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त्योहारों के शुभ मुहूर्त में कोई सपनों का घर अपने नाम करवाने पहुंचा, तो कोई जमीन की रजिस्ट्री कराने. लेकिन सरकारी सिस्टम ने खरीददारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. जयपुर समेत प्रदेशभर में NIC का सर्वर बार-बार ठप होने और धीमी रफ्तार से चलने के कारण रजिस्ट्री का काम अटक गया. लोग सुबह से शाम तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे. सर्वर कुछ देर चला भी तो कछुआ चाल से, हालात ऐसे रहे कि मोटी स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क चुकाने को तैयार लोगों को भी रजिस्ट्री के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा. जयपुर के सब रजिस्ट्रार कार्यालय संख्या 9 और 10 में तो बदइंतजामी की इंतहा हो गई. यहां बिजली गुल होने से रजिस्ट्री का काम प्रभावित रहा. लोग मोबाइल की टॉर्च जलाकर दस्तावेज तैयार करते नजर आए. एक तरफ सर्वर ठप, दूसरी तरफ बिजली गुल. यानी रजिस्ट्री करवाने पहुंचे लोगों पर दोहरी मार. हैरानी की बात यह है कि नवरात्र के महज नौ दिनों में मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग को 429 करोड़ रुपए का राजस्व मिला. फिर भी आमजन को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है.
शुभ मुहूर्त में संपत्ति अपने नाम करवाने पहुंच रहे लोग
त्योहारी सीजन में घर, मकान और जमीन की खरीद-फरोख्त बढ़ रही है. लोग शुभ मुहूर्त में संपत्ति अपने नाम करवाने पहुंच रहे हैं. लेकिन सर्वर की सुस्त रफ्तार शुभ मुहूर्त पर भारी पड़ रही है. रजिस्ट्री के लिए खरीदार, विक्रेता और गवाहों को घंटों कार्यालयों में बैठना पड़ रहा है. अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स का काम भी प्रभावित हो रहा है. आंकड़े भी सिस्टम की बदहाली पर सवाल खड़े करते हैं. नवरात्र के नौ दिनों में 429 करोड़ रुपए का राजस्व, यानी हर दिन औसतन करीब 47 करोड़ 67 लाख रुपए की कमाई. लेकिन करोड़ों का राजस्व देने वाले विभाग में निर्बाध सर्वर और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सवालों के घेरे में हैं. ऑनलाइन रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया सर्वर पर निर्भर है. ऐसे में तकनीकी खामी का खामियाजा सीधे आमजन को भुगतना पड़ रहा है.
जनता का वक्त हो रहा बर्बाद
बहरहाल, जिस विभाग से सरकार का खजाना भर रहा है, उसी विभाग में जनता का वक्त बर्बाद हो रहा है. त्योहार पर संपत्ति खरीदने वालों से सरकार को करोड़ों की कमाई हो रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर सर्वर की सुस्ती और बिजली की बदइंतजामी मिल रही है. सवाल यही है कि जब रजिस्ट्री का शुल्क पूरा लिया जाता है तो सुविधा अधूरी क्यों और आखिर कब तक सरकारी सिस्टम की खामी का खामियाजा आमजन भुगतता रहेगा.