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Jaipur News: रेलवे में इन दिनों पदों के पुनर्गठन को लेकर नया गणित चर्चा में है. एक ओर उच्च स्तर के सुपरवाइजरी और तकनीकी पद बढ़ाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर निचले ग्रेड के पुराने पदों को सरेंडर करने का प्रस्ताव है. रेलवे के विभिन्न संगठनों ने इस व्यवस्था को लेकर विरोध जताना शुरू कर दिया है. पहले चरण में रेलवे में रिक्त पड़े कुल 24810 पदों को भरने का रास्ता खुल सकता है.
दरअसल, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने रेलवे में 5664 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी है. यह केवल नई भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे के कैडर ढांचे में बदलाव से भी जुड़ा हुआ है. वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने लेवल-6 और लेवल-7 के कुल 5664 नए पदों के सृजन पर सहमति दी है.
10939 निचले ग्रेड के पद होंगे सरेंडर
नए पदों के सृजन के साथ ही 10939 निचले ग्रेड के पद ‘मैचिंग वैल्यू’ के तहत सरेंडर किए जाएंगे. यानी रेलवे के प्रस्तावित फॉर्मूले के अनुसार एक तरफ सुपरवाइजरी और तकनीकी स्तर के पद बढ़ेंगे, तो दूसरी तरफ निचले स्तर के पुराने पदों की संख्या कम होगी. वित्त विभाग के इस प्रस्ताव को लेकर रेलवे की ओर से अभी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है. ऐसे में नए पदों और पुराने पदों के सरेंडर को लेकर अंतिम तस्वीर रेलवे के आदेश के बाद ही साफ होगी.
उत्तर पश्चिम रेलवे पर भी पड़ेगा असर
इस प्रस्ताव का असर उत्तर पश्चिम रेलवे पर भी पड़ सकता है. जयपुर मुख्यालय के अधीन आने वाले तकनीकी, ऑपरेटिंग, कमर्शियल और स्टोर्स कैडर में पदोन्नति के नए अवसर बनने की संभावना है. उत्तर पश्चिम रेलवे के हिस्से में कितने नए पद आएंगे और कितने पुराने पद सरेंडर होंगे, इसका अलग से जोनवार आंकड़ा उपलब्ध दस्तावेज में साफ नहीं है. रेलवे से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पहले चरण में नए स्वीकृत पदों के 50 फीसदी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.
24810 पदों पर भर्ती का रास्ता खुल सकता है
रेलवे में पहले चरण के तहत 2832 नए पदों को भरा जा सकता है. इसके अलावा पहले से इस वर्ग में खाली पड़े 21978 पद भी भरे जाएंगे. इस तरह कुल 24810 पदों पर भर्ती का रास्ता खुल सकता है. जब इन पदों पर करीब 80 फीसदी तक भर्ती हो जाएगी, तब बचे हुए नए पदों को दूसरे चरण में लिया जा सकेगा.
किस विभाग में कितने नए पद
नए स्वीकृत पदों में अलग-अलग विभागों के पद शामिल हैं. इनमें सिविल इंजीनियरिंग के 1284, इलेक्ट्रिकल के 1103 और एसएंडटी के 1019 पद हैं.
इसी तरह ट्रैफिक ऑपरेटिंग के 889, मैकेनिकल के 802, कमर्शियल के 477 और स्टोर के 90 पद शामिल हैं.
इन पदों के बढ़ने से रेलवे के फील्ड सुपरविजन और तकनीकी मॉनिटरिंग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. इसके साथ ही ऑपरेशनल कंट्रोल को बेहतर बनाने की दिशा में भी बदलाव किया जा सकेगा.
कर्मचारियों ने उठाया पुराने पद खत्म करने पर सवाल
उच्च ग्रेड के पद बढ़ाने के प्रस्ताव के बीच निचले स्तर के पदों को सरेंडर किए जाने को लेकर रेलवे कर्मचारियों ने आपत्ति जताई है. नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लॉईज यूनियन के महामंत्री मुकेश माथुर ने कहा कि अप्रैल में फेडरेशन के साथ जिन कैटेगरी में उच्च ग्रेड के पद बढ़ाने पर चर्चा हुई थी, उनमें जेई, एसएसई, स्टेशन मास्टर और डिपो सामग्री अधीक्षक जैसी कई कैटेगरी शामिल नहीं थीं.
अब इन संवर्गों को भी प्रस्तावित बदलाव से लाभ मिलने की बात सामने आ रही है. लेवल-7 के 50 फीसदी पद लेवल-8 में क्रमोन्नत होने से आगे पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे. वहीं सीसीटीसी के मर्ज कैडर में लेवल-6 और लेवल-7 के पद बनने से लेवल-5 के कर्मचारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है.
यूनियन का सवाल - नई कुर्सी के लिए पुरानी क्यों हटे?
यूनियन ने नए पदों के सृजन का विरोध नहीं किया है, लेकिन पुराने निचले स्तर के पदों को सरेंडर करने पर सवाल उठाया है. यूनियन का कहना है कि नए पद जरूरत के आधार पर अतिरिक्त बनाए जाने चाहिए, लेकिन इसके बदले पुराने पदों को खत्म करना उचित नहीं है.
यूनियन की आपत्ति का मूल सवाल यही है कि ऊपर नई कुर्सी बनाने के लिए नीचे की पुरानी कुर्सी क्यों हटाई जाए? रेलवे में नए पदों के सृजन और पुराने पदों के सरेंडर को लेकर अब आगे होने वाले आदेश और प्रक्रिया से तस्वीर और साफ होगी.