)
राजस्थान हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ के विधायक गणेशराज बंसल को धमकी देने के मामले में दर्ज एफआईआर पर अंतरिम राहत दी है. न्यायाधीश आशुतोष कुमार की एकलपीठ ने विधायक को जांच में शामिल होने के निर्देश दिए हैं. साथ ही स्पष्ट किया है कि कोर्ट के आगामी आदेश के बिना उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. मामले में अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी.
विधायक गणेशराज बंसल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3), 61(2) और 111(2)(बी) के तहत दर्ज है.
एफआईआर दर्ज कराने में देरी का उठाया मुद्दा
विधायक की ओर से अधिवक्ता मुकेश माहेश्वरी और कुणाल उपाध्याय ने कोर्ट में पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि परिवादी रिछपाल सिंह खार्रा की शिकायत के मुताबिक, 3 जनवरी 2026 को हनी बॉक्सर ने उन्हें फोन कर जान से मारने की धमकी दी थी. आरोप है कि यह धमकी विधायक की ओर से दी गई थी.
विधायक के वकीलों ने दलील दी कि कथित घटना के करीब 10 महीने बाद, 7 अक्टूबर 2026 को एफआईआर दर्ज कराई गई. उन्होंने यह भी कहा कि प्राथमिकी में विधायक पर सीधे धमकी देने का आरोप नहीं लगाया गया है.
बचाव पक्ष ने दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए कहा कि परिवादी पहले भी कई एफआईआर दर्ज करा चुके हैं. वकीलों ने कोर्ट को यह भी बताया कि विधायक के खिलाफ दर्ज दो अन्य एफआईआर को हाईकोर्ट की समन्वय पीठ 23 सितंबर 2026 को निरस्त कर चुकी है. इसके अलावा, एक अन्य मामले में भी विधायक को गिरफ्तारी से संरक्षण मिला हुआ है.
सरकार और परिवादी ने किया याचिका का विरोध
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और परिवादी की तरफ से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने याचिका का विरोध किया. उनकी ओर से दलील दी गई कि मामले में गंभीर आरोप हैं और अभी परिवादी के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं.
आठ सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के समग्र तथ्यों पर विचार किया. इसमें विधायक की उम्र 60 वर्ष होने और उनके वर्तमान विधायक होने के पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया. इसके बाद कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया.
हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी एफआईआर रद्द करने की मांग पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है. विधायक को जांच में शामिल होना होगा और मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी. तब तक गिरफ्तारी को लेकर कोर्ट का दिया गया संरक्षण प्रभावी रहेगा.