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15 हजार से अधिक गोवंश को मदद की जरूरत! 100 से अधिक पशुपालक परिवारों को मिला आश्रय

पश्चिमी राजस्थान में अकाल जैसे हालात की आशंका के बीच जालौर-सिरोही के पशुपालकों की मदद के लिए नंदगांव आगे आया है. यहां करीब 4 हजार गोवंश के चारे-पानी और 100 से अधिक परिवारों के रहने की व्यवस्था की गई है.

15 हजार से अधिक गोवंश को मदद की जरूरत! 100 से अधिक पशुपालक परिवारों को मिला आश्रय
Image Credit: Pathmeda

पश्चिमी राजस्थान में अकाल जैसे हालात की आशंका के बीच गोवंश के सामने चारे-पानी का संकट गहराने की चिंता बढ़ गई है. जालौर और सिरोही क्षेत्र में पशुपालक अपने गोधन को बचाने के लिए परेशान हैं. ऐसे मुश्किल समय में श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के गोऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानंदजी महाराजश्री के निर्देश पर अभिनव ब्रजमंडल नंदगांव ने मदद की पहल की है. यहां 100 से अधिक पशुपालक परिवारों की गुहार पर करीब 4 हजार गोवंश के लिए चारे-पानी और आश्रय की व्यवस्था की गई है. साथ ही परिवारों के बच्चों की निशुल्क शिक्षा और दूध का उचित मूल्य देने की भी पहल की गई है. हालांकि, आने वाले समय में 15 हजार से अधिक गोवंश को मदद की जरूरत पड़ने की आशंका है. ऐसे में इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी सहयोग की दरकार है.


गुजरात और हरियाणा तक पहुंचे पशुपालक, फिर नंदगांव से मिली उम्मीद
जालौर और सिरोही में चारे-पानी की कमी की आशंका के चलते पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. अपने गोवंश को बचाने के लिए कई परिवार गुजरात और हरियाणा तक पहुंचे, लेकिन वहां राहत की उम्मीद पूरी नहीं हुई. इसके बाद इन परिवारों ने अभिनव ब्रजमंडल नंदगांव का रुख किया. यहां 100 से अधिक पशुपालक परिवारों ने गोऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानंदजी महाराजश्री के सामने अपनी परेशानी रखी. उन्होंने गोवंश के लिए चारे-पानी के साथ परिवारों के रहने की व्यवस्था करने की गुहार लगाई. पशुपालकों की परेशानी को देखते हुए महाराजश्री ने संस्थान को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए.


पथमेड़ा महाराजश्री के निर्देश पर नंदगांव में करीब 4 हजार गोवंश के लिए चारे-पानी की व्यवस्था की गई है. संकट से जूझ रहे पशुपालक परिवारों के रहने का इंतजाम भी किया गया है. यह पहल सिर्फ गोवंश को भोजन और पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है. पशुपालक परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गई है. वहीं, गोवंश से मिलने वाले दूध को 45 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदने के निर्देश दिए गए हैं. इससे पशुपालक परिवारों को आर्थिक मदद मिल सकेगी.


15 हजार से ज्यादा गोवंश पहुंचने की आशंका, अस्थायी राहत शिविर शुरू
नंदगांव में राहत मिलने के बाद दूसरे प्रभावित पशुपालकों के भी यहां पहुंचने की संभावना है. अनुमान है कि आने वाले समय में 15 हजार से अधिक गोवंश को सहायता की जरूरत पड़ सकती है. इस स्थिति को देखते हुए अस्थायी राहत शिविर की व्यवस्था शुरू कर दी गई है. संस्थान की ओर से जिला कलेक्टर सिरोही को पत्र लिखकर संकट की स्थिति, पशुपालक परिवारों की जरूरतों और गोवंश के लिए किए जा रहे इंतजामों की जानकारी दी गई है.


सरकारी सहयोग के बिना बढ़ाना मुश्किल होगा राहत का दायरा
पथमेड़ा की गोसेवा परंपरा से प्रेरित यह पहल संकट के समय गोवंश और पशुपालक परिवारों को राहत देने की कोशिश है. गोवंश को चारा-पानी उपलब्ध कराने के साथ परिवारों को आश्रय देना, बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करना और दूध का उचित मूल्य देना भी इस पहल का हिस्सा है. हालांकि, यदि गोवंश की संख्या बढ़कर 15 हजार से अधिक होती है तो चारा, पानी, परिवहन, चिकित्सा और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत होगी. ऐसे में केवल सामाजिक संस्थाओं और गोसेवकों के भरोसे इस काम को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है. सरकार, जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग और स्थानीय निकायों का सहयोग भी जरूरी होगा.

गोवंश ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आजीविका का अहम हिस्सा है. ऐसे में अकाल जैसी संभावित परिस्थितियों को देखते हुए समय रहते जरूरी कदम उठाने की जरूरत है. नंदगांव में शुरू हुआ अस्थायी राहत शिविर प्रभावित पशुपालकों के लिए उम्मीद बना है. अब इस पहल को मजबूत करने के लिए सरकारी और प्रशासनिक सहयोग कितना मिलता है, यह देखना अहम होगा.
 

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About the Author

Ansh Raj

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अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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