Kota News: कोटा के आकाश चौधरी ने लगातार 10 बार असफल होने के बावजूद हिम्मत नहीं छोड़ी. आखिरकार 11वें प्रयास में उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का अपना सपना पूरा कर लिया. उनकी सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार कोशिश के बावजूद मंजिल हासिल नहीं कर पाते.
आकाश ने बचपन से ही सैन्य जीवन को करीब से देखा और खुद को उसी दिशा में तैयार किया. कक्षा 8वीं से ही वह परिवार से दूर रहे और राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, बेलगावी में शिक्षा हासिल की.
घर से दूर रहकर सीखा अनुशासन
कम उम्र में परिवार से दूर रहना आकाश के लिए आसान नहीं था. घर की याद के साथ सैन्य स्कूल का सख्त अनुशासन भी शुरुआत में चुनौती बना. हालांकि, समय के साथ उन्होंने खुद को वहां के माहौल के अनुरूप ढाल लिया.
धीरे-धीरे अनुशासन और नियमित मेहनत उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गए. पढ़ाई और सेना में जाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आकाश रोजाना करीब 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे.
10वें प्रयास के बाद छोड़ना चाहते थे तैयारी
लगातार मेहनत के बावजूद आकाश को 10 प्रयासों में सफलता नहीं मिली. 10वें प्रयास के बाद वह इतने निराश हो गए कि उन्होंने तैयारी छोड़ने का मन बना लिया था. इसी मुश्किल समय में उनके पिता नरेंद्र चौधरी ने उनका हौसला बढ़ाया.
पिता ने आकाश को चींटी का उदाहरण देते हुए समझाया कि बार-बार गिरने के बावजूद कोशिश जारी रखनी चाहिए. इस सीख ने आकाश को दोबारा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने फिर से तैयारी शुरू की और 11वें प्रयास में सफलता हासिल कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का सपना पूरा कर लिया.
पिता ने 17 साल सेना में दी सेवा
आकाश के पिता नरेंद्र चौधरी खुद भी सेना में 17 साल तक सेवा दे चुके हैं. वर्तमान में वह कोटा पुलिस लाइन में कांस्टेबल हैं. बेटे की सफलता में पिता की सीख और परिवार के सहयोग की अहम भूमिका रही.
आकाश की मां भी बेटे के बचपन से घर से दूर रहने के दिनों को याद कर भावुक हैं. परिवार के लंबे त्याग और आकाश की लगातार मेहनत का परिणाम आज उनकी सफलता के रूप में सामने आया है.
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी
आकाश चौधरी की कहानी बताती है कि लगातार मिलने वाली असफलता मंजिल का अंत नहीं होती. 10 बार नाकाम होने के बाद भी उन्होंने प्रयास जारी रखा और 11वीं कोशिश में सफलता हासिल की. उनकी यात्रा युवाओं को यह संदेश देती है कि धैर्य, अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ असफलताओं को पार कर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.