्ट्स में विवाद चल रहा है. इन विवादों और भुगतान में देरी के कारण जल विभाग की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.