टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: राजस्थान में गैंगस्टर्स की कमर तोड़ने वाली AGTF क्या है?
राजस्थान पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) संगठित अपराध और गैंगस्टर्स के नेटवर्क पर शिकंजा कसने में अहम भूमिका निभा रही है. इसी फोर्स ने एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में कोटा से तीन आरोपियों को पकड़ा. आरोपियों के लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का संदेह है. AGTF की कमान ADG दिनेश एमएन के पास है. गोगामेड़ी हत्याकांड समेत कई मामलों में भी इस फोर्स की भूमिका रही है.
राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स यानी AGTF अब संगठित अपराध के नेटवर्क को जड़ से खत्म के मिशन में जुटी है. हाल ही में एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में आरोपियों को कोटा में पकड़ने की कार्रवाई में अहम भूमिका निभाने वाली AGTF ने राजस्थान से लेकर अमेरिका, दुबई और इटली तक गैंगस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई में अपनी सक्रियता दिखाई है. गैंगस्टर्स के नेटवर्क पर नजर, शूटरों की धरपकड़ और विदेश में बैठे अपराधियों तक पहुंच. AGTF की रणनीति अब सिर्फ बदमाशों को पकड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को निशाने पर लेने की है.
16 दिसंबर 2023 को हुआ था AGTF का गठन
राजस्थान में रंगदारी, सुपारी किलिंग, गैंगवार और संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने 16 दिसंबर 2023 को एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी. इस विशेष यूनिट की कमान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एमएन दिनेश को सौंपी गई. गठन के बाद से ही AGTF ने प्रदेश में सक्रिय गैंगस्टर्स, उनके शार्प शूटर्स, मददगारों और आपराधिक नेटवर्क पर फोकस करना शुरू किया. दिसंबर 2023 में ही टीम ने पांच साल से फरार 50 हजार रुपये के इनामी कोटा निवासी दिग्विजय सिंह उर्फ बिट्टू को जयपुर से गिरफ्तार कर अपनी शुरुआती सक्रियता दिखाई.
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दो मोर्चों पर काम कर रही AGTF
AGTF की कार्रवाई का तरीका सामान्य पुलिसिंग से अलग है. यह टीम जिलों की पुलिस, डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम (DST), कमिश्नरेट स्पेशल टीम (CST) और अन्य विशेष इकाइयों के साथ समन्वय कर गैंगस्टर्स की गतिविधियों और उनके नेटवर्क की जानकारी जुटाती है. फोर्स की कार्रवाई को मोटे तौर पर दो मोर्चों पर देखा जा सकता है.
पहला-ऑपरेशन टीम: प्रदेश और देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय गैंगस्टर्स, शार्प शूटर्स, इनामी बदमाशों और उनके मददगारों की तलाश कर दबिश और गिरफ्तारी की कार्रवाई. दूसरा-इंटरनेशनल समन्वय: विदेश में बैठे वांछित अपराधियों की लोकेशन और गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाना, इंटरपोल व अन्य संबंधित एजेंसियों से संपर्क करना और कानूनी प्रक्रिया के जरिए उनकी गिरफ्तारी तथा प्रत्यर्पण की कार्रवाई को आगे बढ़ाना.
अमेरिका से दुबई और इटली तक कार्रवाई
AGTF की कार्रवाई का दायरा राजस्थान की सीमाओं से बाहर भी पहुंचा है. विदेश में छिपे अपराधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय इस रणनीति का अहम हिस्सा है. अमेरिका में अमित पंडित और जगदीप टालीवाल की गिरफ्तारी से जुड़ी कार्रवाई में सहयोग किया गया है. इनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी बताई गई है.
दुबई में आदित्य जैन उर्फ टोनी और कमल सिंघी को पकड़कर भारत लाने की कार्रवाई भी AGTF की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल बताई जाती है. इसी तरह इटली में अमरजीत सिंह बिश्नोई और सुधा कंवर की गिरफ्तारी के लिए भी कार्रवाई करवाई गई. विदेश में बैठे अपराधियों तक पहुंच बनाने के लिए स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल बेहद अहम साबित हो रहा है.
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गोगामेड़ी हत्याकांड से लेकर टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस तक
AGTF की भूमिका कई चर्चित आपराधिक मामलों में सामने आई है. दिसंबर 2023 में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड के बाद मुख्य शूटरों नितिन फौजी और रोहित राठौड़ की धरपकड़ में भी विशेष टीमों की कार्रवाई अहम रही. इसके अलावा लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा जैसे गैंगस्टर्स से जुड़े नेटवर्क के शार्प शूटर्स और गुर्गों के खिलाफ भी अलग-अलग अभियानों में कार्रवाई की गई.
वहीं, टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में आरोपियों को कोटा में पकड़ने की कार्रवाई ने एक बार फिर AGTF और स्थानीय पुलिस के समन्वय को चर्चा में ला दिया है. इस तरह की कार्रवाई में दूसरे राज्यों में सक्रिय अपराधियों की लोकेशन का पता लगाना और स्थानीय पुलिस के साथ त्वरित समन्वय करना अहम होता है.
हर जिले में दबिश, हथियारों पर भी फोकस
AGTF की रणनीति केवल बड़े गैंगस्टर्स की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सक्रिय बदमाशों और उनके मददगारों पर भी नजर रखी जा रही है. जानकारी के मुताबिक, टीम जिलों की पुलिस और विशेष इकाइयों के साथ मिलकर संदिग्ध ठिकानों पर दबिश देती है. जरूरत के मुताबिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जाती है और गैंग से जुड़े संपर्कों की पड़ताल की जाती है.
जोधपुर में QRT के साथ समन्वय कर शार्प शूटर्स की गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई भी इसी रणनीति का हिस्सा बताई गई है. जयपुर सहित अन्य जिलों में भी लगातार दबिश दी जा रही है. हथियारों की बरामदगी पर भी विशेष जोर है। पिछले साल तीन AK-47 राइफल सहित अन्य हथियारों की बरामद की गई. तीन महीने में लगभग 80 अपराधी और 40 हथियार पकड़े गए हैं. फोर्स का दावा है कि इन कार्रवाइयों से करीब 20 से 25 बड़ी आपराधिक वारदातों को टालने में मदद मिली. हालांकि, इन आंकड़ों और रोकी गई वारदातों के दावे का विस्तृत आधिकारिक विवरण अलग से सामने आना बाकी है.
सोशल मीडिया से गैंगस्टर नेटवर्क तक निगरानी
आज गैंगस्टर्स का नेटवर्क केवल जमीन पर मौजूद गुर्गों तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया के जरिए नए युवाओं को जोड़ने, धमकियां देने, शूटरों से संपर्क बनाने और अपराध की साजिश रचने जैसे पहलुओं पर भी एजेंसियों की नजर रहती है.
AGTF पुराने गैंगस्टर्स से जुड़े उन सदस्यों की गतिविधियों पर भी नजर रखती है, जो जेल से बाहर आने के बाद दूसरे गिरोहों से जुड़ जाते हैं. सोशल मीडिया पर गैंगस्टर्स के संपर्क में रहने वाले संदिग्ध युवाओं और उनके नेटवर्क की जांच भी संगठित अपराध पर लगाम लगाने की रणनीति का हिस्सा है.
AGTF के सामने चुनौती- गैंगस्टर्स की सप्लाई चेन तोड़ना
गैंगस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई में सबसे बड़ी चुनौती उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है. विदेश में बैठे सरगना, दूसरे राज्यों में छिपे शूटर, स्थानीय मददगार, हथियारों की सप्लाई और आर्थिक लेनदेन-ये सभी कड़ियां आपस में जुड़ी हो सकती हैं. AGTF की रणनीति इन कड़ियों तक पहुंचने और अलग-अलग पुलिस इकाइयों के बीच समन्वय मजबूत करने पर केंद्रित है.