Kota Nikay Chunav 2026 : वोटर लिस्ट में पवनपुत्र ! वार्ड 29 में जगदीश की जगह छप गई हनुमान जी की फोटो
Kota Nikay Chunav 2026 : कोटा नगर निगम चुनाव के वार्ड 29 की वोटर लिस्ट में 35 साल के वोटर की फोटो की जगह पर भगवान हनुमान जी की तस्वीर छप गयी. इस अजीबोगरीब गलती के बाद कई दिनों से असली वोटर की तलाश में प्रशासन जुटा है.
Kota Nikay Chunav 2026 : कोटा नगर निगम चुनाव में इस बार तो कुछ ऐसा हो गया, जिसे देखकर हर कोई हैरान और परेशान हो गया. दरअसल वार्ड नंबर 29 की वोटर लिस्ट में भाग संख्या 12 की मतदाता सूची में क्रमांक 1294 पर 35 वर्षीय जगदीश (पुत्र रामचंद्र) का नाम और प्रेम नगर सेकंड (कंसुआ) का पता तो एकदम सही दर्ज था, लेकिन उनके फोटो वाले कॉलम में उनकी खुद की तस्वीर की जगह भगवान हनुमान जी महाराज की फोटो छप गई है.
हाल ये है कि क्षेत्र के बीएलओ (BLO) राजेश गुप्ता पिछले 10 दिनों से असली 'जगदीश' की तलाश में गली-गली भटक रहे हैं, लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं चल रहा है. ऊपर से वोटर लिस्ट में मोबाइल नंबर भी दर्ज नहीं है, जिससे संपर्क साधना और भी मुश्किल हो गया है. बीएलओ का कहना है कि उन्होंने इस नाम का सत्यापन नहीं किया था, ये नाम या तो SIR प्रक्रिया या सीधे ऑफिस में आए आवेदन से जुड़ा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को रिपोर्ट भेज दी गई है.
दिलचस्प बात ये है कि कोटा में ऐसी हरकत पहली बार नहीं हुई है. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भी एक वोटर की फोटो की जगह गलती से 'अलमारी' की तस्वीर छप गई थी, जिसे बाद में सुधारा गया था. फिलहाल प्रशासन असली मतदाता को ढूंढने और इस गलती को सुधारने में जुटा हुआ है.
कैसे बनती है वोटर लिस्ट ?
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, पुराने नाम हटाने या पते में संशोधन के लिए फॉर्म (जैसे फॉर्म 6, 7, 8) जमा करते हैं. इन जामा किए गए इन आवेदनों और दस्तावेजों को निर्वाचन विभाग के सेंट्रलाइज्ड सॉफ्टवेयर पोर्टल पर डिजिटल रूप से फीड किया जाता है. ऑपरेटर नाम, पता और अपलोड की गई फोटो को संबंधित क्रम संख्या (सीरियल नंबर) पर दर्ज करते हैं. पहले ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर आपत्तियां मांगी जाती हैं, और अंत में तमाम सुधारों के बाद फाइनल वोटर लिस्ट छपाई के लिए प्रेस या पीडीएफ फॉर्मेट में तैयार की जाती है.
छपाई या डेटा-मैपिंग में गलती कैसे हो जाती है ?
जब हजारों-लाखों फॉर्म ऑनलाइन अपलोड हो रहे होते हैं, तो कई बार ऑपरेटर की एक छोटी सी गलती या सर्वर हैंग होने की वजह से एक शख्स की फाइल में दूसरे की तस्वीर अटैच हो जाती है. हो सकता है कि कंप्यूटर या फोन की गैलरी से कोई अन्य तस्वीर (जैसे भगवान हनुमान की तस्वीर) गलती से उस फोल्डर से सिंक या सेलेक्ट हो गई हो. कई बार ऑटोमेटेड डेटा प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर फाइलों को रि-नेम या इंडेक्स करते वक्त इमेज के पाथ को बदल देता है, जिससे डेटाबेस में नाम किसी और का रहता है और फोटो किसी अन्य फोल्डर से उठकर प्रिंटिंग कतार में आ जाती है.वहीं डेटा इतना ज्यादा होता है कि प्रिंटिंग से पहले हर एक पन्ने की फोटो और नाम का भौतिक सत्यापन मैनुअली बारीकी से नहीं हो पाता, जिसके चलते ये तकनीकी और मानवीय भूल सीधे छपकर बाहर आ सकती है.