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राजस्थान में DLC दरें बढ़ने का असर: रजिस्ट्री से सरकार की बंपर कमाई, 6 महीने में जुटे 7,265 करोड़

राजस्थान में DLC दरों में दो बार बढ़ोतरी के बाद रजिस्ट्री से होने वाली सरकारी कमाई में तेज उछाल आया है. 1 अप्रैल से 24 सितंबर 2026 तक पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने 7,264.61 करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले साल की समान अवधि से 1,606.35 करोड़ रुपये यानी 28.39% ज्यादा है. जुलाई में सबसे ज्यादा 1,462.54 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि 24 सितंबर तक सितंबर की कमाई में 35.50% की वृद्धि दर्ज हुई. चार साल में इसी अवधि का राजस्व 4,560.86 करोड़ से बढ़कर 7,264.61 करोड़ रुपये हो गया है.

Written By Deepak Goyal
Published: Sep 28, 2026, 02:42 PM IST | Updated: Sep 28, 2026, 02:49 PM IST
Image Credit: Rajasthan Registry Revenue
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Rajasthan News: राजस्थान में इस साल दो बार DLC दरें बढ़ीं और इसका असर रजिस्ट्री से होने वाली कमाई के आंकड़ों में साफ दिख रहा है. अप्रैल से 24 सितंबर तक पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने 7 हजार 264 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जो पिछले साल से 1,606 करोड़ ज्यादा हैं. यानी कमाई की रफ्तार सीधे 28 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है. दिलचस्प ये कि जुलाई में अकेले 1,462 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आए और सितंबर के शुरुआती 24 दिनों में ही पिछले साल के मुकाबले कमाई 35.5 फीसदी उछल गई.  

DLC बढ़ोतरी से रजिस्ट्री की कमाई में उछाल
प्रदेश में जमीन की खरीद-बिक्री महंगी होने के साथ सरकार की रजिस्ट्री से होने वाली कमाई में भी तेज उछाल आया है. इस वित्तीय वर्ष में DLC दरों में दो बार बढ़ोतरी का असर पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के राजस्व आंकड़ों में दिखाई दे रहा है. अप्रैल में डीएलसी दरें 10% बढ़ाई गईं, जबकि अगस्त से करीब 30-35% की बढ़ोतरी की गई. विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से 24 सितंबर 2026 तक सरकारी खजाने में 7,264.61 करोड़ रुपये आए हैं. पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 5,658.26 करोड़ रुपये था. यानी एक साल में 1,606.35 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय हुई और राजस्व 28.39% बढ़ा.

हर महीने पिछले साल से ज्यादा कमाई
खास बात यह है कि राजस्व में तेजी किसी एक महीने तक सीमित नहीं रही. अप्रैल से 24 सितंबर तक हर महीने पिछले साल के मुकाबले कमाई ज्यादा रही. सबसे ज्यादा 35.50% की वृद्धि 24 सितंबर तक दर्ज हुई, जबकि जून में 35.02%, जुलाई में 31.80% और अप्रैल में 31.68% की बढ़ोतरी रही. रकम के लिहाज से जुलाई में सर्वाधिक 1,462.54 करोड़ रुपये की आय हुई. हालांकि राजस्व पर डीएलसी दरों के अलावा दस्तावेज पंजीयन की संख्या और संपत्ति बाजार की गतिविधियों का भी असर रहता है. इस बार सालाना लक्ष्य भी पिछले साल की तुलना में ऊंचा रखा गया है. 


तीन साल में 59.3% बढ़ा राजस्व 
इस तरह 2023-24 के मुकाबले मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसी अवधि की आय 2,703.75 करोड़ रुपए ज्यादा हो गई है. यानी तीन साल में रजिस्ट्री से होने वाली कमाई करीब 59.3% बढ़ी है. दिलचस्प यह भी है कि पिछले दो साल में जितनी क्रमिक बढ़ोतरी हुई, उससे कहीं ज्यादा छलांग अकेले इस साल देखने को मिली है.

DLC बढ़ोतरी के बाद भी राजस्व में तेजी
मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग के आंकड़ों में DLC बढ़ोतरी के आसपास राजस्व का ट्रेंड भी दिलचस्प है. अप्रैल में 10% बढ़ोतरी के बाद उसी महीने आय पिछले साल के 851.23 करोड़ से बढ़कर 1,120.87 करोड़ रुपये हो गई. जून में पिछले साल से 338.76 करोड़ और जुलाई में 352.85 करोड़ रुपये ज्यादा मिले. 3 अगस्त से DLC में करीब 30-35% की दूसरी बढ़ोतरी लागू हुई. अगस्त में राजस्व 21.03% ज्यादा रहा, जबकि 24 सितंबर तक 951.17 करोड़ रुपये मिल चुके हैं, जो पिछले साल इसी तारीख तक मिले 701.99 करोड़ से 249.18 करोड़ यानी 35.50% ज्यादा हैं.

18,750 करोड़ का सालाना लक्ष्य
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में पंजीयन एवं मुद्रांक से 18,750 करोड़ रुपये आय का लक्ष्य रखा है. 24 सितंबर तक इसमें से 7,264.61 करोड़ यानी 38.74% लक्ष्य हासिल हो चुका है. हालांकि महीनेवार तय लक्ष्य के मुकाबले आय अभी पीछे है. अप्रैल में मासिक लक्ष्य का 91.97%, मई में 75.54%, जून में 81.94%, जुलाई में 86.67% और अगस्त में 76.62% हासिल हुआ. सितंबर में 24 तारीख तक मासिक लक्ष्य का 63.41% राजस्व मिल चुका था.

अब बाकी छह महीनों पर नजर
बहरहाल, यानी जमीन की कीमत बढ़ी तो खरीदार की जेब पर बोझ बढ़ा, लेकिन सरकारी खजाने की रफ्तार उससे भी तेज हो गई. तीन साल पहले 24 सितंबर तक जिस रजिस्ट्री से 4,561 करोड़ रुपये आए थे, वही आंकड़ा अब 7,265 करोड़ के पार है. अब नजर बाकी छह महीनों पर है, डीएलसी की बढ़ी दरें सरकार को 18,750 करोड़ के सालाना टारगेट के कितने करीब पहुंचाती हैं. 
 

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