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महारैली की तैयारियों को लेकर जयपुर में हुई बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के सामने प्रदेश के नेताओं और विभिन्न संगठनों ने दिल्ली पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या के लक्ष्य बता. अब इन दावों को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी जिला और ब्लॉक स्तर के संगठन पर होगी.
किसी ने 11 हजार तो किसी ने 10 हजार का दिया लक्ष्य
दिल्ली महारैली के लिए राजस्थान के अलग-अलग जिलों और संगठनों ने अपने स्तर पर भीड़ जुटाने के आंकड़े सामने रखे हैं. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अलवर से 11 हजार लोगों को दिल्ली ले जाने का वादा किया है. वहीं जयपुर से प्रताप सिंह ने 10 हजार कार्यकर्ताओं का लक्ष्य बताया.
अजमेर से धर्मेंद्र राठौड़ ने दो हजार लोगों को दिल्ली ले जाने का दावा किया है. इसके अलावा युवा कांग्रेस ने पांच हजार और NSUI ने 2,500 कार्यकर्ताओं को जुटाने का लक्ष्य रखा है. महिला कांग्रेस की ओर से 500 से 600 कार्यकर्ताओं को लाने का दावा किया गया है, जबकि कांग्रेस सेवादल ने भी 500 कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने की बात कही है.
एक लाख के लक्ष्य तक कैसे पहुंचेगी कांग्रेस ?
प्रदेश के नेताओं और विभिन्न संगठनों की ओर से बताए गए आंकड़ों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि राजस्थान कांग्रेस एक लाख लोगों का लक्ष्य कैसे हासिल करेगी. जिन नेताओं और संगठनों ने अपने-अपने लक्ष्य बताए हैं, उनके आंकड़े कुल लक्ष्य के मुकाबले कितने हैं और बाकी कार्यकर्ताओं को जुटाने की जिम्मेदारी किन नेताओं को दी जाएगी, ये भी अहम रहेगा. पंचायत चुनाव के चलते कई जिलों में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता स्थानीय चुनावी गतिविधियों में व्यस्त हैं. ऐसे में उन्हें दिल्ली महारैली के लिए एकजुट करना, परिवहन की व्यवस्था करना और अलग-अलग क्षेत्रों से समय पर दिल्ली पहुंचाना संगठन के लिए महत्वपूर्ण होगा.
दिल्ली बॉर्डर पर होगी कार्यकर्ताओं की गिनती
महारैली में राजस्थान से पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या को लेकर कांग्रेस संगठन इस बार आंकड़ों का मिलान भी करेगा. बैठक में सामने आए निर्देशों के मुताबिक, दिल्ली बॉर्डर पर कार्यकर्ताओं की गिनती की जाएगी. इसके जरिए ये आंकलन किया जाएगा कि किस जिले, नेता और संगठन ने कितने लोगों को दिल्ली पहुंचाया.बताया गया है कि भीड़ जुटाने से जुड़े आंकड़ों की पूरी रिपोर्ट राहुल गांधी तक पहुंचाई जाएगी. ऐसे में प्रदेश के नेताओं और संगठनात्मक इकाइयों की ओर से दिए गए लक्ष्य और वास्तविक उपस्थिति के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण रहेगा.
दावों की असली परीक्षा 1 नवंबर को
राजस्थान कांग्रेस के सामने फिलहाल दोहरी जिम्मेदारी है. एक ओर पंचायत चुनाव के बीच संगठनात्मक सक्रियता बनाए रखनी है, तो दूसरी ओर दिल्ली में होने वाली महारैली के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को जुटाना है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि जिला और ब्लॉक स्तर पर बनाई गई, रणनीति कितनी प्रभावी रहती है, नेताओं के दावे कितने कार्यकर्ताओं की वास्तविक मौजूदगी में बदलते हैं और राजस्थान कांग्रेस एक लाख लोगों को दिल्ली ले जाने के अपने लक्ष्य के कितने करीब पहुंचती है. इन सवालों के जवाब 1 नवंबर को महारैली के दौरान सामने आएंगे.