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क्या बदलने वाली है राजस्थान के मदरसों की तस्वीर? हाईकोर्ट के नोटिस से गरमाई सियासत, डिजिटल पोर्टल से लेकर NEP तक की मांग

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के करीब 3,000 मदरसों के संचालन, नियंत्रण और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है. प्रतिपाल सिंह व अन्य की याचिका में मदरसों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शी प्रबंधन और विद्यार्थियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने सहित कई मांगें उठाई गई हैं. कोर्ट ने सरकार को इन मुद्दों पर विस्तृत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी.

Written By Sneha Aggarwal
Published: Sep 30, 2026, 02:06 PM IST | Updated: Sep 30, 2026, 02:11 PM IST
Image Credit: Rajasthan High Court
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Jodhpur News: राजस्थान में संचालित करीब 3,000 मदरसों के प्रभावी संचालन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने मामले में उठाए गए विभिन्न बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी.

मदरसा बोर्ड के नियमों और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल 
प्रतिपाल सिंह व अन्य की ओर से दायर याचिका में प्रदेश के मदरसों में प्रभावी नियंत्रण, कानूनी प्रावधानों और शैक्षणिक पर्यवेक्षण की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह ने अदालत को बताया कि राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020 में मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं. याचिका में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा के स्तर में सुधार और पारदर्शी प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है.

RBSE-CBSE से जुड़ाव और नई शिक्षा नीति लागू करने का सुझाव 
याचिकाकर्ता की ओर से मदरसों की शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार के लिए कई सुझाव भी अदालत के समक्ष रखे गए. इनमें आरबीएसई और सीबीएसई से संबद्ध मदरसों की सूची तैयार करने और माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप संचालित करने का सुझाव शामिल है.


इसके अलावा स्कूल के रूप में पंजीकृत संस्थाओं को मदरसा बोर्ड से मिलने वाले अनुदान और वित्तीय सहायता की समीक्षा करने, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के मदरसों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित पाठ्यक्रम लागू करने और डाइट के माध्यम से समान परीक्षा आयोजित कराने की मांग की गई.

विद्यार्थियों का डिजिटल रिकॉर्ड और शिक्षकों की योग्यता जांचने की मांग 
याचिका में मदरसा विद्यार्थियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विशेष पोर्टल विकसित करने और प्रत्येक विद्यार्थी को विशिष्ट पहचान संख्या देने का सुझाव भी दिया गया है. साथ ही निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं रखने वाले संविदा या पैरा-टीचर्स के मानदेय पर रोक लगाने तथा धार्मिक शिक्षा देने वाले मौलवी, मुफ्ती आदि को सरकारी कोष से वेतन भुगतान नहीं करने की मांग रखी गई.

गैर-मुस्लिम बच्चों की शिक्षा और नियम तोड़ने वाले मदरसों पर कार्रवाई का मुद्दा 
याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिशों के अनुरूप गैर-मुस्लिम बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने वाले मदरसों से सामान्य विद्यालयों में आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षा उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया. मानकों का पालन नहीं करने वाले मदरसा संस्थानों का पंजीकरण रद्द करने और आवंटित भूमि वापस लेने की मांग भी की गई है.

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा मदरसों के प्रबंधन पर विस्तृत हलफनामा 
हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी को राज्य सरकार की ओर से मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन के लिए उठाए जा रहे और प्रस्तावित कदमों का विवरण देते हुए विस्तृत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने याचिकाकर्ता के सुझावों पर भी विचार करने को कहा है.  

Report-Rakesh Kumar Bhardwaj

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About the Author

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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