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बाड़मेर में हजारों परिवारों की आजीविका गाय, भेड़, बकरी और ऊंट जैसे पशुओं पर निर्भर है. एक पशु की मौत पशुपालक की सालों की पूंजी को खत्म कर देती है. 20 से ज्यादा गांवों में गोवंश की मौत हो रही है.पशुपालकों का कहना है कि चारा तीन गुना महंगा मिल रहा है. पशु कुंड सूखे हैं, गोवंश प्लास्टिक और कचरा खा रहे हैं.

चारें की कीमत तीन गुना
गडरा रोड क्षेत्र के 20 से ज्यादा गांवों में पशुओं की मौत की खबरें सामने आई हैं. चारे की कीमतें तीन गुना तक बढ़ने और पानी के अभाव में पशुपालक बेबस हैं. हालात ऐसे हैं कि कई जगह पशु प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर बताए जा रहे हैं.
मई में देरासर गांव की रामदियों की बस्ती में पानी की कमी के चलते 10 से अधिक गायों की मौत का मामला सामने आया था. उस दौरान तापमान 48 डिग्री के पार पहुंच गया था. यानी पानी का संकट महीनों से बना हुआ है, लेकिन स्थायी समाधान अब भी चुनौती है.
अक्टूबर में गडरा रोड क्षेत्र के 23 पटवार मंडलों में पशु राहत शिविर और चारा डिपो खोलने की मांग उठी थी. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पश्चिमी राजस्थान में अकाल की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल राहत की मांग की थी. रिपोर्टों में चारा डिपो और पशु शिविर शुरू होने में देरी का मुद्दा भी सामने आया.
4 नवंबर को सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और बायतु विधायक हरीश चौधरी ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर हालात पर चिंता जताई. दोनों जनप्रतिनिधियों ने प्रभावित क्षेत्रों में पशु राहत शिविर, चारा डिपो, टैंकरों से पेयजल आपूर्ति और अकाल राहत कार्य शुरू करने के प्रस्ताव तत्काल राज्य सरकार को भेजने की मांग की.
गायों को तिलक लगाकर विदा करने की मजबूरी
जैसलमेर में भी भारत पाकिस्तान सीमा से सटे खेत सिंह की ढाणी और आसपास के इलाके में गोवंश के लिए चारा पानी का गंभीर संकट है. खेतसिंह की ढाणी समेत सीमावर्ती गांवों में हालात चिंताजनक है.सूखे तालाब, खाली नाड़ियां और उजाड़ गौचर भूमि पशुपालकों की मुश्किलेंबढ़ा रही हैं. पानी और चारे की तलाश में पशुओं को दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है. मजबूरी में किसान अपनी गायों को ऐसी जगहों पर छोड़ रहे हैं, जहां पानी और भोजन मिलने की कुछ उम्मीद है. गायों को तिलक लगाकर विदा करते किसानों की आंखों में बेबसी और दर्द साफ नजर आ रहा है.
सामान्य से 54 प्रतिशत कम बारिश
जैसलमेर जिले में इस बार बारिश की स्थिति बेहद कमजोर रही. सामान्य तौर पर जिले में 168 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस बार महज 77 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई. यानी सामान्य से करीब 54 प्रतिशत कम बारिश हुई. जिले की सभी सात तहसीलों को अकालग्रस्त घोषित किया गया है. इनमें भणियाणा, रामगढ़, सम, फलसूंड, पोकरण और फतेहगढ़ अति सूखाग्रस्त श्रेणी में हैं, जबकि जैसलमेर तहसील मध्यम सूखाग्रस्त है. जिले के 80 प्रतिशत से अधिक गांवों में सूखे का असर देखने को मिल रहा है.
पथमेड़ा की टीम ने किया दौरा
गोवंश की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने पथमेड़ा के महाराज श्री से संपर्क कर मदद की गुहार लगाई. कई दिनों के लगातार प्रयासों के बाद पथमेड़ा की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया. अब स्थानीय भामाशाहों और जनप्रतिनिधियों से गोवंश को बचाने के लिए आगे आने की अपील की गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते चारा-पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं.
गोवंश संरक्षण के लिए तत्काल राहत की जरूरत
सीमावर्ती इलाकों में पशुपालन ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख आधार है. ऐसे में गोवंश पर आया ये संकट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है. जरूरत है कि प्रभावित गांवों में तत्काल चारे और पानी की व्यवस्था की जाए और गोवंश के लिए राहत शिविर शुरू किए जाएं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समय रहते प्रशासन, जनप्रतिनिधि और भामाशाह आगे आएंगे, ताकि बेजुबान गोवंश को अकाल की मार से बचाया जा सके ?

आपको बता दें कि राजस्थान के सिरोही के नंदगांव में जालोर और सिरोही से करीब 4 से 4.5 हजार के करीब गौवंश पहुंचा है. यहां पथमेड़ा गौशाला की तरफ से इन गौवंश के लिए चारे-पानी का इंतजाम हो रहा है. पशुपालकों के परिवार और बच्चों के लिए भी गौशाला की तरफ से मदद की जा रही है.
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बाड़मेर से दुर्ग सिंह और जैसलमेर से शंकरदान की रिपोर्ट