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Jaipur News: राजस्थान हाईकोर्ट ने भूमि स्वामित्व से जुड़े एक मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाए जाने पर कड़ा एतराज जताया है. अदालत ने मामले में दायर अपील को खारिज करते हुए साफ किया कि भूमि के स्वामित्व का फैसला राजस्व अदालत या सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है. हाईकोर्ट इस तरह के स्वामित्व विवाद में सीधे तौर पर दखल नहीं दे सकता.
मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाने पर आपत्ति
जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि भूमि से जुड़े विवाद में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाना उचित नहीं है. अदालत ने बतौर पक्षकार मुख्यमंत्री का नाम हटाने के भी आदेश दिए. सीजे संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने बांके बिहारी सैनी व अन्य की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.
डीग की जमीन को लेकर है विवाद
अपील में अधिवक्ता सतीश चंद्र पचौरी ने अदालत को बताया कि डीग में खसरा नंबर 2707 की कुल 2.86 हेक्टेयर जमीन में से 0.80 हेक्टेयर भूमि पर अपीलार्थी अपना स्वामित्व बताते हैं. उनके अनुसार रोडवेज की ओर से इस जमीन पर हाल्ट बस स्टैंड का निर्माण किया गया और उसका शुभारंभ भी कर दिया गया.
अपीलार्थियों की ओर से मांग की गई कि राज्य सरकार और रोडवेज को निर्देश दिए जाएं कि बस स्टैंड के रूप में किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाए और जमीन को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए.
एकलपीठ में भी उठाया था मामला
अपील में बताया गया कि अपीलार्थी ने रोडवेज की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए एकलपीठ के समक्ष याचिका दायर की थी. हालांकि, एकलपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया था. एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि राजस्व भूमि के स्वामित्व से संबंधित विवाद का निपटारा राजस्व अदालत के समक्ष किया जाना है. ऐसे में इस मामले में याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता.
इसके बाद अपीलार्थियों ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की. अपील में मांग की गई कि एकलपीठ के आदेश को रद्द किया जाए और अपीलार्थी की भूमि से बस स्टैंड को हटाने के निर्देश दिए जाएं.
हाईकोर्ट ने स्वामित्व विवाद पर क्या कहा
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि रोडवेज इस स्थान पर बस स्टैंड का निर्माण कर चुका है. वहीं अपीलार्थी इस भूमि पर अपना स्वामित्व स्थापित करने में सफल नहीं रहे हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि भूमि के स्वामित्व का विवाद राजस्व अदालत या सिविल कोर्ट के समक्ष उठाया जा सकता है.
खंडपीठ ने अपीलार्थियों को राजस्व या सिविल न्यायालय के समक्ष अपना स्वामित्व स्थापित करने के लिए स्वतंत्र रखा. हाईकोर्ट ने इसी आधार पर दायर अपील को खारिज कर दिया. साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाने पर आपत्ति जताते हुए उनका नाम पक्षकारों की सूची से हटाने के आदेश दिए.