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Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद के चलते बिजली कनेक्शन काटने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि संपत्ति की बिक्री को लेकर चल रहे सिविल विवाद और बिजली कनेक्शन का मामला अलग-अलग है.
ट्रायल कोर्ट के स्टेटस-को आदेश को आधार बनाकर बिजली कनेक्शन काटना उचित नहीं है. कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए डिस्कॉम को बिजली कनेक्शन तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए हैं. न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने जयंत कुमार की ओर से दायर डीबी स्पेशल अपील रिट पर सुनवाई के बाद आदेश पारित किया.
संपत्ति की बिक्री से जुड़े विवाद के चलते डिस्कॉम ने काटा कनेक्शन
मामला जैसलमेर निवासी सुरेंद्र हिंदू सिंह भाटी के आवासीय मकान से जुड़ा है. मामले के अनुसार, मकान की बिक्री को लेकर पक्षकारों के बीच विवाद होने पर सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर हुआ था. ट्रायल कोर्ट ने मामले में स्टेटस-को का अंतरिम आदेश दिया. इसी दौरान मकान में रह रहे सुरेंद्र हिंदू सिंह भाटी ने बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया. जोधपुर डिस्कॉम के सहायक अभियंता ने उन्हें बिजली कनेक्शन जारी कर दिया. बाद में जयंत कुमार के आवेदन पर डिस्कॉम ने कनेक्शन काट दिया.
कनेक्शन काटे जाने के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 5 मई 2026 को याचिका स्वीकार करते हुए कनेक्शन बहाल करने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ अपीलकर्ता ने खंडपीठ में अपील दायर की. अपीलकर्ता का तर्क था कि ट्रायल कोर्ट के स्टेटस-को के चलते बिजली कनेक्शन जारी नहीं किया जा सकता था. वहीं प्रतिवादी की ओर से कहा गया कि स्टेटस-को संपत्ति की बिक्री से जुड़े विवाद तक सीमित है और बिजली कनेक्शन से उसका कोई संबंध नहीं है.
बिजली कनेक्शन तत्काल बहाल करने के निर्देश
खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि संपत्ति की बिक्री और बिजली कनेक्शन देने के विवाद आपस में जुड़े हुए नहीं हैं. इसलिए स्टेटस-को के आधार पर डिस्कॉम बिजली कनेक्शन नहीं काट सकता. कोर्ट ने अपील में कोई मेरिट नहीं पाते हुए उसे खारिज कर दिया और संबंधित अधिकारी को बिजली कनेक्शन तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए.
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राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस कुलदीप माथुर की बेंच ने 62 साल की विधवा और फैमिली पेंशनर भूरी देवी को राहत देते हुए उसका बैंक खाता फ्रीज करने के आदेश पर रोक लगा दी. पेंशन में करीब 8.39 लाख रुपए ज्यादा भुगतान होने का हवाला देते हुए सब-ट्रेजरी ऑफिसर, देवली टोंक ने 18 फरवरी 2026 को बैंक को पेंशनर का खाता फ्रीज करने के निर्देश दिए थे. पेंशनर की ओर से अधिवक्ता अजय कुमार ऑगस्टिन ने कोर्ट में पैरवी करते हुए कहा कि बिना नोटिस दिए और पक्ष रखने का मौका दिए खाते को फ्रीज करना उचित नहीं है.
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पेंशनर की रोजमर्रा की जरूरतें इसी पेंशन से चलती हैं और खाता फ्रीज होने से उसे आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मामला विचारणीय है और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए. कोर्ट ने 18 फरवरी के खाते को फ्रीज करने वाले आदेश के अमल पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी. साथ ही एसबीआई की देवली शाखा को पेंशनर का बैंक खाता चलाने और सामान्य लेन-देन की अनुमति देने के निर्देश दिए. कोर्ट ने सब-ट्रेजरी ऑफिसर को पेंशनर की मासिक पेंशन भी फिलहाल हर महीने जारी करने के निर्देश दिए.