मिर्ज़ापुर' के शूरवीर गाने पर बवाल: लक्ष्यराज सिंह का मेकर्स पर फूटा गुस्सा, बोले- "इतिहास और अस्मिता से समझौता नहीं"
मिर्ज़ापुर द मूवी' में महाराणा प्रताप को समर्पित गीत 'शूरवीर' गाने को फिल्माए जाने को लेकर बवाल मच गया है. रैपरिया बालम की आपत्ति के बाद अब मेवाड़ राजघराने के डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने भी मेकर्स को दो टूक कहा है कि इतिहास और अस्मिता से समझौता मेवाड़ नहीं सहेगा.
मनोरंजन और रचनात्मक स्वतंत्रता की आड़ में ऐतिहासिक महानायकों की गरिमा से खिलवाड़ का एक नया मामला राजस्थान में सामने आया है. 'मिर्ज़ापुर द मूवी' में राजस्थानी रैपर रैपरिया बालम के मशहूर गीत 'शूरवीर' के इस्तेमाल पर एक बड़ा और गहरा विवाद खड़ा हो गया है. ये गीत मूल रूप से मेवाड़ के गौरव और भारत के स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप को समर्पित था, लेकिन फिल्म में इसे गैंगस्टर्स और अपराध की पृष्ठभूमि वाले किरदारों पर फिल्माया गया है. अब इस विवाद में मेवाड़ राजघराने की सीधी एंट्री हो गई है, जिससे मेकर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
'इतिहास और अस्मिता से समझौता नहीं' - डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़
इस पूरे विवाद में सबसे नया और कड़ा रुख मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने अख्तियार किया है. उनके आधिकारिक वक्तव्य ने इस मुद्दे को एक नई धार दे दी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ के गौरव नहीं, बल्कि भारत की स्वाभिमान, त्याग, शौर्य और नैतिक दृढ़ता की उस अमर परंपरा के प्रतीक हैं, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया.
डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने निर्माताओं को फटकार लगाते हुए कहा, "ऐसे महान व्यक्तित्व को किसी फिल्म या मनोरंजन की सामग्री में ऐसे संदर्भों और आपराधिक पात्रों के साथ प्रस्तुत करना, जो उनके आदर्शों के सर्वथा विपरीत हों, अत्यंत आपत्तिजनक है. रचनात्मक स्वतंत्रता का सम्मान आवश्यक है, किंतु इसके साथ इतिहास, संस्कृति और जनभावनाओं के प्रति उत्तरदायित्व भी जुड़ा होता है." उन्होंने मेकर्स से विवादित दृश्य को तत्काल हटाने या संशोधित करने की मांग करते हुए दो-टूक कहा है कि मेवाड़ अपने इतिहास और अस्मिता की गरिमा से कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा.
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करणी सेना का अल्टीमेटम, 'पद्मावत' जैसा होगा अंजाम
इससे पहले श्री राजपूत करणी सेना ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है. करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने निर्माताओं को अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर फिल्म से इस विवादित हिस्से को तुरंत नहीं हटाया गया, तो देश भर में 'पद्मावत' और 'जोधा अकबर' फिल्म के समय हुए उग्र विरोध प्रदर्शन जैसा ही आंदोलन शुरू किया जाएगा और फिल्म का प्रदर्शन रुकवाया जाएगा. मकराना ने कहा कि महाराणा प्रताप जैसे वीर महापुरुष को समर्पित गीत को अपराधियों और गैंगस्टर्स के दृश्यों के साथ जोड़कर दिखाना पूरे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी जताई कड़ी आपत्ति
वरिष्ठ राजनेता राजेंद्र राठौड़ ने भी इस पूरे प्रकरण को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का अपमान बताया है. उन्होंने कहा, "एक शूरवीर (योद्धा) के चरित्र और एक गैंगस्टर के मूल्यों के बीच स्पष्ट अंतर होता है. बहादुरी, त्याग, धर्म, आत्म-सम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण जैसे पवित्र मूल्यों को अपराध, हिंसा और गैंगस्टर संस्कृति से जोड़कर दिखाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है." इससे गाने का असली भाव पूरी तरह से बदल जाता है।
क्या है गाने का मूल विवाद ?
आपको बता दें कि इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब 'शूरवीर' गाने के गायक और रचयिता रैपरिया बालम (Rapperiya Baalam) ने खुद सामने आकर अपना विरोध दर्ज कराया था. उन्होंने स्पष्ट किया था कि जिस गीत की रचना महाराणा प्रताप के शौर्य को नमन करने के लिए की गई थी, उसे फिल्म में गैंगस्टर्स पर इस्तेमाल कर उसकी आत्मा को मार दिया गया है.