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पितरों को ऐसे करें प्रसन्न: धौलपुर के पंडित हरद्वारी लाल से जानिए क्या कहते हैं ज्योतिष के नियम

Dholpur News: धौलपुर में 26 सितंबर से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हुई. पहले दिन पार्वती और बामनी नदी किनारे श्रद्धालुओं ने पितरों के लिए जल तर्पण किया. पंडितों ने श्राद्ध पक्ष की परंपराओं और इन दिनों तामसिक भोजन व शुभ कार्यों से बचने की जानकारी दी.

Written By Sandhya Yadav
Published: Sep 26, 2026, 04:09 PM IST | Updated: Sep 26, 2026, 04:11 PM IST
Image Credit: 26 सितंबर से शुरू हुआ श्राद्ध पक्ष 10 अक्टूबर तक चलेगा.
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Dholpur News: धौलपुर में शनिवार से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो गई. पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने, उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और दान धर्म करने का विशेष समय माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों पितरों की मुक्ति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विधि-विधान से कर्म किए जाते हैं. इसी मान्यता के चलते शनिवार सुबह से ही शहर के नदी किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई.

26 सितंबर से शुरू हुआ श्राद्ध पक्ष
इस बार श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा. भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलने वाले इस पक्ष में पूर्वजों की तिथिवार श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है. श्रद्धालु अपने परिवार में दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं. इस दौरान विप्र को घर बुलाकर भोजन कराने के साथ यथायोग्य दान दक्षिणा देने की परंपरा भी बताई गई है.

पार्वती और बामनी नदी पर पहुंचे श्रद्धालु
श्राद्ध पक्ष के पहले दिन शनिवार को अल सुबह ठंडक भरे मौसम के बीच श्रद्धालु बसेड़ी रोड स्थित पार्वती नदी और सरमथुरा रोड स्थित बामनी नदी राम दरबार आश्रम पहुंचे. यहां लोगों ने नदी किनारे अपने पितरों के लिए जल तर्पण किया. इस दौरान पंडित महेश पाराशर और आचार्य गांधी पचौरी ने श्रद्धालुओं को विधि-विधान से जल तर्पण कराया. साथ ही श्राद्ध पक्ष से जुड़ी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी दी.

16 दिन की जगह इस बार 15 दिन का श्राद्ध पक्ष
पंडित हरद्वारी लाल पाराशर ने बताया कि श्राद्ध पक्ष सामान्य तौर पर 16 दिन का होता है, लेकिन इस बार यह 15 दिन रहेगा. यह भाद्र मास की पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन मास की अमावस्या तक चलेगा.

उन्होंने बताया कि परिवार में जिस तिथि को किसी पूर्वज का निधन हुआ है, उस तिथि पर विप्र को भोजन कराने की परंपरा है. इसके साथ ही गाय, कुत्ते और कौए को भी प्रथम आहार का कुछ अंश देने की परंपरा बताई गई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे पितरों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है.

तामसिक भोजन और शुभ कार्यों से बचने की सलाह
जल तर्पण के पहले दिन पंडित महेश पाराशर ने श्रद्धालुओं को बताया कि श्राद्ध पक्ष के दौरान तामसिक भोजन से बचना चाहिए. इन दिनों किसी तरह का जश्न या उत्सव नहीं मनाने और शुभ कार्यों से दूर रहने की परंपरा बताई गई है. उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो घर में प्रतिदिन गीता का पाठ करना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे पितरों को शांति और मुक्ति प्राप्त होती है.

ठंडे मौसम में हुआ जल तर्पण
शनिवार सुबह जब श्रद्धालु पितरों को पहला जल देने नदी किनारे पहुंचे तो मौसम में हल्की ठंडक महसूस हुई. पिछले दो दिनों से मौसम में बदलाव के कारण ठंडी फुहारों से लोगों को गर्मी से राहत मिली है. आचार्य गांधी पचौरी ने बताया कि कनागत के पहले दिन बारिश होना धार्मिक दृष्टि से अच्छा योग माना जाता है, लेकिन इससे अतिवृष्टि की संभावना भी हो सकती है, जो फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है.

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लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है.आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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