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अंग प्रदेश से कोसी और सीमांचल को जोड़ने वाली लाखों लोगों की उम्मीद विक्रमशिला सेतु को लेकर बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है. सेतु के दूसरे और सबसे अधिक क्षतिग्रस्त हिस्से पर स्टील ट्रस ब्रिज का गर्डर सफलतापूर्वक फिक्स कर दिया गया है. इसके साथ ही पुल अब धीरे-धीरे अपने पुराने स्वरूप में लौटता दिखाई देने लगा है. वहीं, तीसरे हिस्से पर भी गर्डर लॉन्चिंग की तैयारी तेज कर दी गई है. इसके लिए 24 घंटे मजदूरों और इंजीनियरों की टीम काम में जुटी हुई है.
स्टील गर्डर को मजबूती से स्थापित करने के लिए पहले कंक्रीट बीम को काटा जा रहा है. इसके बाद नई बेयरिंग लगाकर गर्डर को सेट किया जाएगा. इसी प्रक्रिया के तहत कुल चार क्षतिग्रस्त स्लैब की जगह स्टील गर्डर लॉन्च किए जाएंगे. गर्डर की स्थापना के बाद उस पर ढलाई का काम होगा और माना जा रहा है कि ढलाई के 28 दिन बाद पुल की क्षमता परखने के लिए लोड टेस्ट किया जा सकता है.
इधर, पुल की रेलिंग और फुटपाथ को भी बदला जा रहा है. भारी निर्माण सामग्री की जगह लोहे की रेलिंग और हल्के फुटपाथ तैयार किए जाएंगे, ताकि पुल पर अतिरिक्त भार कम किया जा सके. मिली जानकारी के अनुसार, मरम्मत कार्य जनवरी तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, लोगों के मन में अब भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मरम्मत के बाद विक्रमशिला सेतु पर भारी वाहनों का परिचालन भी शुरू हो पाएगा? फिलहाल इसको लेकर कोई ताजा आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद साफ होगी तस्वीर
कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सेतु को पहले की तरह दुरुस्त करने की बात कही थी. वहीं पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने भी भरोसा दिलाया था कि पुल को इस तरह तैयार किया जा रहा है, ताकि सभी तरह के वाहन चल सकें. हालांकि, इन तमाम दावों और उम्मीदों की असली तस्वीर निर्माण कार्य पूरा होने और लोड टेस्ट के नतीजे सामने आने के बाद ही साफ हो पाएगी.
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार