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'बिहार कोकिला' के नाम से प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ. शारदा सिन्हा की आज (5 नवंबर, 2026) दूसरी पुण्यतिथि है. उनका जन्म 1 अक्टूबर, 1952 में सुपौल जिले के हुलास गांव में हुआ था. भले ही शारदा सिन्हा हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके गाए छठ पूजा के गीत हम सभी के दिलों में बसे हैं. उनकी पुण्यतिथि पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सीएम सम्राट, यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने उन्हें याद किया है.
सीएम सम्राट ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा- बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति और संगीत परंपरा को अपनी मधुर आवाज से नई पहचान दिलाने वाली बिहार कोकिला, पद्म विभूषण से सम्मानित महान लोक गायिका शारदा सिन्हा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत्-शत् नमन. उनकी सुरीली आवाज और अमूल्य योगदान सदैव हमारी स्मृतियों में जीवंत रहेंगे.
बिहार के पूर्व सीएम और राज्य सभा सदस्य नीतीश कुमार ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- बिहार कोकिला स्व० शारदा सिन्हा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि. स्व० शारदा सिन्हा जी द्वारा छठ महापर्व पर गाए गए मधुर गीत बिहार समेत देश के सभी भागों में आज भी गूंजा करते हैं. बिहार की भूमि, संगीत जगत और संगीत प्रेमियों में उनकी स्मृति हमेशा रहेगी.
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट किया- महान लोक गायिका, पद्म विभूषण विजेता डॉ. शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि. छठ महापर्व के गीतों में उनकी मधुर आवाज ने करोड़ों लोगों की आस्था को स्वर दिया. भोजपुरी, मैथिली, अंगिका व मगही लोक संगीत को लोकप्रिय बनाने और उसे नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है. अपने गीतों के माध्यम से हम सभी के बीच वह हमेशा उपस्थित रहेंगी.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा- पद्म विभूषण से सम्मानित, बिहार की लोक संस्कृति की अमर स्वर साधिका, 'बिहार कोकिला' शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन करती हूं. शारदा की आवाज में बिहार की मिट्टी की सुगंध, मिथिला की मिठास और हमारी लोकपरंपराओं की पवित्रता रची-बसी थी. उन्होंने लोकगीतों के माध्यम से हमारी संस्कृति, संस्कारों और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को घर-घर तक पहुंचाया. विशेषकर छठ महापर्व और शारदा सिन्हा के स्वर का एक अटूट रिश्ता है. उन्होंने केवल लोकगीतों को स्वर नहीं दिया, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ियों के हृदय में अमर कर दिया.