App

राजस्थान वन विभाग में लाखों का घोटाला: जांच में अफसर दोषी, फिर भी कार्रवाई की फाइल अटकी

Rajasthan Forest Department: राजस्थान वन विभाग में नीलामी और निविदा प्रक्रिया से जुड़े लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है. विभागीय जांच में रसीदों, फर्जी हस्ताक्षरों, नकद लेनदेन और प्रतिभूति राशि जमा कराने में अनियमितताएं सामने आई हैं. जांच में उप वन संरक्षक समेत अन्य कर्मचारियों को दोषी माना गया है.

राजस्थान वन विभाग में लाखों का घोटाला: जांच में अफसर दोषी, फिर भी कार्रवाई की फाइल अटकी
Image Credit: Zee Media

Rajasthan Forest Department: राजस्थान के वन महकमे में गबन के बाद जब अफसर पर कार्रवाई की बारी आई, तो उच्च अधिकारियों पर दोषियों पर मेहरबानी के आरोप लग रहे हैं. लाखों रुपये के घोटाले में जांच के दौरान दोषी पाए गए अफसर के खिलाफ कार्रवाई की फाइल अरण्य भवन में अटकी हुई है. उच्च अधिकारी ACB से जांच की अनुशंसा तक कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक न तो निलंबन की गाज गिरी और न ही दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई.

वन विभाग के जंगलों में नीलामी के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है. विभागीय रिपोर्ट में रसीदों, फर्जी हस्ताक्षरों और नकद लेनदेन के जरिए निविदा प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आई हैं. जांच में उप वन संरक्षक बी को दोषी माना गया है. अधिकारियों ने कुछ महीने पहले उनके खिलाफ निलंबन और एपीओ की कार्रवाई की अनुशंसा भी की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. जांच में सहायक लेखाधिकारी मदनलाल सैनी और सहायक प्रह्लाद सिंह को भी दोषी माना गया है. प्रह्लाद सिंह को निलंबित किया जा चुका है. विभागीय सूत्रों के मुताबिक, पूरे घोटाले की रकम 50 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.

प्रकरण-1- 3.37 लाख रुपये की नकद प्रतिभूति राशि

पहले प्रकरण में मैसर्स शारदा इंटरप्राइजेज से निविदा प्रक्रिया के लिए 3 लाख 37 हजार रुपये की प्रतिभूति राशि नकद जमा कराई गई. फर्म को 55 रुपये की रसीद दी गई. नियमों के तहत सरकारी कार्यालय में 500 रुपये से अधिक का नकद लेनदेन नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद झुंझुनू में 3 लाख रुपये से अधिक की नकद राशि लेकर निविदा प्रक्रिया पूरी किए जाने का मामला सामने आया है.

प्रकरण-2- 5.33 लाख रुपये का अवैध नकद भुगतान

दूसरे प्रकरण में नीलामी के दौरान खान फर्म से 5 लाख 33 हजार रुपये का अवैध रूप से नकद भुगतान लिया गया. मामले में सील और फर्जी हस्ताक्षर का भी इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि संबंधित अधिकारी के नाम की सील लगाकर फर्जी हस्ताक्षर किए गए और सरकारी संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं की गईं.

प्रकरण-3- रोक के बावजूद आरा मशीनों के नवीनीकरण का शुल्क

बताया जा रहा है कि प्रदेश में 2020 से आरा मशीनों के नवीनीकरण पर रोक है. इसके बावजूद संचालकों से नवीनीकरण शुल्क लेकर सरकारी GA-55 रसीद जारी की गई. सवाल उठ रहा है कि जब सरकार ने नवीनीकरण प्रक्रिया पर रोक लगा रखी थी, तब कार्यालय ने किस कानूनी प्रावधान के तहत यह शुल्क लिया. एक मामले में ताराचंद से 11 हजार रुपये का शुल्क फर्जी रसीद के जरिए वसूले जाने की बात भी सामने आई. इस मामले में संबंधित फर्में भी जांच के घेरे में आ सकती हैं, क्योंकि नियमों और शर्तों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को होना जरूरी है.

नियमों की जमकर उड़ी धज्जियां

निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी सामने आई है. नियमों के तहत निविदा के लिए समिति का गठन किया जाना जरूरी था, लेकिन कार्यालय ने बिना समिति का गठन किए ही प्रक्रिया पूरी कर दी. इसके अलावा निविदा की सभी कार्रवाई नोटशीट पर अंकित किया जाना जरूरी था, लेकिन निविदा की संपूर्ण कार्रवाई बिना नोटशीट पर दर्ज किए पूरी कर दी गई.  

आरोप है कि उप वन संरक्षक बी ने निविदाओं के कार्यादेश जारी करने से पहले प्रतिभूति राशि जमा होने के संबंध में न तो कार्यालय की लेखा शाखा से जानकारी ली और न ही राशि के राजकोष में जमा होने की पुष्टि की. कई प्रकरणों में प्रतिभूति राशि जमा नहीं होने के बावजूद कार्यादेश जारी कर दिए गए.

12 निविदाओं में प्रतिभूति राशि के नियमों का हवाला नहीं

तथ्यात्मक रिपोर्ट में सामने आया है कि ने 12 निविदाओं के कार्यादेश जारी किए गए. इनमें प्रतिभूति जमा करने के लिए निर्धारित नियमों का हवाला नहीं दिया गया. नियमानुसार प्रतिभूति राशि ई-ग्रास, बैंक ड्राफ्ट, राष्ट्रीय बचत पत्र, बैंक गारंटी, IRDAI के साथ पंजीकृत बीमाकर्ता द्वारा जारी बीमा जमानत बॉन्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट या इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी के रूप में जमा की जा सकती है.

इसके बजाय संबंधित राशि कार्यालय में जमा करने के लिए कहा गया. रिपोर्ट में इसे उप वन संरक्षक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल के तौर पर देखा गया है. मामले में पुलिस कार्रवाई के लिए भी गंभीर प्रयास नहीं किए जाने की बात सामने आई है. वहीं कनिष्ठ सहायक प्रह्लाद सिंह को भंडार का चार्ज दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Aman Singh

Aman Singh

जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
Read More